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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ बहाली और निलंबित छात्र यासिर फहद की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन 19वें दिन शुक्रवार तड़के तक भी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सका। धरना खत्म कराने के लिए कुलपति स्तर से शुरू हुई पहल गुरुवार देर रात तक चली, लेकिन प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान के इस्तीफे की मांग पर मामला अटक गया। कुलपति आवास पर दूसरे प्रतिनिधिमंडल के साथ रात 3 बजे तक चली वार्ता भी बेनतीजा रही। इसके बाद छात्रों ने धरना जारी रखने का ऐलान कर दिया। अब शुक्रवार को आंदोलन और उग्र होने के संकेत हैं।
आंदोलन खत्म होने की उम्मीद उस समय जगी, जब बुधवार से कुलपति की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ वार्ता शुरू हुई। शुरुआती दौर में संकेत मिले कि छात्रसंघ बहाली और यासिर फहद का निलंबन वापस होने पर सहमति बन सकती है। लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो छात्रों ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और प्रॉक्टर को पद से हटाने की मांग भी सामने रख दी। यहीं से वार्ता का रुख बदल गया।
खुद यासिर ने जारी किए थे 12 छात्रों के नाम देर रात दूसरे दौर की वार्ता के लिए 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कुलपति आवास पहुंचा। इसमें कौन-कौन शामिल होगा, यह नाम खुद भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद ने तय किए थे। रात करीब एक बजे प्रतिनिधिमंडल के मिलने जाने से पहले यासिर ने सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो बाइट के साथ पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी दी और खुद वार्ता में शामिल नहीं हो पाने की वजह बताई। खराब तबीयत के चलते यासिर प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं जा सके। 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल रात 3 बजे तक डटा रहा
देर रात दूसरे दौर की वार्ता के लिए 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कुलपति आवास पहुंचा। कुलपति के सामने हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर की मौजूदगी भी रही। छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वार्ता के दौरान कुलपति ने छात्रसंघ बहाली के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त करने और चुनाव कराने की घोषणा करने पर सहमति के संकेत दिए। यासिर फहद का निलंबन वापस लेने पर भी सकारात्मक रुख सामने आने की बात कही गई। मगर छात्र प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। कुलपति की ओर से इस मांग पर सहमति नहीं बनने के कारण रात 3 बजे तक चली वार्ता किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी। प्रतिनिधिमंडल बाहर आया और छात्रों ने धरना स्थल पर लौटकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।
प्रॉक्टर के इस्तीफे पर फंसा पूरा मामला
आंदोलन अब सिर्फ छात्रसंघ बहाली और यासिर फहद के निलंबन वापसी तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी और प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी जोड़ दी है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव और निलंबन वापसी पर सहमति के संकेत मिलने के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हो सका। फिलहाल प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग ही वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन बनकर उभरी है। छात्रों के रुख से साफ है कि वे मांगों के एक हिस्से पर आश्वासन मिलने भर से धरना खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। शुक्रवार तड़के तीन बजे तक आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि धरना जिस तरह चल रहा था, उसी तरह जारी रहेगा।
यासिर फहद की बिगड़ती हालत, दो नए छात्रों के भूख हड़ताल पर बैठने की तैयारी
आंदोलन के 19वें दिन पहुंचने के साथ यासिर फहद की सेहत भी बड़ा मुद्दा बन गई है। वह लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आ रही है। इसी वजह से वह कुलपति से वार्ता करने गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हुए। छात्रों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि यासिर की मेडिकल रिपोर्ट में अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत सामने आती है, तो भूख हड़ताल जारी रखने के लिए दो अन्य छात्र तैयार हैं। यासिर की बिगड़ती सेहत के बीच आंदोलन को जारी रखने की यह तैयारी प्रशासन की चिंता बढ़ा सकती है। आधी रात के बाद वायरल हुए मैसेज, प्रॉक्टर पर मांगें पूरी न करने का आरोप
तीन बजे छात्रों के वीसी आवास से वापस आने के बाद सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल हो रहे हैं। वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि छात्रों की कोई मांग पूरी नहीं हुई है। प्रॉक्टर के सामने बैठकर बातचीत करने के बावजूद केवल उनके इस्तीफे को लेकर सफाई दी जा रही थी। मैसेज में आरोप लगाया गया है कि बातचीत में छात्रों की मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई और केवल बातें सुनकर छोड़ दिया गया। बाहरी समर्थन से आंदोलन को मिल रहा विस्तार
शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित दिख रहा यह आंदोलन अब बाहरी समर्थन भी जुटा रहा है। एएमयू के पूर्व छात्र यानी अलीग्स और कॉकरोच जनता पार्टी सहित अन्य नीतिक दलों से जुड़े लोगों की सक्रियता बढ़ने से धरने का दायरा विस्तृत हुआ है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ छात्रों को वार्ता की मेज पर लाने की नहीं, बल्कि सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनाने की भी है।
साइन-डाई की आशंका के बीच सर सैयद डे की तैयारी
विश्वविद्यालय में 17 अक्टूबर को होने वाला सर सैयद डे सालाना आयोजन है। ऐसे में आंदोलन का लंबा खिंचना प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है। यदि गतिरोध नहीं टूटा तो परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने और विश्वविद्यालय में अनिश्चितकालीन बंदी यानी साइन-डाई जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ऐसी किसी घोषणा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल एक तरफ प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने के लिए वार्ता के रास्ते तलाश रहा है, तो दूसरी तरफ छात्र प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग छोड़े बिना धरना जारी रखने पर अड़े हैं। रात 3 बजे वार्ता खत्म होने के बाद छात्रों के रुख ने साफ कर दिया है कि शुक्रवार को आंदोलन खत्म होने के बजाय और तेज हो सकता है। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी, गाना-बजाना और नाटक से प्रदर्शन
शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित दिख रहा यह आंदोलन अब कैंपस के दूसरे हिस्सों तक फैल रहा है। अब्दुल्ला कॉलेज की छात्राओं के साथ अन्य छात्र-छात्राएं और हॉस्टलों से जुड़े विद्यार्थी भी लगातार आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी से धरना स्थलों पर आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। डक प्वाइंट और अब्दुल्ला कॉलेज के गेट पर चल रहे धरनों के बीच रात में भी लगातार संपर्क बना रहता है। दोनों स्थानों के छात्र एक-दूसरे से संपर्क में रहकर गतिविधियों का तालमेल बनाते हैं। इसी संवाद के साथ आंदोलन की गतिविधियों को गति मिल रही है। प्रदर्शन के तरीके भी बदल रहे हैं। धरना स्थलों पर नारेबाजी और भाषणों के साथ गाना-बजाना और नाटक जैसी गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए धरनों में दिखाई देने वाले रचनात्मक विरोध के तरीकों की तर्ज पर छात्र सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भी अपनी बात रख रहे हैं।
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AMU में गतिरोध, रात 3 बजे तक वार्ता बेनतीजा:छात्रसंघ बहाली-निलंबन वापसी पर सहमति के संकेत, प्रॉक्टर के इस्तीफे पर अटका मामला; शुक्रवार को आंदोलन और तेज करने की तैयारी