शाहजहांपुर2 मिनट पहले
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शाहजहांपुर में दो साधुओं की हत्या कर शव जलाने के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह खुद मंदिर में रहना चाहता था, लेकिन दोनों साधुओं के मना करने के बावजूद मंदिर न छोड़ने पर उसने उनकी हत्या कर दी।
इस दौरान उसने लोहे की रॉड से दोनों पर हमला किया। फिर मंदिर में रखी लकड़ियों और दीपक जलाने के लिए रखे घी की मदद से शवों को आग लगा दी। वारदात के बाद वह डर के कारण मंदिर के पीछे लोहे की रॉड छिपाकर कठिना नदी के जंगल में जाकर छिप गया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल लोहे की रॉड बरामद कर ली है।
हालांकि, परिजनों ने आरोपी के पिता विष्णु पर भी हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी वारदात एक व्यक्ति अकेले नहीं कर सकता। परिजनों के आरोपों के बाद पुलिस आरोपी के पिता की घटना के समय की लोकेशन ट्रेस कर रही है। पुलिस ने परिवारों को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

रामकिशोर ने कहा- घटना के मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है।
परिवार बोला- आरोपी के पिता को बचा रही पुलिस
साधु गोपालदास (मृतक) के छोटे भाई रामकिशोर ने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है और सुमित के पिता विष्णु की भी इसमें भूमिका है। रामकिशोर ने कहा, “एक आदमी के बस की बात नहीं है कि इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे पाए। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि पुलिस क्या कर रही है। पुलिस मेरी तहरीर भी नहीं ले रही है। पुलिस इतने दावे से कैसे कह सकती है कि आरोपी का पिता इस घटना में शामिल नहीं है।”
वहीं, मृतक बिहारी दास के भतीजे प्रदीप सिंह ने भी कहा कि पुलिस सुमित को हत्यारोपी मान रही है, लेकिन परिवार को इस बात पर भरोसा नहीं है कि उसने अकेले ही दोनों की हत्या की है। उन्होंने बताया कि प्रभारी निरीक्षक ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सुमित जेल से छूटकर आता था तो कपड़े और सामान जेल में ही छोड़ देता था। कहता था कि उसे फिर से जेल जाना है।
जेल से छूटकर आता था तो कहता था- फिर जेल जाना है
बताया जा रहा है कि आरोपी सुमित का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ आठ मुकदमे दर्ज हैं। परिजनों के अनुसार, जब भी वह जेल से छूटकर आता था तो अपने कपड़े और सामान जेल में ही छोड़ देता था। वह कहता था कि उसे फिर से जेल जाना है।
दूसरी ओर, आरोपी के पिता विष्णु भी थाने के हिस्ट्रीशीटर रह चुके हैं। वह जिला बदर भी हो चुका है। उसके खिलाफ वर्ष 1999 में पहली और वर्ष 2024 में दूसरी बार गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा उसके खिलाफ मारपीट के छह मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। मृतकों के परिवारों की ओर से आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस उसके आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल कर रही है।

आरोपी के पास से बरामद हत्या में यूज रॉड।
मंदिर संरक्षक की तहरीर पर दर्ज हुई थी FIR
मृतक साधु गोपालदास शाहजहांपुर के कोतवाली क्षेत्र के अजीजगंज के रहने वाले थे, जबकि बाबा बिहारीदास खुदागंज थाना क्षेत्र के सूथा गांव के निवासी थे। दोनों की हत्या और शव जलाने की घटना के बाद मंदिर संरक्षक शिवकुमार सिंह की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी सुमित के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। दोनों शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
खुदागंज प्रभारी निरीक्षक राकेश मौर्य ने बताया कि मृतकों के परिजन थाने आए थे। उन्होंने कोई लिखित तहरीर नहीं दी, लेकिन आरोपी के पिता पर भी आरोप लगाए हैं। परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। आरोपी के पिता की घटना के समय की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। मामले की विवेचना जारी है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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शाहजहांपुर में 2 साधुओं की हत्याकर लाश जलाई:भतीजे ने शिव मंदिर में चिता बनाई; 2 घंटे जलते हुए देखता रहा

शाहजहांपुर में एक शिव मंदिर में 2 साधुओं की हत्या कर दी गई। इसके बाद मंदिर में ही चिता बनाकर दोनों शवों को जला दिया गया। गुरुवार सुबह 7 बजे मंदिर से धुआं उठता देखकर गांववाले पहुंचे। एक साधु का शव जल रहा था। दूसरा जलकर कंकाल बन चुका था।
दोनों शव एक-दूसरे से 10 मीटर दूर पड़े थे। घटना जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर खुदागंज की है। साधुओं की पहचान बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास के रूप में हुई है। दोनों खुदागंज के सूथा गांव स्थित मंदिर में रहते थे। पढ़ें पूरी खबर…
