India Monsoon Deficit | Bihar Rajasthan Rainfall Impact El Nino Update

कुछ ही क्षण पहलेलेखक: ​​​​​​​​​​​​​​अनिरुद्ध शर्मा

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देश में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 15% कम रही है। यह आंकड़ा 17 साल का सबसे कम है। इससे पहले, साल 2009 में बारिश 18.3% कमी दर्ज की गई थी।

इस साल बारिश में कमी का मुख्य कारण अलनीनो माना जा रहा है। 1 जून से 21 सितंबर तक 827.2 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। अभी सिर्फ 703.7 मिमी बारिश हुई है। यानी 123.5 मिमी की कमी है।

30 सितंबर तक पूरे सीजन के लिए सामान्य बारिश 868.6 मिमी होती है। सीजन खत्म होने में 9 दिन बचे हैं। लेकिन, अब इतनी बारिश की संभावना नहीं है कि 15% की कमी पूरी हो सके। क्योंकि, देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से से मानसून तेजी से जा रहा है।

राजस्थान से शुरू हुई मानसून की विदाई

19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हुई थी। सोमवार को पंजाब, आधे हरियाणा और राजस्थान के कुछ और हिस्सों से मानसून विदा हो गया। अगले 24-48 घंटे में इसके हरियाणा के बाकी हिस्से, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड से भी विदा होने की परिस्थितियां बनी हुई हैं।

हालांकि, बंगाल की खाड़ी में एक सिस्टम विकसित हुआ है, जो डीप डिप्रेशन में बदल रहा है। यह 24 से 36 घंटे में ओडिशा व आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इसकी वजह से देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी राज्यों में अगले तीन-चार दिन भारी बारिश होने की संभावना है।

क्या है अल नीनो और ये क्यों आता है

प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में जब समुद्री हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट का पानी असामान्य रूप से गर्म होने लगता है। समुद्र के पानी के गर्म होने को अल नीनो कहते हैं। यह वैश्विक हवाओं और बादलों के पैटर्न को बदलकर दुनियाभर के मौसम को तहस-नहस कर देता है।

जलाशयों में पिछले साल से 21% कम पानी

अगस्त तक खरीफ की बुवाई 1.7% कम थी। आईसीआरए के अनुसार, रकबा 2% घट सकता है। कम बारिश, ज्यादा तापमान और अल नीनो से मिट्टी की नमी घटी है। इससे उपज घटेगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चावल उत्पादन 1 करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यानी पिछले साल की तुलना में 6.5% कम।

रबी की बुवाई अक्टूबर से शुरू होगी। शुरुआती सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कमजोर है। उत्तर व दक्षिण भारत में जल भंडार में गिरावट को आईसीआरए ने रबी के लिए जोखिम बताया। गेहूं, चना जैसी फसलों पर दबाव बढ़ेगा।

178 प्रमुख जलाशयों में 131.17 अरब क्यूबिक मीटर पानी है। पिछले साल से 21% कम। इससे बिजली पर दो असर होंगे। पहला, बिजली आपूर्ति में हाइड्रो का योगदान घटने का जोखिम होगा। दूसरा, बिजली की मांग बढ़ेगी।

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राजस्थान से मानसून की विदाई की शुरुआत हो चुकी है। धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, एमपी, यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में कमजोर होते हुए पूरे देश से विदा होगा। पूरी खबर पढ़ें…

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