टीम के साथ मारपीट करते आरोपी वीडियो में कैद।
लुधियाना में वक्फ बोर्ड की जमीन का कब्जा लेने पहुंची टीम पर हमला किया गया। आरोपियों ने टीम के सदस्यों को लात-घूंसे मारे, जिसमें एक रेंट कलेक्टर घायल हो गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है।
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जिसमें साफ देख जा सकता है की लोगा पुलिस के सामने कर्मचारियों के साथ मारपीट करते हैं। इस दौरान एक कर्मचारी धक्का लगने से जमीन पर गिर जाता है, फिर जब वह उठता है, तो लोग उसे पकड़ कर पीटते हैं और उसके कपड़े फाड़ देते हैं।
इस मामले में पंजाब के शाही इमाम उस्मान लुधियानवीं ने कहा कि वक्फ बोर्ड के अधिकारियों पर हमला सहन नहीं किया जाएगा। सरकार से कहना चाहते हैं कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। वक्फ संपत्तियां मुस्लमानों के धर्म की संपत्तियां है। वक्फ बोर्ड उसका कस्टोडियन है।
थाना हैबोवाल पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और हमला करने के आरोप में पांच नामजद समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पंजाब वक्फ बोर्ड (लुधियाना) की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई थी।

टीम के सदस्य को लात मारते आरोपी।
एस्टेट ऑफिसर ने पुलिस को ये बातें बताईं…
- पुलिस के साथ बोर्ड की टीम कब्जा लेने पहुंची: पंजाब वक्फ बोर्ड एस्टेट ऑफिसर परमजीत ने पुलिस को दी शिकायत में कहा- 24 जुलाई को जारी वारंट ऑफ पजेशन के तहत 29 जुलाई को पुलिस के साथ बोर्ड की टीम कब्जा लेने के लिए गांव जस्सियां पहुंची थी। टीम में पंजाब वक्फ बोर्ड के हलका कानूनगो जसवीर सिंह समेत अन्य कर्मचारी शामिल थे।
- वक्फ बोर्ड की जमीन का कब्जा लेने का विरोध: परमजीत सिंह ने कहा कि जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और वक्फ बोर्ड की जमीन का कब्जा लेने का विरोध करने लगे। आरोप है कि विरोध कर रहे लोगों ने गुस्से में आकर बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला कर दिया।
- जान से मारने की नीयत से की मारपीट: परमजीत सिंह ने कहा कि हमलावरों ने जान से मारने की नीयत से कर्मचारियों के साथ मारपीट की, जिसमें वक्फ बोर्ड के रेंट कलेक्टर मोहम्मद अदनान को गंभीर चोटें आईं। स्थिति बिगड़ने के बाद बोर्ड की टीम किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से बाहर निकली।
वक्फ बोर्ड के वकील ने बातें बताईं…
- लीज पर ली थी जमीन, अब किराया देना बंद किया: वक्फ बोर्ड के वकील निसार ने बताया कि हमला करने वाले सभी लोग उसी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि गांव के गुरप्रीत सिंह उर्फ गुरी के दादा ने यह जमीन पहले वक्फ बोर्ड से लीज पर ली थी। शुरुआत में उन्होंने नियमित रूप से किराया जमा कराया, लेकिन बाद में किराया देना बंद कर दिया। इसके बाद उनके पिता ने जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की, जिस पर वक्फ बोर्ड ने साल 2004 में कोर्ट में केस दायर कर दिया।
- 2014 में वक्फ बोर्ड के पक्ष में कोर्ट का फैसला: वकील निसार ने बताया कि साल 2014 में वक्फ बोर्ड के पक्ष में कोर्ट का फैसला आया। इसके बाद 2016 में लुधियाना से वारंट ऑफ पजेशन जारी हुए, लेकिन दूसरी तरफ से लगातार आपत्तियां (ऑब्जेक्शन) दाखिल की जाती रहीं। फिलहाल इस मामले की एग्जिक्यूशन पटियाला कोर्ट में चल रही है। विवादित जमीन 24 कनाल 17 मरले की है। 24 जुलाई को पटियाला कोर्ट ने दोबारा वारंट ऑफ पजेशन जारी किया था।
- कब्जा दिलाने तहसीलदार की ड्यूटी लगाई थी: उन्होंने बताया कि कब्जा दिलाने के दौरान मजिस्ट्रेट मौके पर मौजूद नहीं थे। उनकी जगह तहसीलदार की ड्यूटी लगाई गई थी। तहसीलदार ने फील्ड कानूनगो को टीम के साथ भेजा था। मौके पर करीब तीन से चार पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।
- रेंट कलेक्टर को सबसे ज्यादा चोटें लगीं: वकील निसार के अनुसार, मारपीट में वक्फ बोर्ड के रेंट कलेक्टर मोहम्मद अदनान को सबसे ज्यादा चोटें आई हैं। उनका मेडिकल कराया जा चुका है, लेकिन उनके शरीर में अभी भी दर्द है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों ने मिलकर टीम के साथ मारपीट की। हालांकि, इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ किसी तरह की धक्का-मुक्की नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर वक्फ बोर्ड के पास कोर्ट की डिग्री मौजूद है और उसी के आधार पर कब्जा लेने की कार्रवाई की जा रही थी।
मामले की जांच कर रही पुलिस
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मनप्रीत सिंह, हरजीत सिंह चीमा, नरेंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह उर्फ गुरी, पवन मान उर्फ बबला समेत अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। थाना हैबोवाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 115(2), 126 और 351 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
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