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बदायूं में सिपाही की सरेराह पिटाई का मामला कोतवाली पुलिस के संज्ञान में था। पुलिस मौके तक पहुंची, दो युवकों को पकड़ा और शांतिभंग में कार्रवाई कर दी। इसके बावजूद घटना को सामने लाने के बजाय करीब 24 घंटे तक दबाए रखा गया। वीडियो सामने आने पर मामला खुला तो कोतवाल घटना से ही इनकार करते रहे। अफसरों के संज्ञान में मामला देने की जिम्मेदारी तक नहीं निभाई गई थी। दरअसल, कोतवाली पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करने के बजाय दो युवकों पर शांतिभंग की कार्रवाई कर मामले को वहीं समेट दिया। जिस घटना के कारण पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, उसी को दबाकर रखना अब उसकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि मामला उसके संज्ञान में था, फिर भी उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस के पास कार्रवाई करने लायक जानकारी थी, लेकिन घटना सार्वजनिक करने लायक नहीं समझी गई। दो युवकों को पकड़कर कार्रवाई कर दी गई और मामला आगे बढ़ने से रोक दिया गया। बाद में जब घटना सामने आई तो कोतवाल का इनकार पुलिस के अपने ही कदम से मेल नहीं खाता। उल्टा वहां लोगों से वीडियो डिलीट कराकर साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी की गई। थाना पुलिस ने कार्रवाई की एसपी सिटी को भी जानकारी नहीं होना बताता है कि कोतवाली स्तर पर मामले को किस तरह संभाला गया। थाना पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन घटना की जानकारी ऊपर तक नहीं पहुंची। ऐसे में इसे महज सूचना के अभाव का मामला बताकर टाला नहीं जा सकता। घटना दबाने और दो युवकों पर कार्रवाई करने के बीच की यह पूरी तस्वीर कोतवाली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कुल मिलाकर पूरे मामले में लापरवाही सामने आई है। एसपी सिटी अभिषेक सिंह ने बताया कि मामले की जांच करवाई जाएगी कि किस स्तर पर सूचना रोकी गई।
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सिपाही की पिटाई पर पुलिस ने सिर्फ शांतिभंग की कार्रवाई:बदायूं में 24 घंटे तक दबाए रखा मामला, वीडियो पोस्ट होने पर खुलासा