रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर इस बार शुभ संयोग बन रहे हैं। पूर्णिमा 27 अगस्त को ही लग जाएगी, जो 28 अगस्त की सुबह 9 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की मान्यता होती है। इसलिए 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।
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सुबह 9 बजे तक राखी बांधना सबसे ज्यादा फलदायी होगा। हालांकि, 9:45 से 12 बजे तक राहुकाल लगेगा। लेकिन, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया भी नहीं रहेगा। इससे बहनें बिना किसी बाधा के भाई को राखी बांध सकेंगी।
ज्योतिषाचार्य श्नीराम शर्मा ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे के आसपास सुकर्मा योग शुरू होगा। इस योग में किए गए धार्मिक और शुभ कार्यों को फलदायी माना जाता है। साथ ही इस बार शतभिषा नक्षत्र में रक्षाबंधन पड़ रहा है। यह नक्षत्र मन को शांति देने वाला होता है। इसलिए इस बार राखी का पर्व भाई-बहन के रिश्ते में स्थिरता और मजबूती का संकेत दे रहा है।
सुबह पूर्णिमा में राखी बांधना ज्यादा शुभ
वाराणसी में मंगला गौरी के पुजारी गिरिश गुरु के मुताबिक, राहुकाल छोड़कर रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकता है, क्योंकि दिन में भद्रा का प्रभाव नहीं है। हालांकि, पूर्णिमा तिथि के दौरान राखी बांधना बेहद शुभ माना जाएगा।
सुबह 6 से 9:45 बजे तक राखी बांधने का अच्छा समय है। इसके बाद राहुकाल शुरू हो रहा है। उस समय राखी बांधने से बचना चाहिए। इसके बाद दिन में 12 बजे से 2 बजे तक भी राखी बांधने का दूसरा शुभ समय है। वैसे 2 बजे के बाद भी राखी बांधी जा सकती है। इसमें कोई दोष नहीं है।

सुकर्मा योग में किए गए शुभ कार्य फलदायी
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया- इस बार रक्षाबंधन पर सुकर्मा योग का संयोग भी बन रहा है। इस योग में किए गए धार्मिक और शुभ कार्यों का अच्छा फल मिलता है।
ऐसे में बहन का भाई को रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करना शुभ माना जा रहा है। वहीं, शतभिषा नक्षत्र में मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ होता है। इस नक्षत्र में अगर बहन भाई के दीर्घ आयु की कामना करती है, तो भाई की सेहत अच्छी रहती है।

ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा ने बताया कि भाइयों को बहनें कार्टून वाली राखी बिल्कुल न बांधें।
मौली या रेशम की डोरी बांधना शुभ
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, चाइनीज राखी (जिसमें कार्टून लगे होते हैं)।न तो छोटे और न ही बड़े भाइयों को बांधनी चाहिए। यह आडंबर है। पारंपरिक मौली या रेशम की डोरी से बना रक्षा सूत्र बांधना ज्यादा शुभ माना जाता है। छोटे भाइयों को आप प्यार से कोई खिलौना गिफ्ट कर सकते हैं।
पहले कच्चे सूत को पीले रंग में रंगकर रक्षा सूत्र बनाया जाता था। ब्राह्मण भी अपने यजमानों को यही रक्षा सूत्र बांधते थे, उनकी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना करते थे।

ऐसे करें राखी की पूजा
रक्षाबंधन के दिन स्नान करने के बाद भगवान का ध्यान करें। भाई को तिलक लगाएं, आरती उतारें और रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करें। बहनों को भाई को राखी बांधने से पहले उपवास करना चाहिए। मान्यता के अनुसार, बहन भाई की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की प्रार्थना करती है, वहीं भाई बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है।

राखी के दिन ही मनाई जाती है श्रावणी
ज्योतिषाचार्य श्रीराम शर्मा के मुताबिक, रक्षाबंधन के दिन श्रावणी पर्व भी मनाया जाता है। इसे ब्राह्मणों का प्रमुख पर्व माना जाता है। इस दिन ब्राह्मण स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के बाद प्रायश्चित करते हैं। दरअसल, ब्राह्मणों का मुख्य कर्म पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कराना है।
ऐसे में सालभर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के प्रायश्चित के लिए श्रावणी पर्व पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। गंगा स्नान के बाद यज्ञ कर संकल्प लिया जाता है। जिससे जाने-अनजाने में जो दोष उन पर लगे हैं, उससे उन्हें मुक्ति मिल जाए।

भारतीय परंपरा में चार प्रमुख वर्णों के अलग-अलग प्रमुख पर्व भी माने गए हैं। श्रावणी पर्व रक्षाबंधन के दिन ही मनाया जाता है। वाराणसी में इस दिन गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण जुटकर स्नान, प्रायश्चित और यज्ञोपवीत से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
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