Harshita Tomar Wins Bronze at Asian Games 2026

“बेटी को ढाई साल की उम्र में पेट की समस्या थी। डॉक्टर ने कहा था कि बॉडी को कूलिंग देने के लिए उसे कुछ देर पानी में रखिए या स्विमिंग कराइए। मैं उसे नर्मदापुरम के विवेकानंद घाट ले गया। मां नर्मदा का नाम लेकर रोज पानी में नहलाने लगा, तब नहीं सोचा था कि

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यह कहना है इंटरनेशनल सेलिंग खिलाड़ी हर्षिता तोमर के पिता देवेंद्र सिंह तोमर का। जापान में चल रहे एशियन गेम्स-2026 में उनकी बेटी हर्षिता ने अपनी जोड़ीदार शीतल वर्मा के साथ 49er FX विमेंस स्किफ स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है।

हर्षिता का एशियन गेम्स में यह दूसरा कांस्य पदक है। इससे पहले 2018 के जकार्ता एशियाड में 16 साल की उम्र में उन्होंने कांस्य जीता था, यानी जिस पानी में पिता बेटी को बीमारी से राहत दिलाने के लिए उतारते थे, वही पानी आगे चलकर उसकी जिंदगी का खेल बन गया। नर्मदा के घाट से शुरू हुआ यह सफर स्विमिंग, फिर सेलिंग और अब दूसरी बार एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है।

गॉगल पहने हुई हर्षिता। साथ में हैं शीतल वर्मा।

गॉगल पहने हुई हर्षिता। साथ में हैं शीतल वर्मा।

ढाई साल की उम्र में शुरू हुआ पानी से रिश्ता

देवेंद्र बताते हैं कि हर्षिता की मां रानी सीआरपीएफ में सिपाही थीं। उनकी पोस्टिंग अलग-अलग राज्यों में होती रहती थी। इसलिए बचपन में बेटी की जिम्मेदारी काफी हद तक उनके ऊपर थी।

करीब ढाई साल की उम्र में हर्षिता को खाना ठीक से पच नहीं पाता था। पेट में समस्या रहती थी। डॉक्टर ने पानी में रखने या स्विमिंग कराने की सलाह दी। इसके बाद देवेंद्र बेटी को नर्मदापुरम के विवेकानंद घाट ले जाने लगे।

वे बेटी को रोज नर्मदा में नहलाते थे। कुछ समय बाद उसकी परेशानी ठीक हो गई, लेकिन पानी से हर्षिता का रिश्ता यहीं खत्म नहीं हुआ।

करीब तीन साल की उम्र में सेठानी घाट पर कोच उमाशंकर व्यास से उसने स्विमिंग की शुरुआती ट्रेनिंग ली। इसके बाद जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक मिलने लगे।

2018 की एक रिपोर्ट में भी हर्षिता के पिता के हवाले से बताया गया था कि डॉक्टर ने उन्हें बचपन में हर्षिता को पानी के पास रखने की सलाह दी थी और दो साल की उम्र तक वह नर्मदा के खुले पानी में तैरने लगी थीं।

जश्न मनाते स्थानीय नागरिक।

जश्न मनाते स्थानीय नागरिक।

नर्मदापुरम में सुविधाएं कम पड़ीं तो परिवार भोपाल आ गया

हर्षिता की प्रतिभा लगातार सामने आ रही थी, लेकिन नर्मदापुरम में वॉटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं सीमित थीं। बेटी को बेहतर प्रशिक्षण दिलाने के लिए परिवार वर्ष 2011 में भोपाल आकर बस गया।

यहीं हर्षिता ने वीर सावरकर स्विमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीता। पिता के मुताबिक 2006 से 2011 के बीच उसने 50 से ज्यादा छोटे-बड़े पदक जीते।

पिता के लिए अब यह सिर्फ बेटी का खेल नहीं रह गया था। परिवार ने उसकी ट्रेनिंग को ही प्राथमिकता बना लिया।

इंटरनेशनल सेलिंग के दौरान हर्षिता।

इंटरनेशनल सेलिंग के दौरान हर्षिता।

जिस खेल का नाम नहीं सुना, उसी में बना करियर

वर्ष 2012-13 में खेल विभाग की वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी का टैलेंट सर्च हुआ। हर्षिता ने ट्रायल दिया। उसका चयन हो गया। दिलचस्प यह था कि अकादमी में आने से पहले हर्षिता ने सेलिंग शब्द तक नहीं सुना था। उसे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।

भोपाल की बड़ी झील में कोच जीएल यादव ने उसे सेलिंग की ट्रेनिंग दी। स्विमिंग करने वाली बच्ची धीरे-धीरे नाव और पाल संभालना सीखने लगी। 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्षिता को एक टैलेंट सर्च के दौरान स्विमर के रूप में देखा गया था और बाद में कोचों ने उन्हें सेलिंग के लिए उपयुक्त माना।

2018 जकार्ता एशियन गेम्स में पहला कांस्य, नौसेना में मिली नौकरी

वर्ष 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में हर्षिता ने 16 साल की उम्र में लेजर 4.7 क्लास में कांस्य पदक जीता। उस समय वह भारत की सबसे कम उम्र में एशियन गेम्स पदक जीतने वाली सेलर्स में शामिल हुईं।

इस उपलब्धि के बाद हर्षिता को नौसेना में नौकरी मिली। इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका सफर जारी रहा। अब 24 साल की उम्र में हर्षिता ने शीतल वर्मा के साथ 49er FX विमेंस स्किफ में एशियन गेम्स का दूसरा कांस्य जीत लिया है।

हर्षिता की जीत के लिए पूजा-पाठ भी किया गया था।

हर्षिता की जीत के लिए पूजा-पाठ भी किया गया था।

चौथे स्थान पर थीं, चीन की जोड़ी बाहर हुई तो मिला मेडल

हर्षिता और शीतल की भारतीय जोड़ी ने प्रतियोगिता में शुरुआत में चौथा स्थान हासिल किया था। दोनों के 24 नेट और 28 कुल अंक रहे। चीन की जोड़ी तीसरे स्थान पर थी, लेकिन बाद में उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।

इसके बाद भारतीय जोड़ी तीसरे स्थान पर पहुंच गई और उसे कांस्य पदक मिला। जापान ने स्वर्ण और हांगकांग ने रजत पदक जीता, यानी भारतीय जोड़ी के लिए पदक का फैसला पानी पर रेस खत्म होने के बाद हुआ।

खेती ठेके पर दी, बेटियों के खेल में लगा रहे कमाई

देवेंद्र सिंह तोमर नर्मदापुरम के ग्राम रैलसपुर के रहने वाले हैं। उनके पास करीब 11 एकड़ खेती है। दोनों बेटियों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने खेती ठेके पर दे रखी है। खेती से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा बेटियों की ट्रेनिंग और तैयारी पर खर्च होता है। हर्षिता को खिलाड़ी बनाने के लिए परिवार पहले गांव से नर्मदापुरम आया। फिर 2011 में भोपाल आकर बस गया। पिता ने उसकी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं की जिम्मेदारी संभाली।

हर्षिता के पदक जीतने पर माता-पिता और शहरवासियों ने जश्न मनाया।

हर्षिता के पदक जीतने पर माता-पिता और शहरवासियों ने जश्न मनाया।

13 साल की छोटी बेटी गोल्फ खिलाड़ी, चंडीगढ़ में ली ट्रेनिंग

अब हर्षिता के बाद परिवार की नजर छोटी बेटी 13 वर्षीय दीपिका तोमर पर है। दीपिका जूनियर गोल्फ खिलाड़ी हैं। पिता के मुताबिक दीपिका ने शुभंकर शर्मा ट्रॉफी 5 बार और दिल्ली गोल्फ सोसायटी की 3 ट्रॉफियां जीती हैं। पिछले महीने उन्होंने चंडीगढ़ में ट्रेनिंग ली।

पिता सुबह 3:30 बजे उठकर प्रैक्टिस कराने ले जाते हैं

दीपिका की रोज की गोल्फ प्रैक्टिस की जिम्मेदारी भी पिता देवेंद्र संभालते हैं। आर्मी गोल्फ कोर्स से सुबह 6 बजे का समय मिला है। घर से करीब 15 किमी दूर होने के कारण उन्हें तड़के 3:30 बजे उठना पड़ता है।

इसके बाद बेटी की प्रैक्टिस, डाइट और ट्रेनिंग का पूरा शेड्यूल संभालते हैं। देवेंद्र बताते हैं कि अकेले इतना सब संभालना मुश्किल था, इसलिए रानी ने रिटायरमेंट ले लिया। अब दोनों बेटियों की ट्रेनिंग और डाइट के हिसाब से माता-पिता अपना शेड्यूल तय करते हैं।

सेलिंग यानी हवा के सहारे पाल वाली नाव की रेस

सेलिंग पानी पर होने वाला खेल है। इसमें पाल लगी नाव को हवा की दिशा और गति के मुताबिक नियंत्रित कर तय कोर्स पूरा करना होता है।

हर्षिता जिस 49er FX विमेंस स्किफ में खेलती हैं, उसमें दो खिलाड़ी एक नाव पर होती हैं। दोनों के बीच नाव को संतुलित रखने, पाल संभालने और दिशा तय करने की जिम्मेदारी बंटी होती है।

प्रतियोगिता में कई रेस होती हैं और प्रदर्शन के आधार पर अंक मिलते हैं। सामान्य तौर पर कम नेट अंक बेहतर परिणाम माना जाता है।

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