Rahul Gandhi Controversy | BJP Alleges Assault On Woman Journalist Video

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2 मिनट पहले

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BJP ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन कवर कर रही महिला पत्रकार से धक्का-मुक्की की। इतना ही नहीं अपनी पार्टी के कार्यकर्ता को भी कोहनी मारी और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार को भी धक्का दिया।

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि राहुल गांधी ने पत्रकार को कोहनी मारी और कंधे से पकड़कर खींचा। इससे वह जमीन पर गिर गईं और घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती है।

BJP दिल्ली के उपाध्यक्ष राजेश भाटिया ने कहा कि पत्रकार की बहन ने उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद वे BJP विधायक उमंग बजाज और स्थानीय नेता प्रतीक शर्मा के साथ अस्पताल पहुंचे।

BJP प्रवक्ता का आरोप

प्रदीप भंडारी ने पत्रकारों से कहा, “आप सभी ने वीडियो देखा है। राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार को कोहनी से धक्का दिया और पकड़कर गिरा दिया।”

उन्होंने दावा किया कि पत्रकार की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भंडारी ने कहा कि BJP नेता पत्रकार से मिलने अस्पताल गए थे।

भंडारी के अनुसार, पत्रकार ने बताया कि राहुल गांधी ने उन्हें कंधे से पकड़ा, खींचा और जमीन पर गिरा दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकार राहुल गांधी से सवाल भी नहीं पूछ रही थीं। वह सिर्फ विरोध प्रदर्शन कवर कर रही थीं।

भंडारी ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस का कोई कार्यकर्ता पत्रकार की मदद के लिए आगे नहीं आया। इसके बजाय, कुछ लोगों ने पत्रकार पर ही सवाल उठाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ‘पितृसत्ता खत्म करने’ की बात करते हैं, लेकिन आज गुंडे जैसा व्यवहार किया। आपने देखा होगा कि उन्होंने अपने ही मुख्यमंत्री DK शिवकुमार को पीछे की ओर धकेला।”

भंडारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने ही कार्यकर्ताओं को कोहनी मारते हैं। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकार से कथित धक्का-मुक्की से पता चलता है कि राहुल गांधी के मन में देश के लोकतंत्र और महिलाओं के लिए नफरत भरी है।

कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर सवाल

भंडारी ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा इस मामले पर चुप रहे। भंडारी ने आरोप लगाया कि JNU के एक प्रोफेसर ने 11 लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया, फिर भी दोनों नेताओं ने कुछ नहीं कहा।

उन्होंने कहा, “राहुल और प्रियंका उस मामले पर चुप रहते हैं। वहीं, वे एक महिला पत्रकार को हाथ और कोहनी से पकड़कर जमीन पर गिरा देते हैं, जबकि वह बिना सवाल पूछे सिर्फ विरोध प्रदर्शन कवर कर रही थी।”

भंडारी ने प्रियंका गांधी वाड्रा के नारे “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” का भी जिक्र किया। उन्होंने महिलाओं से कथित घटना पर ध्यान देने की अपील की।

उन्होंने कहा, “आज देश की महिलाओं को कांग्रेस पार्टी का असली चेहरा देखना चाहिए। उन्हें प्रियंका वाड्रा के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे की सच्चाई भी देखनी चाहिए।”

भंडारी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि महिला पत्रकार जल्द ठीक होकर दोबारा रिपोर्टिंग पर लौटेंगी।”

बहन की सूचना पर अस्पताल पहुंचे BJP नेता

राजेश भाटिया ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी पत्रकार की बहन से मिली थी। इसके बाद वे उनकी मदद के लिए अस्पताल पहुंचे।

भाटिया ने बताया, “रात करीब 8 या 8:30 बजे राजेंद्र नगर में कार्यालय के पास एक युवती मेरे पास आई। उसने बताया कि उसकी बहन पत्रकार है और राहुल गांधी ने उसे धक्का दिया है।”

उन्होंने कहा कि पत्रकार गर्भवती थीं, उन्हें चोट लगी थी और उन्हें इलाज की जरूरत थी। पत्रकार की बहन ने BJP नेताओं से मदद मांगी थी।

भाटिया के अनुसार, उन्होंने तुरंत BJP विधायक उमंग बजाज और स्थानीय नेता प्रतीक शर्मा से संपर्क किया। इसके बाद दोनों नेता अस्पताल पहुंचे। पत्रकार अपने पति के साथ अस्पताल पहुंची थीं।

विधायक बोले- पत्रकारों के सवालों का जवाब देना चाहिए

BJP विधायक उमंग बजाज ने कथित घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय विधायक होने के नाते वे तुरंत अस्पताल पहुंचे।

बजाज ने बताया कि उनके साथ प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने कहा कि पत्रकार का हालचाल लिया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बजाज ने राहुल गांधी के व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का काम पत्रकारों के सवालों का जवाब देना है, न कि कथित तौर पर उनसे धक्का-मुक्की करना और उन्हें जमीन पर गिरा देना।

उन्होंने कहा, “मैं देश के युवाओं को भी संदेश देना चाहता हूं। वे नेताओं को उनके बयानों से नहीं, बल्कि उनके काम से परखें।”

बजाज ने आगे कहा, “आज राहुल गांधी के कामों ने महिलाओं के सम्मान को लेकर उनके अपने बयानों को गलत साबित किया है। युवाओं को समझना चाहिए कि सिर्फ शब्दों का कोई मतलब नहीं होता। असली मायने काम के होते हैं।”

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