सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है। फाइल फोटो
कांग्रेस हाईकमान ने छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल की जगह राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को पंजाब में पार्टी का नया प्रभारी लगा दिया है। पायलट वही नेता हैं, जिन्होंने 2018 में गुटबाजी के बावजूद राजस्थान में कांग्रेस को बहुमत दिलाया था।
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तब पायलट को 2013 में राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। वहां उन्होंने 5 साल ग्राउंड पर काम किया। अलग-अलग गुटों से तालमेल बैठाया। कांग्रेस हाईकमान को पंजाब में भी गुटों में बंटी कांग्रेस के नेताओं से तालमेल कर पायलट से इसी करिश्मे की उम्मीद है।
हालांकि सचिन पायलट के लिए पंजाब कांग्रेस में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। 2027 के चुनाव में अब करीब 5 महीने का ही टाइम बचा है, ऐसे में नेताओं का भरोसा जीतने से लेकर टिकट बंटवारे में बैलेंस करने तक उन्हें कई चैलेंज का सामना करना होगा।

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा वड़िंग और पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी।- फाइल फोटो
पायलट के प्रभारी बनने से जुड़े 4 बड़े संयोग
1. रंधावा और पायलट एक-दूसरे के बॉस बने सचिन पायलट अब पंजाब में कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा के बॉस होंगे। वहीं सुखजिंदर रंधावा राजस्थान में पायलट के बॉस होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि रंधावा राजस्थान कांग्रेस और पायलट पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बन गए हैं।
2. भाजपा और कांग्रेस, दोनों के प्रभारी राजस्थान से भाजपा ने हाल ही में राजस्थान के नेता डॉ. सतीश पूनिया को पार्टी का पंजाब प्रभारी लगाया है। पूनिया हरियाणा में 2024 में लगातार तीसरी बार BJP की सरकार रिपीट कराई। अब उनकी रणनीति को काउंटर करने के लिए प्रभारी लगाए पायलट भी राजस्थान से ही हैं।
3. पिछले चुनाव में भी राजस्थान से प्रभारी, हार गई थी पार्टी कांग्रेस 2022 के बाद 2027 का चुनाव भी राजस्थान से जुड़े नेता की अगुआई में ही लड़ेगी। 2022 के चुनाव में राजस्थान से कांग्रेस नेता हरीश चौधरी कांग्रेस के प्रभारी थे। हालांकि वह कोई कमाल नहीं दिखा सके और कांग्रेस 2022 में 117 सीटों में महज 18 सीटों पर सिमट गई थी।
4. पिछली बार भी कलह के चलते बदले गए थे प्रभारी सचिन पायलट की नियुक्ति भी 2022 में कांग्रेस की कलह के बाद हुई है। तभी भी कैप्टन अमरिंदर सिंह व नवजोत सिद्धू के बीच लड़ाई छिड़ी। कांग्रेस ने कैप्टन को CM कुर्सी से हटाया तो सिद्धू और सीएम चरणजीत चन्नी में झगड़ा चला। जिसके बाद उत्तराखंड के कांग्रेस नेता हरीश रावत की जगह हरीश चौधरी को प्रभारी बनाया गया था।

