राज्यसभा में यूपी कोटे की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। भाजपा की प्रदेश इकाई ने 8 सीटों के लिए केंद्रीय नेतृत्व को 24 संभावित उम्मीदवारों के नाम भेज दिए हैं। इन चेहरों में जौनपुर से आने वाले कृपा शंकर सिंह की दावेदारी भी सामने आ रही है।
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महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा नेता कृपा शंकर सिंह 2024 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सीट से भाजपा के प्रत्याशी थे, हालांकि वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हार के बावजूद वह जौनपुर और आसपास के पूर्वांचल इलाके में लगातार सक्रिय हैं।
उत्तर भारतीय समाज, विशेषकर मुंबई और महाराष्ट्र में रहने वाले यूपी के लोगों के बीच उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। भाजपा उन्हें राज्यसभा भेजकर पूर्वांचल के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को संतुलित करने की रणनीति पर विचार कर सकती है।

ब्राह्मण वर्ग पर भाजपा का फोकस, 2 सीटों के लिए रेस में 7 बड़े नाम
पैनल के मुताबिक, राज्यसभा जाने वाली 8 सीटों में से 2 सीटों पर ब्राह्मण चेहरे को मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इसके पीछे पार्टी का उद्देश्य प्रबुद्ध वर्ग को साधकर राजनीतिक संदेश देना है।
ब्राह्मण कोटे से जिन प्रमुख चेहरों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए हैं, उनमें शामिल हैं-
- हरीश द्विवेदी: भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और संगठन के अनुभवी नेता।
- कवि कुमार विश्वास: प्रख्यात कवि और अपनी भाषण शैली से युवाओं व प्रबुद्ध वर्ग में लोकप्रिय।
- सुब्रत पाठक: कन्नौज के पूर्व सांसद और पार्टी का आक्रामक ब्राह्मण चेहरा।
- रमापति राम त्रिपाठी: देवरिया से पूर्व सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता।
- डॉ. दिनेश शर्मा: यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सदस्य।
- त्रयंबक त्रिपाठी व पूर्व अधिकारी ओम पाठक: प्रशासनिक व संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नाम।
इन दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर है और अंतिम फैसला दिल्ली में भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में होगा।

सपा को जवाब देने की तैयारी कर रहे जयंत चौधरी
भाजपा अपने एनडीए के सहयोगी रालोद को एक राज्यसभा सीट दे सकती है। हालांकि, रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर एक दिलचस्प स्थिति बनी हुई है। जयंत चौधरी वर्तमान में सपा के सहयोग से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जयंत पर तंज कसते हुए कहा था कि “जिन अठन्नी-चवन्नी को रुपया बनाया था, वो अब छोड़कर चले गए।”
रालोद और भाजपा के रणनीतिकारों को डर है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और सपा इस मुद्दे को फिर से भुना सकते हैं कि जयंत सपा के समर्थन की बदौलत ही राज्यसभा में बैठे हैं। जयंत के समर्थकों की मंशा है कि वे अपने मौजूदा कार्यकाल से इस्तीफा दें। भाजपा के सहयोग से नए सिरे से राज्यसभा चुनाव जीतकर जाएं, ताकि विपक्षी आरोपों की हवा निकाली जा सके।
इसके अलावा, जयंत की जगह उनकी पत्नी (चारू चौधरी) को राज्यसभा भेजने की भी चर्चाएं जोरों पर हैं, हालांकि पार्टी के किसी आधिकारिक सूत्र ने अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

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