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तिरुवनंतपुरम3 मिनट पहले
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केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों को बालों की लंबाई के आधार पर बच्चों से भेदभाव नहीं करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि लड़के और किसी खास जेंडर की पहचान नहीं रखने वाले बच्चे अपनी पसंद के अनुसार बाल बढ़ा सकते हैं। स्कूल उन्हें इसके लिए सजा नहीं दे सकते।
आयोग ने यह आदेश 17 सितंबर को जारी किया। इसमें कहा गया कि बच्चे अपनी पसंद के कपड़े भी पहन सकते हैं।
आयोग के सदस्य पी. शाजेश भास्कर ने यह आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि बाल साफ और सही तरीके से रखे जाने चाहिए।
बाल आंखों या चेहरे पर नहीं आने चाहिए। लैब गतिविधियों, खेल प्रतियोगिताओं और प्रैक्टिकल कक्षाओं के दौरान बाल बांधने होंगे।
आयोग ने सुरक्षा के लिए हेयर बैंड या किसी अन्य तरीके से बालों को सुरक्षित रखने को कहा है। उसने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल या हेयर कलर से बचने की सलाह दी।
स्कूलों को कार्रवाई से रोका
आयोग ने कहा कि स्कूल प्रबंधन लड़कों या ट्रांसजेंडर बच्चों को बालों की लंबाई के कारण मानसिक रूप से परेशान नहीं कर सकते।
स्कूल उन्हें कक्षा से बाहर नहीं निकाल सकते। उनके साथ भेदभाव या कोई दूसरी दंडात्मक कार्रवाई भी नहीं की जा सकती।
आयोग ने कहा कि स्कूलों को बच्चों की बाहरी शक्ल-सूरत के बजाय उनकी पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए।
नई गाइडलाइन बनाने का निर्देश
आयोग ने कहा कि राज्य के शिक्षा विभाग या CBSE की ओर से इस मामले में कोई खास गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
आयोग ने उचित गाइडलाइन तुरंत तैयार करने का निर्देश दिया। गाइडलाइन बनाने वाली समिति में लड़कों और किसी खास जेंडर की पहचान नहीं रखने वाले बच्चों को शामिल करने को कहा गया है।
गाइडलाइन जारी करने से पहले इन बच्चों की बात भी सुनी जानी चाहिए। आयोग ने अपने निर्देशों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट 45 दिन में जमा करने को कहा है।
दो याचिकाओं पर आया आदेश
यह आदेश दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया। पहली याचिका कोझिकोड के रामनाट्टुकरा की रहने वाली इंदु मेनन ने दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि जेंडर-न्यूट्रल होने का दावा करने वाले स्कूल भी लड़कों और किसी खास जेंडर की पहचान नहीं रखने वाले बच्चों से भेदभाव करते हैं।
उन्होंने कहा था कि लंबे बाल रखने वाले लड़कों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है।
दूसरी याचिका कोट्टक्कल के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने दायर की थी। उन्होंने बताया कि 11वीं कक्षा का एक लड़का बार-बार कहने के बावजूद बाल कटवाने से इनकार कर रहा था।
प्रिंसिपल ने ऐसे मामलों में स्कूलों को किस तरह कार्रवाई करनी चाहिए, इस पर गाइडलाइन मांगी थी।