सचिन पायलट, डॉ. सतीश पूनिया और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा।
सचिन पायलट के सामने बड़ी चुनौतियां..
- चन्नी-वड़िंग विवाद को सुलझाना: पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले पूर्व CM व जालंधर से सांसद चरणजीत चन्नी व प्रदेश प्रधान अमरिंदर राजा वड़िंग के बीच कलह चल रही है। दोनों नेताओं और उनके समर्थकों को साथ लाना होगा।
- पक्षपात के ठप्पे से बचना: भूपेश बघेल खुलकर राजा वड़िंग के साथ चले। वड़िंग को बदलने के सवाल पर वह दोटूक कहते थे कि ये कोई गुड्डे-गुड्डी का खेल नहीं। इसी वजह से उन पर वड़िंग को सपोर्ट करने का ठप्पा लगा। पायलट को इससे बचना होगा वर्ना उनके खिलाफ मोर्चा खुलते देर नहीं लगेगी।
- संगठन की मजबूती, जॉइंट स्ट्रेटजी बनाना: पायलट के जिम्मे सबसे बड़ा काम जॉइंट स्ट्रेटजी बनाने की रहेगी। इसके लिए सभी नेताओं को साथ लाना होगा। पार्टी को भी बूथ तक मजबूत करना होगा। अभी जिला स्तर पर वड़िंग समर्थकों की टीम नियुक्त है। ऐसे में चन्नी, बाजवा और रंधावा जैसे बड़े नेताओं के लिए भी वही सम्मान दिलाना होगा।
- टिकट बंटवारे में बैलेंस: ये सबसे अहम काम होगा, क्योंकि हर नेता चाहेगा कि उसके समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकट मिलें। चन्नी का ग्रुप 117 में से 92 सीटों के नेताओं को इकट्ठा कर दावा ठोक चुका है। वहीं वड़िंग कहते रहे हैं कि 50% टिकट यूथ को देंगे। ऐसे में पायलट को टिकट बंटवारे को लेकर दोनों तरफ के नेताओं को संतुष्ट करना होगा।

भूपेश बघेल के जनरल डायर वाली फोटो और गो बैक के स्लोगन।
बघेल की छुट्टी करने की नौबत क्यों आई
कांग्रेस में चुनाव से पहले संगठन में फेरबदल की मांग थी। कांग्रेस हाईकमान ने सर्वे भी कराया। चन्नी ग्रुप ने दावा किया कि ज्यादातर नेता व कार्यकर्ता चन्नी को प्रधान बनाने के पक्ष में थे। मगर, प्रभारी भूपेश बघेल लगातार इससे इनकार करते रहे। इसके बाद चन्नी ग्रुप ने वड़िंग को हटाने की मांग की तो बघेल उन्हें फटकारने वाले जवाब देते रहे।
बघेल जब पहली बार पंजाब आए तो चन्नी ग्रुप ने दूरी बना ली। बघेल वड़िंग के खेमे में जाकर बैठ गए। इसके बाद दौरे के आखिरी दिन बघेल चन्नी ग्रुप से मिले जरूर लेकिन उसके बाद राजा वड़िंग की डिफेंडर में बैठकर चले गए, जिसे चन्नी ग्रुप ने समझ लिया कि बघेल ने उन्हें नीचा दिखाया है।
इसके बाद बगावत और तेज हो गई। राजा वडिंग ने दोबारा प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद 31 जुलाई से 8 अगस्त के बीच हर बूथ, कांग्रेस मजबूत अभियान चलाया था। फतेहगढ़ साहिब में हुए पहले ही प्रोग्राम में चन्नी और उनके समर्थक कार्यक्रम से दूर रहे। संगरूर में बघेल की मौजूदगी में चन्नी समर्थकों ने हंगामा किया। नौबत हाथापाई और धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। पटियाला में हुए प्रोग्राम में भी चन्नी को सीएम चेहरा बनाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
इस दौरान पंजाब के इतिहास में पहली बार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसी प्रदेश प्रभारी के खिलाफ गो-बैक के पोस्टर लगाए। लुधियाना के प्रोग्राम में चन्नी गुट ने बघेल गो बैक लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध किया। दोनों खेमों में तीखी झड़प के बाद हाथापाई हुई।
इसी बीच राहुल गांधी का इसी महीने पंजाब दौरा फाइनल हो गया। गुटबाजी दूर करने को लेकर 3 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल, राजा वड़िंग की बैठक राहुल गांधी की टीम से हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इसमें पंजाब की गुटबाजी पर चर्चा हुई। इसके बाद बघेल को हटाने पर सहमति बनी।

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