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शाहजहांपुर के स्वास्थ्य विभाग में पूर्व कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम में लगभग 30 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपए पूर्व कर्मचारियों के खातों में भेजकर बंदरबांट किया गया। जिलाधिकारी (डीएम) के आदेश पर हुई जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग के एक बाबू सहित 13 पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दरअसल, जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह को शिकायत मिली थी कि स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल क्लेम के नाम पर पूर्व कर्मचारियों के खातों में लाखों रुपये भेजे गए हैं। डीएम ने एक टीम गठित कर जांच कराई, जिसमें लगभग 30 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ। बताया गया कि सीएमओ कार्यालय के एक बाबू ने पूर्व कर्मचारियों के साथ मिलकर मेडिकल क्लेम के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। 30 लाख रुपए का बंदरबाट किया
इसके बाद लगभग 30 लाख रुपये पूर्व कर्मचारियों के खातों में भेजे गए, जिनका बाद में बंदरबांट कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि सीएमओ कार्यालय के बाबू साजिद ने भी इलाज के नाम पर लगभग 2 लाख रुपये का क्लेम कर पैसा हासिल किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन अस्पतालों से इलाज कराना दिखाया गया था, वे अस्पताल अस्तित्व में ही नहीं थे। कई अस्पतालों में पूर्व कर्मचारियों ने खुद को भर्ती दिखाया था, जबकि उन अस्पतालों में केवल ओपीडी की सुविधा उपलब्ध थी। 13 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
जांच पूरी होने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर सीएमओ कार्यालय के बाबू साजिद और 13 पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, एक अन्य मामले में भी जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्हें फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनाए जाने की सूचना मिली थी। जांच में 14 ऐसे लोग पाए गए, जिन्होंने मेडिकल बोर्ड के सामने पेश हुए बिना ही प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। सामान्य प्रक्रिया में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के बाद ही पोर्टल से विकलांग प्रमाण पत्र जारी होता है। वहां आपरेटर समेत अन्य कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर इन लोगों ने अपने सर्टीफिकेट जारी कराए थे। इस प्रकरण में भी एक एफआईआर दर्ज की गई है।
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स्वास्थ्य विभाग में 30 लाख का मेडिकल क्लेम घोटाला उजागर:जिन अस्पतालों में इलाज दिखाया, वह है ही नहीं; बाबू समते 13 पर FIR दर्ज