तरुण तेजपाल ने मापुसा कोर्ट में सरेंडर किया:2013 रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था, 22 सितंबर को अपील पर सुनवाई संभव


तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने सोमवार, 14 सितंबर को गोवा की मापुसा कोर्ट में सरेंडर किया। उन्होंने 2013 के रेप केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तेजपाल की अपील पर सुनवाई से पहले उन्हें सरेंडर करना होगा। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने और इसका सर्टिफिकेट जमा करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सर्टिफिकेट जमा होने पर तेजपाल की अपील 22 सितंबर को लिस्ट की जाएगी। यह अपील बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें तेजपाल को दोषी ठहराया गया था। यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है। उसने तेजपाल पर 7 और 8 नवंबर 2013 को एक होटल की लिफ्ट में यौन हमला करने का आरोप लगाया था। इन आरोपों में तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सरेंडर से छूट की मांग खारिज पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सरेंडर से छूट देने की याचिका खारिज कर दी थी। तेजपाल ने यह याचिका अपनी अपील को सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट किए जाने से पहले सरेंडर से बचने के लिए दायर की थी। जस्टिस आलोक अराधे की एकल पीठ ने तेजपाल को तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उनसे सरेंडर सर्टिफिकेट भी जमा करने को कहा। पीठ ने यह भी कहा कि अगर सर्टिफिकेट जमा किया जाता है, तो उनकी आपराधिक अपील 22 सितंबर को लिस्ट की जाएगी। तेजपाल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने कहा कि उनकी अपील को पहले लिस्ट करके सुनवाई की जानी चाहिए। सिब्बल ने दलील दी कि उचित मामले में कोर्ट सरेंडर की शर्त हटाने की शक्ति रखता है। उन्होंने कहा कि आरोपी के सरेंडर किए बिना भी आपराधिक अपील लिस्ट की जा सकती है। गोवा सरकार ने याचिका का विरोध किया गोवा सरकार की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने तेजपाल की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरेंडर से छूट देने वाली अर्जी पर मामले के मेरिट के आधार पर विचार होना चाहिए। मेहता ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निष्कर्षों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह रेप का गंभीर मामला है। इस मामले में तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। जस्टिस अराधे ने कहा कि कोर्ट सरेंडर से छूट की मांग पर इसलिए विचार कर रही है, क्योंकि उसके पास ऐसा करने की शक्ति है। सिब्बल ने कहा कि तेजपाल की अपील में हाईकोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने का फैसला पलटने को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा कि अपील के मेरिट पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उसने हाईकोर्ट का फैसला पढ़ा है। कोर्ट ने तेजपाल और गोवा सरकार, दोनों पक्षों से सरेंडर से छूट के सवाल तक अपनी दलीलें सीमित रखने को कहा। कोर्ट ने तेजपाल से पूछा कि सरेंडर करने में उन्हें कितना समय लगेगा। उनके वकील ने तीन हफ्ते का समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने सरेंडर से छूट की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने तेजपाल को तीन हफ्ते में सरेंडर करने और इसका प्रमाण जमा करने का आदेश दिया।

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