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प्रयागराज में यौन शोषण और महिला हिंसा के खिलाफ मंगलवार को महिलाओं और छात्राओं ने फ्रीडम मार्च निकालकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। मार्च लल्ला चुंगी स्थित महिला छात्रावास गेट से शुरू होकर चंद्रशेखर आजाद प्रतिमा (कंपनी गार्डन) तक पहुंचा। छात्रा सोनाली ने कहा कि हाशिए पर रखी गई आधी आबादी आज अपने हक के लिए सड़कों पर उतरी है। उन्होंने मणिपुर से लेकर दिल्ली, बनारस, महाराष्ट्र और जयपुर तक देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि इलाहाबाद में भी यही प्रतिरोध दर्ज किया जा रहा है। यौन शोषण से आजादी के लिए और मर्दवाद के खिलाफ सड़कों को बार-बार भरा जाएगा। कीर्ति ने कहा कि यह केवल एक दिन का मार्च नहीं है, बल्कि यह रोज की लड़ाई है। उन्होंने छात्रावास की समय सीमा और कक्षाओं में घूरती नजरों का उदाहरण देते हुए कहा हमारी आजादी की एक सीमा तय की गई है, और हम उसी सीमा को तोड़ने निकले हैं। हम बेखौफ आजाद होकर रहेंगे। साक्षी का कहना है कि मणिपुर की बात करते समय सिर्फ एक राज्य की बात नहीं हो रही है, बल्कि देश के तमाम हिस्सों इलाहाबाद समेत पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर दिल्ली तक महिलाओं के शरीर को युद्ध की वस्तु के तौर पर देखा जाता है। इसी नजरिए के खिलाफ अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए आज हम सड़क पर हैं। यह मार्च देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर बढ़ रहे आक्रोश का हिस्सा है। हाल के दिनों में दिल्ली, मणिपुर और अन्य राज्यों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बाद छात्र और नागरिक समाज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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प्रयागराज में यौन शोषण खिलाफ छात्राओं का फ्रीडम मार्च:बोलीं- एक दिन का मार्च नहीं रोज की लड़ाई,महिला शरीर युद्ध वस्तु नहीं