1 मिनट पहले
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आने वाले दिनों में ईवी सस्ती हो सकती है। केंद्र सरकार ने पैसेंजर गाड़ियों के लिए CAFE-3 नियमों की घोषणा कर दी है। ये नियम 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे।
नए नियमों के मुताबिक, किसी कार कंपनी के ओवरऑल एवरेज की गणना करते समय एक इलेक्ट्रिक कार को तीन कारों के बराबर गिना जाएगा। यह नियम सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के तहत आने वाली M1 कैटेगरी पैसेंजर गाड़ियों पर लागू होगा।
इन नियमों का मुख्य मकसद गाड़ियों का माइलेज बढ़ाना और प्रदूषण को कम करना है। ऐसे में ऑटो कंपनियों को पोर्टफोलियो में ज्यादा माइलेज देने वाली पेट्रोल-डीजल कारों के साथ-साथ EV और हाइब्रिड गाड़ियों की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी होगा।
ज्यादा से ज्यादा ईवी बेचने के लिए कंपनियां बजट और किफायती ईवी मॉडल्स लॉन्च करेंगी। बाजार में जब टाटा, महिंद्रा, हुंडई, मारुति और एमजी जैसी कंपनियों के बीच सस्ती ईवी बेचने की होड़ मचेगी, तो आक्रामक प्राइसिंग का सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा।
CAFE 2 के मुकाबले CAFE 3 में क्या बदल रहा है?
मौजूदा नियम (CAFE 2): मौजूदा CAFE 2 नियम अप्रैल 2022 से लागू हैं। सरकार यह नियम किसी एक कार पर नहीं, बल्कि कंपनी की बिकी सभी कारों के कुल औसत पर लागू करती है। गाड़ियां जितनी भारी होंगी, तेल की खपत उतनी ज्यादा होगी।
इसलिए सरकार ने माइलेज का लक्ष्य तय करने के लिए कारों का एक पैमाना यानी औसत वजन 1,082 किलो तय किया है। इस वजन को आधार बनाकर कंपनियों को लक्ष्य दिया गया है कि उनकी सभी कारों का औसत माइलेज 20.92 किमी/लीटर होना चाहिए। साथ ही, उनसे निकलने वाला प्रदूषण 113 ग्राम प्रति किमी से कम होना जरूरी है।
नए नियम (CAFE 3): 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले CAFE 3 नियम पहले से काफी सख्त होंगे। नए नियमों के तहत 2027 से 2032 के बीच कंपनियों के बेड़े का औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाकर 91.7 ग्राम प्रति किमी तक लाना होगा।
अभी यह सीमा 113 ग्राम प्रति किमी है, यानी प्रदूषण में लगभग 19% की कटौती करनी होगी। इसके साथ ही गाड़ियों का औसत माइलेज मौजूदा 20.92 किमी/लीटर से बढ़ाकर लगभग 25.7 किमी/लीटर करना होगा। कंपनियों को यह लक्ष्य 5 साल में हासिल करना होगा।
ईवी और हाइब्रिड कारों पर मिलेगा ‘सुपर-क्रेडिट’ का फायदा
प्रदूषण घटाने वाली गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार ने कंपनियों को ‘सुपर-क्रेडिट’ देने का नियम बनाया है। इसका मतलब है कि कंपनी जितनी इको-फ्रेंडली गाड़ियां बेचेगी, रिकॉर्ड में उनकी गिनती ज्यादा मानी जाएगी। इससे कंपनियों के लिए कुल माइलेज का सरकारी टारगेट पूरा करना आसान हो जाएगा:
- प्योर इलेक्ट्रिक कार (EV): 3 गुना क्रेडिट मिलेगा। यानी अगर कंपनी 10,000 ईवी बेचेगी, तो सरकारी हिसाब में उसे 30,000 गाड़ियां गिना जाएगा।
- प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड: 2.5 गुना क्रेडिट मिलेगा।
- स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें: 1.6 गुना क्रेडिट मिलेगा।
- फ्लेक्स-फ्यूल कारें: 1.1 गुना क्रेडिट मिलेगा।
क्या हैं CAFE नियम और कैसे होती है इनकी गणना?
CAFE कार कंपनियों के लिए सरकार द्वारा तय किए गए माइलेज और प्रदूषण के नियम हैं। इसके तहत किसी एक साल में कंपनी की बिकी सभी गाड़ियों के औसत वजन, तेल की खपत और उनसे निकलने वाले धुएं को मिलाकर कुल स्कोर निकाला जाता है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कंपनी की हर एक कार को तय माइलेज देना ही होगा। बल्कि कंपनी की बेची गई सभी छोटी कारों, बड़ी एसयूवी, हाइब्रिड और ईवी का ‘कुल औसत’ (ओवरऑल एवरेज) सरकार के तय नियमों के अंदर होना चाहिए।
