भगवान राधावल्लभ लाल होली खेलते हुए
पुरुषोत्तम मास की शुरुआत के साथ ही ब्रज में उत्सवों का दौर शुरू हो गया है। यहां पग पग पर राधे राधे हो रही है। भक्त ब्रज 84 कोस के साथ साथ वृंदावन और गोवर्धन की परिक्रमा दे रहे हैं। अधिक मास की शुरुआत के साथ ही ब्रज के मंदिरों में उत्सवों का दौर शुरू
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चांदी की पिचकारी से खेली होली
अधिक मास के पहले दिन रविवार को भगवान श्री कृष्ण के बंशी अवतार हरिवंश चंद्र महाप्रभु द्वारा प्रगट भगवान राधावल्लभ लाल ने भक्तों के साथ होली खेली। मंदिर के पुजारियों ने चांदी की पिचकारी से केशर,इत्र और गुलाब जल से भक्तों पर छिड़काव किया। इस दौरान भक्तों पर रंग,अबीर,गुलाल की जगह फूलों की बरसात की गई।

भक्तों पर रंग,अबीर,गुलाल की जगह फूलों की बरसात की गई
हुरियारे स्वरूप में नजर आए भगवान राधावल्लभ लाल
राधावल्लभ मंदिर में रविवार को ऐसा लग रहा था जैसे ज्येष्ठ माह न होकर फाल्गुन का महीना चल रहा हो। भगवान राधावल्लभ लाल ने सफेद रंग से बनी पोशाक धारण की। भगवान राधावल्लभ लाल हुरियारे के स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रहे थे। भक्त भगवान का प्रसादी फूल और केशर युक्त रंग अपने ऊपर डलवा कर धन्य महसूस कर रहे थे।

भक्त भगवान का प्रसादी फूल और केशर युक्त रंग अपने ऊपर डलवा कर धन्य महसूस कर रहे थे
शाम को जलाए जाएंगे दिवाली
अधिक माह के पहले दिन सुबह भगवान राधावल्लभ लाल ने होली खेली वहीं शाम को मंदिर में दिवाली का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया शाम को मंदिर में दीपक जलाए जाएंगे इसके साथ ही भगवान के सामने चौसर बिछाई जाएगी। जहां भगवान के प्रतिनिधि के रूप में मंदिर के पुजारी शह और मात का खेल खेलेंगे।

भगवान राधावल्लभ लाल ने सफेद रंग से बनी पोशाक धारण की
द्वारिकाधीश मंदिर में शुरू हुए अधिक माह के उत्सव
मथुरा के प्रसिद्ध मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में अधिक मास के कार्यक्रम रविवार से प्रारंभ हो गए हैं। इसी के तहत रविवार को ग्वाल के दर्शन में ठाकुर जी चांदी के पलने में विराजमान हुए और अपने भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के प्रवक्ता राकेश तिवारी ने बताया कि अधिक मास को ‘अधिक मास’ क्यों कहा जाता है। उन्होंने बताया यहाँ सनातन परंपरा में समय की गणना सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के हिसाब से की जाती है। चंद्र वर्ष में 354 या 355 दिन होते हैं, जबकि सूर्य वर्ष में लगभग 365 दिन होते हैं। इस प्रकार हर वर्ष दोनों में लगभग 10,11 दिन का अंतर आता है। यह अंतर 3 वर्ष में बढ़कर पूरे एक महीने के बराबर हो जाता है, इसीलिए इसे ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) कहा जाता है।
चूँकि हमारे सनातन धर्म में सभी तिथियों और महीनों का अपना एक विशेष महत्व व नाम है—जैसे प्रतिपदा (पड़वा), द्वादशी, एकादशी, पूर्णिमा आदि—परंतु इस अतिरिक्त एक माह का कोई नाम नहीं था। तब यह पूरा महीना भगवान विष्णु के पास गया और भगवान ने इसे अपना ही नाम दे दिया। इसी कारण इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहते हैं।

रविवार को ग्वाल के दर्शन में ठाकुर जी चांदी के पलने में विराजमान हुए
इस मास की एक विशेषता यह भी है कि इसमें सूर्य की कोई संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, इसलिए इसे आम बोलचाल में ‘लौंद का महीना’ (मलमास) भी कहा जाता है। इस पवित्र महीने में लोगों को अधिक से अधिक दान-पुण्य, धर्म, पूजा-अर्चना और पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इस माह में किया गया थोड़ा सा भी धार्मिक कार्य अत्यधिक फलदायी माना जाता है। चूंकि यह अधिक मास है, इसलिए सभी को ठाकुर जी के प्रति अपनी भक्ति भाव से सेवा करनी चाहिए।
द्वारिकाधीश मंदिर में पूरे एक माह तक विशेष मनोरथ आयोजित किए जाएंगे। पूरे वर्ष में जो भी अलग-अलग मनोरथ उत्सव होते हैं, वे सभी इस एक महीने में किए जा सकते हैं। सोमवार को ठाकुर जी लकड़ी के पलने में विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे।