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- Delhi Police Assault Action Case; CJP Jantar Mantar Protest | Supreme Court
21 मिनट पहले
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18 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर छात्र प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने से इनकार किया। पुलिस ने कहा कि 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च गैरकानूनी था।
पुलिस के मुताबिक, उस दिन जंतर-मंतर के आसपास 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी मौजूद थे। करीब 3 किलोमीटर के इलाके में फैली इस भीड़ को संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे।
यह हलफनामा डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने दाखिल किया। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है और चार जुड़ी याचिकाओं में साझा जवाब के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाएगा।
पुलिस ने कहा- प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा
बिहार के बाद दिल्ली पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल के आरोपों को खारिज किया। पुलिस ने कहा कि भीड़ के कुछ हिस्सों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा।
हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस ने हालात संभालने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया। भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो गई थी, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई।
इसमें 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी या वर्दीधारी अधिकारी और करीब 200 आम लोग या प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने कहा कि अलग-अलग जगहों पर मौजूद प्रदर्शनकारियों की संख्या को देखते हुए अतिरिक्त बल इस्तेमाल का आरोप सही नहीं ठहरता।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में असामाजिक तत्व और पहले से आपराधिक मामलों वाले लोग भी शामिल हो गए थे। हलफनामे में कहा गया है कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए वहां जुटना गैरकानूनी सभा थी और संसद की ओर बढ़ने की कोशिश भी गैरकानूनी काम था।
फोटो और वीडियो को लेकर पुलिस का दावा
पुलिस ने कहा कि याचिकाओं में चुनिंदा फोटो, अधूरे वीडियो और अपुष्ट मीडिया व सोशल मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा किया गया है। इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इनमें पुलिस अधिकारियों की कानूनी कार्रवाई का पक्ष नहीं दिखता।
कील वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोप पर पुलिस ने कहा कि वीडियो में ऐसी लाठी से जुड़ी केवल एक घटना दिखती है। पुलिस के मुताबिक, वह लाठी पुलिस के हाथ में नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी के हाथ में थी।
हलफनामे में कहा गया है कि वह लाठी नहीं, बल्कि ऐसा डंडा था, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ था। पुलिस ने यह भी कहा कि लाठियां भीड़ नियंत्रित करने के लिए मान्य उपकरण हैं और अधिकारी प्रदर्शनकारियों के समूहों को रोकने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर बिना उकसावे के हमला करना शुरू किया था। हलफनामे में कहा गया है कि हिंसा नियंत्रित करने के लिए सभी कदम मान्य तरीकों के तहत उठाए गए।
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सफाई
सादे कपड़ों में लाठियां लिए पुलिसकर्मियों के वीडियो पर पुलिस ने कहा कि भीड़ नियंत्रित करने की कार्रवाई को संदर्भ से अलग दिखाया गया है। हलफनामे के मुताबिक, हालात की तत्काल जरूरत को देखते हुए स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के स्पॉटर्स को भीड़ के अंदर रणनीतिक तरीके से तैनात किया गया था।
पुलिस ने कहा कि यह तरीका गैरकानूनी या असामान्य नहीं है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे सार्वजनिक आयोजनों में भी ऐसी रणनीति अपनाई जाती है।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड की कई परतें तोड़कर हिंसा शुरू की, जिसके बाद बल का इस्तेमाल करना जरूरी हुआ। पुलिस ने आरोप लगाया कि वीडियो में प्रदर्शनकारियों के बड़े समूह अकेले पुलिसकर्मियों को भीड़ के जरिए पीटते दिखते हैं।
हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों का सुरक्षा सामान खींचा, उन्हें घसीटा और पत्थर वाली सड़कों पर धक्का दिया।
2873 लोगों पर आपराधिक मामले होने का दावा
पुलिस ने बताया कि करीब 2873 लोगों पर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, रेप और पॉक्सो समेत आपराधिक मामले दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर की ओर से बनाई गई एसआईटी इन मामलों की जांच करेगी।
हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस के बल इस्तेमाल की जांच कोर्ट की ओर से प्रस्तावित समिति कर सकती है। दिल्ली पुलिस ने समिति के साथ सहयोग करने की बात कही है।
फेसियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर पर पुलिस का जवाब
प्रदर्शन स्थल पर फेसियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर पुलिस ने इसे अनुपातिक पुलिसिंग कदम बताया। पुलिस के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति की प्रोफाइल अपने आप दर्ज नहीं करता।
पुलिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बिना भेदभाव निगरानी या निजी जानकारी जुटाने के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता, जब तक उस व्यक्ति का पहले का आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
पुलिस के मुताबिक, केवल फेसियल रिकग्निशन के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। यह पता करने के लिए फील्ड वेरिफिकेशन भी किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था या नहीं।
हलफनामे में कहा गया है कि सॉफ्टवेयर सिर्फ गंभीर अपराधों के पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान करता है। ट्रैफिक चालान जैसे छोटे मामलों वाले लोगों की पहचान इसके जरिए नहीं की जाती।
