सिद्धार्थनगर में लेखपालों का धरना खत्म, दो का ट्रांसफर रद्द:4 दिन बाद प्रशासन ने मानी मांगें, एग्रीस्टैक भुगतान का भी आश्वासन


सिद्धार्थनगर में चार दिन से कलेक्ट्रेट परिसर में चल रहा लेखपाल संघ का धरना शनिवार रात प्रशासन के साथ समझौते के बाद खत्म हो गया। जिला प्रशासन ने संघ की 11 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताते हुए कई बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। समझौते के बाद संघ ने आंदोलन स्थगित कर दिया और सभी लेखपालों को अपने शासकीय कार्य पर लौटने के निर्देश दिए। जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्त ने धरना खत्म करने की घोषणा की। यह आंदोलन 8 सितंबर से चल रहा था। संघ की प्रमुख मांगों में बीच सत्र में नियमों के खिलाफ किए गए लेखपालों के तबादले रद्द करना शामिल था। समझौते के बाद लेखपाल जितेंद्र यादव और कृष्णानंद चौधरी का ट्रांसफर रद्द कर दिया गया। संघ के मुताबिक, एग्रीस्टैक के बकाया भुगतान के लिए तहसीलवार लेखपालों के नाम मांगे गए हैं। वर्ष 2016 बैच के लेखपालों के अंकपत्र उपलब्ध कराने के लिए भी तहसीलवार नाम मांगे गए हैं। लंबित शस्त्र लाइसेंस जल्द जारी करने और इटवा तहसीलदार द्वारा लेखपाल जितेंद्र यादव के साथ कथित गलत व्यवहार के मामले में भी प्रशासन ने अपने स्तर से कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दो लेखपालों का ट्रांसफर रद्द, एग्रीस्टैक भुगतान पर भी बनी सहमति समझौते के बाद जितेंद्र यादव और कृष्णानंद चौधरी का तबादला रद्द कर दिया गया। संघ का कहना था कि दोनों के ट्रांसफर बीच सत्र में नियमों के विपरीत किए गए थे। इसके अलावा एग्रीस्टैक के बकाया भुगतान के लिए तहसीलवार लेखपालों के नाम मांगे गए हैं, ताकि भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। वर्ष 2016 बैच के लेखपालों के अंकपत्र उपलब्ध कराने के लिए भी तहसीलवार नाम मांगे गए हैं। संघ ने बताया कि इन मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद समझौता हुआ है। खतौनी की अंश त्रुटियां ठीक कराने और नए नक्शे देने की मांग संघ ने खतौनी में किसानों के गाटों में तहसील ऑपरेटरों द्वारा की गई अंश त्रुटियों को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग रखी थी। इसके साथ लेखपालों को अद्यतन आरटीके खतौनी उपलब्ध कराने और पिछले वर्ष के खसरा का प्रिंट देने की मांग भी शामिल थी। जीर्ण-शीर्ण भू-मानचित्र वाले राजस्व ग्रामों में नए नक्शे उपलब्ध कराने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी गई। फार्मर रजिस्ट्री में शासनादेश का पालन कराने और अन्य लंबित राजस्व संबंधी कार्यों के निस्तारण की मांग भी संघ ने उठाई थी। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलों के निस्तारण का भी आश्वासन लेखपाल संघ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलों का निस्तारण कराने और बजट के लिए परिषद को भेजने की मांग की थी। संघ के मुताबिक, इस मांग पर भी प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। लंबित शस्त्र लाइसेंस जल्द जारी करने का आश्वासन भी दिया गया है। इटवा तहसीलदार द्वारा लेखपाल जितेंद्र यादव के साथ कथित गलत व्यवहार के मामले में प्रशासन ने अपने स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया है। संघ ने कहा कि शेष मांगों से संबंधित कार्यवृत्ति भी जारी की जाएगी। जिलाध्यक्ष ने प्रशासन पर लगाए थे गंभीर आरोप आंदोलन के दौरान जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्त ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि भूमाफियाओं के दबाव में डीएम और एडीएम लेखपालों पर कार्रवाई कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार, जिले में भूमाफिया अवैध कब्जे कर रहे हैं। लेखपाल इन मामलों की रिपोर्ट अधिकारियों को देते हैं, लेकिन कब्जा हटाने के बजाय लेखपालों पर ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे लेखपालों पर दबाव बनाने का गलत तरीका बताया था। ये आरोप संघ की ओर से लगाए गए थे। संगठन की एकता और संघर्ष की जीत बताया आंदोलन चार दिन के आंदोलन को लेखपाल संघ ने संगठन की एकता और संघर्ष की जीत बताया। जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्त ने धरने में नियमित रूप से शामिल होने वाले लेखपालों और महिला लेखपालों का आभार जताया। उन्होंने बस्ती मंडल से आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पदाधिकारियों और लेखपाल साथियों के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया। प्रशासन के साथ समझौते के बाद जिलाध्यक्ष के आदेश पर धरना स्थगित कर दिया गया। मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रखेगा संघ धरना खत्म करने के बाद जिलाध्यक्ष ने सभी लेखपालों से अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने को कहा। संघ ने स्पष्ट किया कि जिन मांगों पर प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है, उनके क्रियान्वयन पर संगठन नजर रखेगा। समझौते के बाद अब लेखपालों के काम पर लौटने से राजस्व संबंधी कार्य फिर सामान्य हो

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