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बसपा और भाजपा से छिटका दलित वोट बैंक सपा की ओर जाने से भाजपा की चिंता बढ़ गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे गंभीर समस्या मानते हुए दलित वर्ग को फिर से भाजपा से जोड़ने की मुहिम शुरू करने की आवश्यकता जताई है। विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए यूपी दौरे पर आए राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने शनिवार को कानपुर कमिश्नरी के कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, कन्नौज, औरेया और फर्रुखाबाद जिलों के भाजपा सांसद, भाजपा विधायक, भाजपा के जिलाध्यक्षों के साथ करीब चार घंटे तक बैठक की। शाम 7 से रात 11 बजे तक चली बैठक में बीएल संतोष ने प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में प्रत्येक विधायक और 2022 में हारे हुए प्रत्याशी से संवाद किया। उन्होंने पूछा कि 2022 में उन्हें कितने वोट मिले थे, कितने वोट से जीत-हार हुई थी। 2024 लोकसभा चुनाव में उनके विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी को कितने वोट मिले, यदि 2024 में उनके क्षेत्र में भाजपा की हार हुई तो उसके क्या कारण रहे और जो समस्या रही उसका अब 2027 में समाधान कैसे होगा। उन्होंने साफ कहा कि 2027 में आप चुनाव कैसे जीतेंगे? विधायकों ने एक स्वर में कहा कि बसपा से अलग हुआ दलित वोट 2017 और 2019 में भाजपा को मिला। 2022 में भी बड़ी संख्या में दलित वोट भाजपा को मिला था। लेकिन 2024 में संविधान बदलने, आरक्षण समाप्त करने जैसे नेरेटिव से दलित वोट नाराज हो गया, दलित वोट भाजपा से अलग होकर सपा में शिफ्ट हो गया। विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों ने माना कि दलित वोट अभी भी सपा की ओर शिफ्ट हो रहा है, आगामी चुनाव में यह बड़ी समस्या बनेगा। उन्होंने विधानसभा क्षेत्रों में जातीय समीकरण, समाजों के रुझान पर भी बात की। बीएल संतोष ने कहा कि दलित वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए अभियान चलाएं, दलित नेताओं को पार्टी से जोड़ें। अंबेडकर प्रतिमा योजना को लागू करें, संत रविदास की जयंती पर हो रहे कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से मनाकर दलितों को बीजेपी से जोड़ें। बैठक में प्रदेश महामंत्री शंकर लाल लोधी, कानपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू मौजूद थे। सोशल मीडिया फोटो एलबम तक सीमित नहीं रखें बीएल संतोष ने कहा कि सोशल मीडिया अब सबसे बड़ा पॉलिटिकल टूल है, उसे केवल फोटो या एलबम तक सीमित नहीं रखें। उन्होंने चुनावी तैयारी में सोशल मीडिया का पूरा उपयोग करने की सलाह दी, कहा कि इसके जरिए सबसे तेज और प्रभावी तरीके से जनता तक बात पहुंचाई जा सकती है। लेकिन इसका गलत उपयोग नहीं होना चाहिए। एसआईआर में वोट बहुत कट गए विधायकों ने बैठक में बताया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कट गए हैं, इनमें बीजेपी की विचारधारा के मतदाताओं के नाम भी हैं। बीएल संतोष ने कहा कि मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम अभी चल रहा है, यदि लगता है कि किसी का नाम कट गया है तो उसे फिर जुड़वा सकते हैं। बीएल संतोष ने कहा कि यूपी में महिला मतदाताओं का जेंडर रेशयो बहुत कम है, इसका मतलब साफ है कि बेटी की शादी के बाद उसका नाम मायके की मतदाता सूची से तो कट गया है लेकिन ससुराल के क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के मतदाता सूची में नाम नहीं है उनका नाम जुड़वाएं, महिलाएं भाजपा का बड़ा वोट बैंक है। वीआईपी संस्कृति से बहुत नुकसान हो रहा है बीएल संतोष ने कहा कि अब जमाना बदल गया है। जनता वीआईपी संस्कृति को पंसद नहीं कर रही है, गाड़ियों के काफिले, सायरन और टोल फ्री कराने से जनता में गलत संदेश जाता है इससे विधायक, सांसद, जिलाध्यक्ष के साथ पार्टी का भी नुकसान होता है। बीएल संतोष और धर्मपाल सिंह ने संकेत में इशारा किया कि विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ना है। विधायक-सांसद, विधायक-जिलाध्यक्षों के बीच टकराव नहीं होना चाहिए।
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सपा की ओर खिसकते दलित-वोट ने भाजपा की चिंता बढ़ाई:कानपुर में राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने विधायकों से पूछा- कैसे चुनाव जीतोगे