संभल में जयराम के खिलाफ परिवाद, 29 सितंबर को सुनवाई:ब्रह्मा-विष्णु-शिव की तुलना नेहरू और जिन्ना से करने का आरोप, कोर्ट ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट


संभल के चंदौसी स्थित कोर्ट में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के खिलाफ हिंदू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी के मामले में परिवाद दाखिल किया गया है। हिंदू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने 10 सितंबर को यह परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम रमेश ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तुलना महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना से की। याचिका में इस तुलना को सनातन धर्म और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया गया है। मामले में कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है। 10 सितंबर को दाखिल किया था परिवाद सिमरन गुप्ता ने आरोप लगाया कि जयराम रमेश का यह बयान भोपाल में कांग्रेस की एक जनसभा से जुड़ा है। उनका कहना है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तुलना गांधी, नेहरू और जिन्ना से किए जाने से सनातन धर्म की आस्था को ठेस पहुंची है। सिमरन गुप्ता ने कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने वाले किसी भी नेता को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। उनके अधिवक्ता प्रसून कुमार ने बताया कि जयराम रमेश के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है। पुलिस रिपोर्ट नहीं आने से टली सुनवाई मामले में कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। निर्धारित तारीख तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होने के कारण पिछली सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब अदालत ने 24 सितंबर को अगली सुनवाई तय की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने बहजोई पुलिस को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी के खिलाफ भी दाखिल किया था मामला सिमरन गुप्ता इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ भी चंदौसी कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं। यह मामला 15 जनवरी 2025 को दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में राहुल गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई भाजपा और आरएसएस के साथ-साथ ‘इंडियन स्टेट’ से भी है। सिमरन गुप्ता ने इस बयान को लेकर 23 जनवरी 2025 को संभल में याचिका दाखिल की थी। बाद में मामले में पुनरीक्षण याचिका भी दायर की गई। 7 नवंबर 2025 को चंदौसी की अदालत ने सिमरन गुप्ता की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *