मंडाना में जैन समाज ने दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना की


इटावा जैन समाज के पर्युषण पर्व के पांचवें दिन को उत्तम, सत्य, धर्म के रूप में मनाया गया। वहीं श्रमण ज्ञान भारती संस्था, मथुरा से आए विद्वान अनिल जैन शास्त्री ने प्रवचन देते हुए कहा कि श्रेष्ठ सत्य का आचरण करना चाहिए। झूठ और कपट का त्याग करना चाहिए। अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानना चाहिए। सत्य धर्म केवल सच बोलने तक सीमित नहीं है। यह जीवन में सदाचार, करुणा, न्याय के मार्ग पर चलने का नाम है। सत्य का पालन केवल वाणी से नहीं होता। इसके लिए मन, वचन और काया (शरीर) तीनों की शुद्धि आवश्यक है। यदि मन में छल या द्वेष है, तो केवल शब्दों का सच बोलना भी परमार्थिक सत्य नहीं कहलाता। झूठ, कपट, धोखा और दिखावे से दूर रहना ही उत्तम सत्य है। जो वचन किसी को क्लेश न पहुंचाएं, जो सबका हित करने वाले हों, वही वास्तविक सत्य भाषा है। सत्य केवल वाणी से नहीं, बल्कि हमारे विचारों और व्यवहार में भी दिखना चाहिए। वहीं सुबह 7 बजे भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद दशलक्षण पर्व की पूजा-अर्चना की गई। शाम को बच्चों की पाठशाला, भगवान की महाआरती आयोजित की गई। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसमें प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष नवनीत जैन, महामंत्री मनोज जैन, उपाध्यक्ष देवेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष पीयूष जैन, सांस्कृतिक मंत्री ऋषभ जैन, संरक्षक चेतन पाटनी, बाहुबली जैन, अरुण जैन, पारस जैन, मुन्नालाल पाटोदी, मदनमोहन जैन, डी. के. जैन, मूलचंद जैन, हरिप्रकाश जैन, देवेंद्र जैन मौजूद रहे। मंडाना. कस्बे के जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के 5वें दिन उत्तम सत्य धर्म का पालन किया गया। सुबह श्रावकों द्वारा भगवान जिनेंद्र की शांतिधारा और अभिषेक किया गया। इसके पश्चात मूलवेदी पर विराजमान शांतिनाथ भगवान को अर्घ्य चढ़ाया गया। इसके बाद मंगलाष्टक, देव-शास्त्र-गुरु पूजा की गई। शांतिधारा की प्रथम बोली वीरेंद्र जैन परिवार और द्वितीय बोली प्रमोद जैन परिवार को प्राप्त हुई। शाम को जयपुर से पधारे संकित शास्त्री ने बच्चों के लिए जैन आगम की कक्षा लगाई। जिनेंद्र प्रभु की सायंकालीन मंगल आरती का सौभाग्य आवेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। आरती के बाद प्रवचन में उत्तम सत्य धर्म की महिमा पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि उत्तम सत्य वचन मुख जो बोले, सो प्राणी संसार न डोले। अर्थात जो व्यक्ति सत्य बोलता है, वह संसार में सबसे सुखी होता है। प्रत्येक श्रावक को सत्य रूपी धर्म को अपने जीवन में उतारना चाहिए। तत्पश्चात जैन धर्म प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के महिला-पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया। कई श्रावक-श्राविकाओं ने व्रत धर्म का पालन किया। सोमवार को धूप दशमी मनाई जाएगी।

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