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केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर में बुधवार को ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाया गया। इस अवसर पर पौधरोपण कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों ने पौधे लगाए। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना था। परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिससे हरित वातावरण को बढ़ावा मिल सके। पूरे आयोजन में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जोर दिया गया। पृथ्वी हमारी पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है इस अवसर पर परिसर के निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा ने अपने संबोधन में कहा कि पृथ्वी केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताया। प्रो. झा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की अपील प्रो. झा ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने, जल और ऊर्जा बचाने तथा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझने और समाज में जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस कार्यक्रम में प्रो. मदन मोहन पाठक, प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रो. भारत भूषण त्रिपाठी, प्रो. धनीन्द्र कुमार झा, प्रो. अवनीश अग्रवाल, प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी और डॉ. राम बहादुर दूबे सहित कई शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने पृथ्वी की रक्षा को एक निरंतर कर्तव्य के रूप में निभाने का संकल्प लिया।
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केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में पृथ्वी दिवस पर पौधरोपण:शिक्षकों, छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया