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लखनऊ के हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से सोमवार को हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। हिंदी भवन के निराला सभागार में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब ने हिंदी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से हिंदी को नए मंच और पाठक मिल रहे हैं। कहानी, कविता एवं निबंध प्रतियोगिता-2025 के पुरस्कृत रचनाकारों को सम्मानित किया गया। वाराणसी की सुनीता कुमारी, हाथरस के माधव शर्मा, गाजीपुर की श्रेया यादव, लखनऊ के कुश रजवार, देवरिया के योगेंद्र पांडेय, अयोध्या की रतनमाला भारती, कुशीनगर के विवेक प्रताप मद्धेशिया, गाजीपुर की शिवांगी यादव, लखनऊ की दानिया इदरीसी, शाहजहांपुर के सृजन पांडेय, संभल के यशवीर सिंह और लखनऊ की सुकीर्ति वर्मा को उत्तरीय व प्रशस्ति पत्र दिए गए। डिजिटल युग में हिंदी की सार्थकता मुख्य अतिथि डॉ. सुधाकर अदीब ने हिंदी दिवस के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि हिंदी का प्रभाव विश्व स्तर पर लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल युग में हिंदी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ नए क्षेत्रों में अपनी जगह बना रही है। उन्होंने हिंदी को समय के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। विद्यार्थियों ने किया एकांकी पाठ कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा के एकांकी पृथ्वीराज की आंखें, मालिक के मालिक की सेवा और बादल की मृत्यु का पाठ किया गया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुस्तकालय से जुड़े शोधार्थी श्वेता जायसवाल, अनमोल शर्मा, सौम्या मिश्रा और डॉ. सरिता गिरि ने एकांकी प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमिता दुबे ने किया। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की रचनाएं समाज को दिशा देने के साथ नई पीढ़ी को भाषा, साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का काम करती हैं।
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लखनऊ में हिंदी दिवस समारोह:कहानी, कविता और निबंध प्रतियोगिता के रचनाकारों को किया सम्मानित