Ayodhya Sant Sammelan | RSS-VHP Effort To Resolve Ram Mandir Controversy

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी कांड ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संघ परिवार की चिंता बढ़ा दी है। मंदिर भाजपा के लिए अयोध्या की राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है। ऐसे में चढ़ावा चोरी के विवाद से संत समाज में उठे सवालों और नाराजगी का चुनावी

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संघ के पदाधिकारियों की अयोध्या में आवाजाही बढ़ी है। साधु-संतों से मुलाकात का सिलसिला भी तेज हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इन मुलाकातों का एक प्रमुख उद्देश्य संत समाज के बीच बने असंतोष को समझना और उसे कम करना है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की बैठक में करीब 500 संत मौजूद थे। (फाइल फोटो)

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की बैठक में करीब 500 संत मौजूद थे। (फाइल फोटो)

संतों को साधने पर फोकस

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद संतों का एक धड़ा राम मंदिर के पदाधिकारियों के खिलाफ मुखर हुआ है। संतों की बैठकें और सम्मेलन भी हो चुके हैं। इससे संघ परिवार के सामने सिर्फ मंदिर प्रबंधन का विवाद नहीं, बल्कि संत समाज को साथ बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हुई है।

यही वजह है कि अब संघ के पदाधिकारी सीधे संतों के स्थान पर जाकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं। पहले इस तरह का संपर्क मुख्य रूप से विचारधारा के समर्थक संत समाज तक सीमित रहता था।

अयोध्या के संत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण भी बैठक में मौजूद थे। (फाइल फोटो)

अयोध्या के संत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण भी बैठक में मौजूद थे। (फाइल फोटो)

RSS के बड़े पदाधिकारी भी अयोध्या पहुंचे

बीते दिनों RSS के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन अयोध्या पहुंचे। उनके साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार और अवध प्रांत प्रचारक कौशल किशोर भी थे। संघ पदाधिकारियों ने अयोध्या के कई साधु-संतों से उनके स्थान पर जाकर मुलाकात की।

इन मुलाकातों को अनौपचारिक बताया गया है। हालांकि, चुनाव से पहले चढ़ावा विवाद के बीच संघ पदाधिकारियों की बढ़ी सक्रियता को अहम माना जा रहा है।

VHP भी संतों के संपर्क में

राम मंदिर से सीधे जुड़े विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी अयोध्या आने पर संतों से मुलाकात कर रहे हैं। संगठन की ओर से प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ यानी प्रतिष्ठा द्वादशी पर संतों का बड़ा सम्मेलन करने की तैयारी है।

इस सम्मेलन के जरिए संत समाज के बीच राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाने और नाराजगी को संभालने की कोशिश की जाएगी।

प्रदेशभर में संतों को सक्रिय करने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या के संतों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भेजकर राम मंदिर से जुड़े विवाद पर अपना पक्ष रखने की रणनीति पर भी काम हो रहा है।

यानी संघ परिवार की कवायद अब सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं है। संतों के जरिए प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी राम मंदिर और चढ़ावा विवाद को लेकर अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने हाल में अयोध्या में संतों से मुलाकात की थी। (फाइल फोटो)

पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने हाल में अयोध्या में संतों से मुलाकात की थी। (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव के नतीजे भी बने चिंता की वजह

लोकसभा चुनाव में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र वाले फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की हार के बाद से ही संघ परिवार अयोध्या के राजनीतिक माहौल को लेकर सक्रिय रहा है। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के कुछ ही महीने बाद आए लोकसभा चुनाव के नतीजे ने संगठन के लिए अयोध्या को और महत्वपूर्ण बना दिया।

अब चढ़ावा चोरी का विवाद सामने आने के बाद संतों की नाराजगी और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों को चुनाव से पहले संभालना नई चुनौती बन गया है।

पिछले विधानसभा चुनाव में भी संतों की नाराजगी बनी थी मुद्दा

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी अयोध्या के साधु-संतों की नाराजगी को संभालने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मतदान से ठीक पहले अयोध्या में डेरा डालना पड़ा था। इस बार चढ़ावा चोरी विवाद के कारण संतों के एक धड़े की नाराजगी फिर चर्चा में है।

अयोध्या में एक महीने पहले सीएम योगी ने संतों से आशीर्वाद लिया था।

अयोध्या में एक महीने पहले सीएम योगी ने संतों से आशीर्वाद लिया था।

विहिप को बैठक का स्थान भी बदलना पड़ा था

चढ़ावा चोरी विवाद का असर विहिप की गतिविधियों पर भी पड़ा। अयोध्या में होने वाली एक बैठक का स्थान बदले जाने की बात सामने आई थी। स्थानीय संतों की पहले हुई कथित अनदेखी भी इस विवाद के बीच एक मुद्दा बनी।

इस मामले में चर्चा में रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय अयोध्या में ही हैं। जब तक चढ़ावा चोरी प्रकरण की अदालती प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इससे जुड़े सवालों के बने रहने की संभावना है।

चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल की कवायद

राम मंदिर भाजपा की अयोध्या राजनीति का प्रमुख आधार रहा है। ऐसे में मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी विवाद से पैदा हुई नाराजगी का असर चुनावी माहौल पर न पड़े, इसके लिए संघ परिवार की सक्रियता बढ़ गई है।

संतों से संवाद, बड़े सम्मेलन की तैयारी और प्रदेशभर में संतों को सक्रिय करने की रणनीति—इन सबको चुनाव से पहले अयोध्या में बने राजनीतिक डैमेज को कंट्रोल करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

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