प्रयागराज में तीन दिन की लगातार मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में 5 फीट तक पानी भर गया। दैनिक भास्कर से बातचीत में डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा- जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन और अल्लापुर जैसे इलाके निचले हैं, यहां हर साल पानी भरता है। इस बार 20-25
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महाकुंभ के दौरान शहर में सड़क, फ्लाईओवर और दूसरे विकास काम हुए, लेकिन जल निकासी को लेकर अभी काम होना बाकी है। शहर की जमीनी स्थिति भी जल निकासी को मुश्किल बनाती है। पिछले 20-25 साल में हुए निर्माण कामों से पानी का प्राकृतिक बहाव भी प्रभावित हुआ है।
अब शहर की जमीन की बनावट और जल निकासी की पूरी व्यवस्था को ध्यान में रखकर जल निकासी का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें नए पंपिंग स्टेशन और ड्रेन्स या नालियां बनाने, पुरानी संकरी नालियों को चौड़ा करने और चोक पॉइंट्स को स्थायी रूप से ठीक करने की योजना है। जिससे अगली बारिश में शहर को दोबारा इस तरह के जलभराव का सामना न करना पड़े। पढ़िए प्रयागराज में जलभराव को लेकर सवाल और DM के जवाब…

सवाल : कैसे सिस्टम फेल हो गया? क्या स्थिति हुई जो हर जगह जलभराव हो गए?
जवाब: प्रयागराज शहर में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो बहुत ही लो-लाइंग (निचले) इलाकों में हैं। वहां हर साल जलभराव होता है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। खासकर जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन और अल्लापुर वाले इलाकों में हर साल पानी भरता है। यहां से पानी को पंप करके ही मेन ड्रेनेज में ट्रांसफर किया जाता है।
इस बार लगातार तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई, जिससे इन निचले इलाकों में पानी भर गया। इसे निकाला जा रहा है। पिछले 24 घंटों में काफी सुधार हुआ है। हम लोग लगातार दिन-रात क्षेत्र के भ्रमण पर थे। ज्यादातर पानी निकल चुका है, बस एक-दो गलियां जो काफी गहरी हैं, वहां थोड़ा पानी बचा है।
निरीक्षण के दौरान यह सामने आया है कि जो 20-25 साल पुरानी अंडरग्राउंड ड्रेंस हैं, उनमें कुछ चोक पॉइंट्स हो गए थे। चोक पॉइंट्स की सटीक लोकेशन न मिलने के कारण उन्हें ढूंढने में दिक्कत आ रही थी। इसके लिए कुछ जगहों पर सड़क तोड़कर भी उन्हें क्लियर कराया गया है। पानी पूरी तरह निकलने के बाद इन पुरानी ड्रेनेज लाइनों के चोक पॉइंट्स को पूरी तरह ठीक किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न हो।

DM ने कहा- हम पूरे शहर की जमीनी बनावट को ध्यान में रखकर ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार कर रहे हैं।
सवाल: महाकुंभ को लेकर बहुत काम हुए, इसके बावजूद दिक्कत क्यों हुई? क्या भ्रष्टाचार भी हुआ?
जवाब: देखिए, शहर में जो काम हुए हैं वे देख सकते हैं, फ्लाईओवर्स बने हैं, सड़कें चौड़ी हुई हैं। इससे शहर के लोगों को काफी लाभ हुआ है, इससे सभी सहमत होंगे। अभी ड्रेनेज एक ऐसा फ्रंट है जिस पर काम होना बाकी है। हम उस पर काम कर रहे हैं। प्रयागराज के लिए एक ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ बनाने की जरूरत है। शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ यमुना नदी है और बीच का हिस्सा दोआब क्षेत्र है।
नदियों का जलस्तर जब 80 मीटर के पार चला जाता है, तो पानी को डेन से नदियों या एसटीपी तक पहुंचाने में समस्या आती है। इसके अलावा, पिछले 20-25 वर्षों में बड़े पैमाने पर निर्माण काम हुए हैं, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव (नेचुरल फ्लो) बाधित हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के हॉस्टल में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। बिस्तर खराब गए।
सवाल: हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और आपको पेश भी होना पड़ा। आपके सामने क्या चुनौतियां रहीं?
जवाब: ये मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए वहां जो भी निर्णय या निर्देश होगा, हम उसके अनुसार विधिक कार्यवाही करेंगे। इस समय मैं खुद, हमारे प्रशासनिक अधिकारी और सभी सीनियर ऑफिसर्स लगातार फील्ड में डटे हुए हैं, ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके। जहां-जहां समस्याएं हैं, उनका इस बार स्थायी समाधान निकाला जा रहा है।
सवाल : नगर निगम पर भी आरोप लगे। विपक्षी नेताओं का कहना है कि करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ, क्या कहेंगे?
जवाब- देखिए, अब आरोप-प्रत्यारोप में तो मुझे नहीं पता है, लेकिन नालों की सफाई मई-जून में काफी अच्छे से कराई गई थी। अशोक नगर या ममफोर्डगंज एरिया में हर साल जलभराव होता था। लेकिन, इस बार उन क्षेत्रों में कहीं पानी नहीं भरा और बहुत आसानी से निकल गया।
अब शहर का सारा पानी आकर निचले इलाकों टैगोर टाउन, जॉर्ज टाउन, अल्लापुर, राजरूपपुर में इकट्ठा हो गया। ऐसी जगहों पर बड़ा काम कराने की जरूरत है, ताकि आगे से ऐसी दिक्कत न हो। इस जलभराव को दूर करने के बाद जैसे ही हमारी पूरी टीम खाली होगी, तो अगला टारगेट यही है कि भविष्य में दिक्कतें न हों, इसके लिए मास्टर प्लान पर काम करेंगे।

जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए एक साथ 3 से 4 पंपिंग सेट चलाए गए।
सवाल: आपदा जैसी स्थिति न बने, इसके लिए क्या प्लान तैयार कर रहे हैं?
जवाब: अभी जो जलभराव है, उसको निकालने में हम लोगों ने सफलता पाई है। आगे इस तरह की कहीं कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए पूरा मास्टर प्लान बनाया गया है। उसी के अनुसार जो भी ड्रेन्स वगैरह का निर्माण कराया जाएगा और जो चोक पॉइंट्स हैं उनको क्लियर किया जाएगा। ताकि, अगले बरसात के समय कहीं कोई इस तरह की ड्रेनेज या जलभराव की समस्या ना हो।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2 घंटे सफाई देते रहे नगर आयुक्त
प्रयागराज में बारिश के बाद शहर में 5 फीट तक हुए जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा को निर्देश दिया कि अगले 24 घंटे में शहर के निचले इलाकों से जलभराव खत्म कराएं। जहां भी पानी भरा है, वहां पर्याप्त संख्या में वाटर पंप लगाकर तत्काल पानी निकाला जाए।
कोर्ट ने नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा से प्रभावित इलाकों की तत्काल कार्ययोजना तैयार कर अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त करीब 2 घंटे तक सफाई देते रहे।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल जलभराव को दूर करें, लेकिन समस्या का समाधान केवल पंप लगाकर पानी निकालने तक सीमित नहीं रहेगा। कोर्ट ने जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था पर भी रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को दोपहर 2 बजे होगी। उस दिन भी नगर आयुक्त को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है।
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तस्वीर जार्ज टाउन की है। पहले जहां जलभराव था, वहीं गुरुवार को पानी निकाला जा चुका था। सड़कों पर कीचड़ फैला रहा।

तस्वीर गुरुवार शाम की है। घर में भरा पानी निकला तो लोगों ने सफाई की।
रविवार रात करीब 1 बजे से शुरू हुई बारिश गुरुवार को सुबह थमी। गुरुवार को दिनभर प्रशासन शहर में भरे पानी को निकलने में लगा रहा। जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए कई जगहों पर एक साथ 3 से 4 पंपिंग सेट चलाए गए। अब इन जगहों पर कीचड़ जमा है। लोगों के घरों से पानी निकला तो वे घरों की सफाई में दिन-रात लगे रहे। कई लोगों की फ्रिज, बेड, गाड़ियां आदि खराब हो गईं। सड़कों और अन्य जगहों पर कचरा इकट्ठा हो गए हैं। लोगों ने कहा कि अब मच्छर बढ़ने का खतरा होगा, इससे डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
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प्रयागराज में 2000 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ा: बारिश से बिस्तर डूबे, खाने की दिक्कत हुई तो पलायन शुरू, बोले- चाय तक को तरस गए

”मेरे हॉस्टल में पानी भर गया है। तख्त डूब गए हैं। हॉस्टल से ही 35-40 छात्र पलायन कर घर चले गए हैं। चारों तरफ गंदगी फैली है। जार्जटाउन जैसे पॉश इलाके का ये हाल है।बाकी जगहों के छात्र भी शहर छोड़कर घर जा रहे हैं। खाने-पीने की परेशानी होने लगी है, इसी वजह से हम भी घर जा रहे हैं।” ये बातें प्रयागराज में बारिश के बीच जलभराव से परेशान प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र पवनेश सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहीं। पढ़ें पूरी खबर…