- Hindi News
- Business
- RBI Repo Rate Hike Announcement | Sanjay Malhotra Interest Rates EMI Impact
9 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

अगर आप घर, गाड़ी या पर्सनल जरूरत के लिए लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आने वाले दिनों में बोझ बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर सकता है। अगर रेपो रेट बढ़ती है तो ऐसा 4 साल में पहली बार होगा।
RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा आज 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों की जानकारी देंगे।
हालांकि, सभी बैंक RBI के बताए मुताबिक ब्याज दरें एक जैसी नहीं रखते, वे अपनी लागत और बाजार को देखकर इसमें थोड़ा बदलाव कर सकते हैं।

अब 3 सवालों के जवाब से जानिए रेपो रेट से जुड़ी जरूरी बातें
सवाल 1: रेपो रेट क्या होता है?
जवाब: रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दर तय करते हैं। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC हर दो महीने में इसकी समीक्षा करती है।
सवाल 2: रेपो रेट बदलने से EMI पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। ऐसे में बैंक भी लोन महंगा कर देते हैं। वहीं, रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते होने और EMI कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका असर उन लोन पर ही पड़ता है, जिनकी ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी होती है।
सवाल 3: रेपो रेट और महंगाई का क्या संबंध है?
जवाब: जब महंगाई बढ़ती है, तो RBI अक्सर रेपो रेट बढ़ाता है या उसे कम नहीं करता। इससे बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। बैंक भी लोन पर ज्यादा ब्याज लेते हैं।
ऐसे में लोग कम कर्ज लेते हैं और खर्च भी कम करते हैं। इससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है। वहीं, जब महंगाई कम होती है, तो RBI रेपो रेट घटा देता है। इससे लोन सस्ते होते हैं और लोग ज्यादा खर्च व निवेश करते हैं।
2026 में 3 बार की बैठकों में ब्याज दर नहीं बदली
2026 में अब तक RBI की 3 बैठकें हो चुकी हैं। अप्रैल, जून और अगस्त में हुई तीनों बैठकों में रेपो रेट 5.25% पर ही रखा गया। यानी लगातार तीसरी बार ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ।

