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उत्तर प्रदेश विधान परिषद की गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार काफी रोचक होने जा रहा है। भाजपा से निराश होने के बाद 1 अक्टूबर को निर्दल प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल करने वाले डा. संजयन त्रिपाठी अब सपा में शामिल हो चुके हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम से वह, उनके लोग और सपा के कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास का संचार हुआ है। जीत दर्ज करने की रणनीति भी बन चुकी है। संजयन इस चुनाव में सपा के ‘साइकिल’ में खुद अर्जित सहानुभूति का ‘पैडल’ लगाएंगे और इससे चुनावी रेस जीतने की पुरजोर कोशिश करेंगे। मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी अपनी पहचान बताने वाले संजयन चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा से मिले तिरस्कार और सपा के उपकार की कहानी सुनाकर भी परिणाम बदलने की कवायद में जुटेंगे। सपा से टिकट मिलने के बाद डा. संजयन और उनके समर्थकों में उत्साह है। अपनी लग्जरी गाड़ी से सत्ताधारी भाजपा का झंडा उतारना डा. संजयन के लिए टर्निंग प्वाइंट बन गया। झंडा उतारने के बाद भाजपा से जुड़ाव की बातें करते हुए उनके भावुक हो जाने से उनके पक्ष में सहानुभूति पैदा होने लगी थी। भावुकता का यह वीडियो उनके फेसबुक पेज पर पोस्ट हुआ तो दो दिनों के भीतर 1 करोड़ से अधिक लोगों ने उसे देख लिया। यह रिस्पांस देखकर संजयन की पूरी टीम गदगद है। यही कारण है कि अपने पक्ष में पैदा हुई सहानुभूति और सपा के साथ की बदौलत संजयन त्रिपाठी खुद की जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और अधिक सक्रिय हो चुकी है। पिछले दो दिनों में कई बैठकें हो चुकी हैं। पार्टी हर हाल में यह चुनाव जीतने की कोशिश करेगी। विशेषज्ञ बताते हैं सपा के साथ जाने से सहानुभूति की लहर चलने पर संशय वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे बताते हैं कि संजयन के सपा में जाने से शिक्षक एमएलसी चुनाव का समीकरण अब बदल गया है। डा. संजयन का पुराना संबंध, शिक्षण संस्थानों के संचालकों से अच्छे संबंध और इस चुनाव को आधार मानकर की गई लंबी तैयारी के साथ अब उनके पास सपा का एक मजबूत संगठन भी है। पिछले कई चुनावों में मिली हार, कई बार टिकट कटने से उनके साथ सहानुभूति भी जुड़ी है। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में इस सहानुभूति को वोट में बदलना उनके लिए चुनौती होगी। सपा में जाने के बाद इस सहानुभूति पर असर पड़ सकता है। निर्दल चुनाव लड़ने पर बहुत से ऐसे लोग हैं जो उनके साथ रहते लेकिन साइकिल चुनाव निशान होने से कई ऐसे वोटर होंगे, जो सपा के साथ जाने में संकोच दिखा सकते हैं। क्या स्कूल एसोसिएशन खुलकर साथ रह पाएगा? डा. संजयन त्रिपाठी खुद भी स्कूल एवं कालेजों की श्रृंखला का संचालन करते हैं। इस चुनाव में इसे ही वह अपनी ताकत मान रहे हैं। सीबीएसई एवं सीआईएससीई स्कूलों के संचालकों ने उन्हें समर्थन देने की घोषणा की थी। लेकिन तब स्थिति दूसरी थी। भाजपा से टिकट न मिलने के चलते उनके प्रति सहानुभूति थी और निर्दल मैदान में आने से कई लोग उनके पीछे खड़े नजर रहे थे। लेकिन अब वह सपा की सदस्यता ले चुके हैं। ऐसे में कई ऐसे संचालक हैं, जो वैचारिक रूप से भाजपाई हैं और सपा प्रत्याशी के तौर पर संजयन के साथ सार्वजनिक रूप से चलने में संकोच करेंगे। स्कूल एसोसिएशन खुलकर संजयन के साथ रह पाएगा, इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जानिए 2020 के चुनाव में सपा की क्या स्थिति थी 2020 के शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा ने अवधेश कुमार यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था। उन्हें 2 हजार 667 वोट मिले थे। यानी सपा के अधिकतर वोट उन्हें मिले थे। यानी संजयन के खाते में ढाई हजार से अधिक वोटर सपा के साथ आने से जुड़ गए हैं। लेकिन संजयन और सपा के सामने राजीव यादव बड़ी चुनौती होंगे। राजीव पिछली बार तीसरे स्थान पर थे। उन्हें 4500 से अधिक वोट मिले थे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रांतीय महामंत्री राजीव के नामांकन जुलूस में उपस्थित भारी भीड़ ने उनकी तैयारी बयां कर दी है।
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सहानुभूति के 'पैडल' से 'साइकिल' दौड़ाएंगे संजयन:शिक्षक एमएलसी चुनाव में तिरस्कार और उपकार की कहानी सुनाकर परिणाम बदलने की तैयारी