Pakistan Army & Police Use Fishing Nets To Counter Drone Attacks

इस्लामाबाद13 मिनट पहले

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस चेकपोस्ट की छत पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा हुआ है। - Dainik Bhaskar

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस चेकपोस्ट की छत पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा हुआ है।

पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं।

सुरक्षाकर्मियों का ऐसा मानना है कि हमलावर ड्रोन इन जालों में फंस सकते हैं। इससे ड्रोन हमले में होने वाला नुकसान 40 से 50% तक कम किया जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस तरीके को पूरी तरह भरोसेमंद मानने से इनकार किया है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में सुरक्षाकर्मी पुलिस चौकी के ऊपर जाल लगाते हुए।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में सुरक्षाकर्मी पुलिस चौकी के ऊपर जाल लगाते हुए।

आतंकी गोलीबारी से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे

पुलिस के मुताबिक, जाल लगाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि आतंकियों ने हमले का तरीका बदल दिया है। अब वे गोलीबारी और मोर्टार के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में 29 जुलाई को सबसे घातक हमलों में से एक हुआ था। बम से भरे ड्रोन से पुलिस चौकी पर हमला किया। इसमें 11 पुलिसकर्मी मारे गए। इसके बाद कई घंटे तक चली मुठभेड़ में 15 हमलावर भी मारे गए।

पुलिस के मुताबिक, इस साल खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं। इसी वजह से यह जिला प्रांत के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल है।

ऐसे हमलों से बचने के लिए हंगू पुलिस ने कम लागत वाला तरीका अपनाया। पुलिस चौकी की छत और चारदीवारी के बीच कई मीटर ऊपर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए। इससे चौकी के ऊपर एक तरह की जालीदार छत बन गई।

हंगू में पुलिस चेकपॉइंट पर सुरक्षा के लिए मछली पकड़ने वाला जाल लगाया गया है।

हंगू में पुलिस चेकपॉइंट पर सुरक्षा के लिए मछली पकड़ने वाला जाल लगाया गया है।

एक चेकपोस्ट पर करीब 1 लाख रुपए खर्च

हंगू के जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब के मुताबिक, एक सामान्य पुलिस चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 1.4 लाख रुपए खर्च होते हैं।

खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, हंगू के अलावा कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे कम से कम 5 और संवेदनशील जिलों में भी पुलिस चौकियों और चेकपोस्ट पर ये जाल लगाए गए हैं।

प्रांत के कुछ इलाकों में सेना के ठिकानों पर भी ‘एंटी-ड्रोन जाल’ लगाए गए हैं। पुलिस ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रांतीय सरकार से अतिरिक्त पैसे भी मांगे हैं।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में, एक पुलिस चौकी के चारों ओर जालीदार बैरियर लगाकर बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में, एक पुलिस चौकी के चारों ओर जालीदार बैरियर लगाकर बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों को इस तरीके पर भरोसा नहीं

इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने इसे नासमझी वाला सस्ता तरीका बताया।

उनके मुताबिक, आतंकियों का निशाना हमेशा पुलिस स्टेशन या चेकपोस्ट ही नहीं होते। ड्रोन का इस्तेमाल बड़े और जरूरी ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जाता है, ताकि हमले का असर ज्यादा दिखाई दे और लोगों में डर पैदा हो।

उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन के हवा में उठते ही उसे रोकने की क्षमता रखती हैं।

यूक्रेन में भी इस्तेमाल हुआ है ऐसा तरीका

पेशावर के आतंकवाद और सुरक्षा विशेषज्ञ फिदा अदील ने बताया कि मछली पकड़ने वाले जाल से ड्रोन रोकना कोई नया तरीका नहीं है।

सेना पहले से ही सामान और ठिकानों को छिपाने के लिए ऐसे जाल इस्तेमाल करती रही है। यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन को रोकने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है।

हालांकि, अदील के मुताबिक, विस्फोटक से भरे ड्रोन के खिलाफ जाल कितना काम करेगा, यह उसके डिजाइन और उसे लगाने के तरीके पर निर्भर करता है।

उन्होंने पुलिस के 40 से 50% नुकसान कम होने के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि असली हमले या सही परीक्षण के बिना इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हो सकती।

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