![]()
लखनऊ में जैन धर्म के शाश्वत पर्व दशलक्षण महापर्व के समापन पर जन भवन स्थित गांधी सभागार में ‘क्षमावाणी पर्व एवं त्यागी-व्रती सम्मान मिच्छामि दुक्कडम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता कर त्यागी-व्रतीजनों को सम्मानित किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि क्षमा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है, जो मन के मैल को धोकर टूटे संबंधों को जोड़ती है। जैन दर्शन ने सिखाया है कि वास्तविक विजय किसी दूसरे पर नहीं, बल्कि स्वयं के क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह पर विजय पाने में है। राज्यपाल ने कहा- वास्तविक विजय स्वयं पर विजय है उन्होंने कहा कि त्यागी-व्रतीजन संयम, साधना और आत्मशुद्धि की सजीव प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने सुविधाओं का नहीं, साधना का मार्ग चुना है। जैन धर्म का अहिंसा, सत्य, संयम और अनेकांतवाद का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। ‘मिच्छामि दुक्कडम’ का भाव है – मन, वचन, काया से हुई भूल के लिए हृदय से क्षमा मांगना और भीतर से वैर की गांठ खोल देना। राज्यपाल ने जन भवन में चल रहे नवाचारों का भी जिक्र किया, जहां 422 वंचित बच्चों का आदर्श माध्यमिक विद्यालय, गौ-सेवा, स्वास्थ्य परीक्षण और 20 हजार पौधों का रोपण जैसे कार्य हो रहे हैं। मैत्री भाव से ही हिंसा और क्रोध समाप्त होता है आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने कहा कि विश्व के सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव होना चाहिए, यही जीवन का सच्चा आनंद है। कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि जैन धर्म ने मानवता को क्षमा और त्याग का महान संदेश दिया है। कार्यक्रम में आचार्य सुबल सागर महाराज की पावन सान्निध्य में सम्पन्न हो गया । इस अवसर पर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य और अयोध्या जैन तीर्थ के पीठाधीश स्वस्ति रविन्द्र कीर्ति स्वामी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष पवन कुमार जैन, महासचिव अभिषेक जैन, स्वागताध्यक्ष प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष संजीव जैन, संयुक्ता भाटिया, चैतन्य कौशिक सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए ।
Source link
लखनऊ में दशलक्षण महापर्व के समापन पर क्षमावाणी पर्व:जन भवन के गांधी सभागार में त्यागी-व्रती सम्मान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया सम्मानित