सरकारी वादे के बावजूद चाइनीज मांझे पर कानून नहीं:पुलिस बेबस, मर्डर की धारा नहीं लगा सकती; फिर कैसे बचेंगी जानें


10 अक्टूबर 2026, गोरखपुर में 35 साल के रमेश कनौजिया की चाइनीज मांझे से गला कटने से मौत हो गई। अगले दिन वाराणसी में सुनील गुजराती की भी इसी तरह जान चली गई। दोनों मामलों में अज्ञात के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ। अब 8 महीने पहले चलते हैं… फरवरी 2026, गले में चाइनीज मांझा फंसने से 33 साल के मोहम्मद शोएब की लखनऊ में मौत हो गई। 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि लखनऊ में ही पूर्व सैनिक बृजेश राय के चेहरे पर मांझे से 10 इंच लंबा घाव हो गया। 30 टांके लगे। गनीमत रही कि जान बच गई। इन हादसों के बाद सीएम योगी अफसरों पर भड़क गए। पूछा कि बैन के बाद भी चाइनीज मांझा कैसे बिक रहा है? निर्देश दिए कि चाइनीज मांझे से मौत होने को हत्या माना जाएगा। इसके बाद भी चाइनीज मांझे से आए दिन लोग मर रहे हैं। यूपी सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट में चाइनीज मांझे पर अलग से कानून बनाने का वादा कर चुकी है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। अब सवाल है, आखिर चाइनीज मांझे की बिक्री क्यों नहीं रुक रही? ऐसे मामलों में हत्या का केस क्यों नहीं दर्ज हो रहा? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: चाइनीज मांझा जानलेवा क्यों है? जवाब: असल में चाइनीज मांझा, सिंथेटिक मांझा होता है। इसके नाम की वजह से लोगों में भ्रम है कि यह चीन से बनकर आता है। जबकि, इसे भारत में ही ‘मोनोफिलामेंट नायलॉन’ से बनाया जाता है। ये वही मैटेरियल है, जिससे मछली पकड़ने का जाल बनाया जाता है। सवाल 2: पुलिस से बचाकर चाइनीज मांझा कैसे बेचा जाता है? जवाब: पुलिस से बचने के लिए चाइनीज मांझा पतंग की दुकानों की जगह किराना (परचून), चूड़ी या कबाड़ के गोदामों में छिपाया जाता है। थोक दुकानदार केवल भरोसेमंद या जान-पहचान वाले ग्राहकों को ही इसे बेचते हैं। सवाल 3: दुकानदार क्यों बेच रहे और पतंग उड़ाने वाले क्यों खरीद रहे? जवाब: चाइनीज मांझा बनाने की लागत नॉर्मल मांझे से बहुत कम होती है। लेकिन, बैन होने की वजह से यह महंगे दामों पर बिकता है। भारी मुनाफे के लालच में लोग रिस्क लेते हैं। कूरियर और बड़े ट्रांसपोर्ट पार्सलों के जरिए इसे गुपचुप तरीके से एक राज्य से दूसरे राज्य सप्लाई कर दिया जाता है। लखनऊ, बरेली, मेरठ जैसे तमाम शहरों में शर्त लगाकर पतंगें उड़ाने का खेल होता है। यह कॉम्पिटीशन खुले तौर पर बड़े मैदानों में होने की बजाय मोहल्लों में घर की छतों से ही होता है। पतंगबाज जीतने के लिए ‘चाइनीज मांझे’ का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पतंग आसानी से न कटे। सवाल 4: मांझे से मौत में गैर-इरादतन हत्या की FIR क्यों लिखी जा रही? जवाब: ऐसा करने के पीछे कई कानूनी पहलू हैं… सवाल 5: सरकार ऐसा क्या करे कि ‘हत्या’ मानकर मुकदमा चलाया जा सके? जवाब: इसके लिए अलग से कानून बनाना होगा। जुलाई, 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने यूपी सरकार ने चाइनीज मांझे को लेकर अलग से कानून बनाने की बात कही है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। चूंकि बिना खास इरादे के हत्या साबित करना मुश्किल होता है। इसलिए कानून में इस तरह का प्रावधान करना चाहिए… सवाल 6: यूपी में अब तक कितने मामलों में दोषियों को सजा मिली है? जवाब: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवंबर, 2015 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस पर बैन लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद यूपी सरकार ने 2016 में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। सवाल 7: सड़क पर आम आदमी खुद को कैसे बचाए, क्या सावधानी रखे? जवाब: चाइनीज मांझा इतना महीन और पारदर्शी होता है कि बाइक चलाते समय दिखाई नहीं देता। सड़क पर चलने वाले आम लोगों, विशेषकर दुपहिया वाहनसवारों को ये सावधानियां बरतनी चाहिए… ————————————— ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… आग का गोला क्यों बन जाती हैं स्लीपर बसें, पश्चिम के देशों में बैन; भारत में लगातार हादसे, फिर भी प्रतिबंध क्यों नहीं 23 सितंबर की रात 9:30 बजे एक लग्जरी स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा (यूपी) के लिए निकली। रात 11:30 बजे यमुना एक्सप्रेस-वे पर इसमें आग लग गई। 9 यात्री जल गए। इंग्लैंड, जर्मनी, चीन समेत कई देशों में ये बसें बैन हैं, लेकिन भारत में नहीं। सवाल यह है कि लगातार हादसों के बाद भी स्लीपर बसें भारत में प्रतिबंधित क्यों नहीं हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…

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