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गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार सुबह 8:30 बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। नदी का जलस्तर बढ़ने से तरबगंज और करनैलगंज तहसील के 30 गांवों की करीब 25 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। 15 से ज्यादा गांवों में पानी घुसने से लोगों के घर जलमग्न हो गए हैं और कई गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो गए हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों के आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा रह गई है। घरों में पानी भरने से खाना बनाने, सोने और रोजमर्रा का जीवन चलाने में लोगों को भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीण घरों के अंदर तख्त, चारपाई और मचान पर खाना बनाने और सोने को मजबूर हैं। पिछले 24 घंटे में दोनों तहसीलों से 12 से ज्यादा परिवार सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंचने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। घरों में रखा राशन पानी में खराब हो रहा है, वहीं पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में पानी भरने के कारण पशुओं के लिए चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बाढ़ पीड़ित महंगे दामों पर भूसा खरीदकर किसी तरह पशुओं को बचाने में जुटे हैं। दूसरी ओर नदी के तटीय इलाकों में कटान तेज होने से पिछले 24 घंटे में दोनों तहसीलों में 25 बीघे से ज्यादा जमीन घाघरा की धारा में समा चुकी है। मचान और चारपाई पर गुजर रही जिंदगी घरों में पानी भर जाने के बाद ग्रामीणों ने ऊंचे स्थान के रूप में तख्त, चारपाई और मचान का सहारा लिया है। इन्हीं पर खाना बनाया जा रहा है और रात में सोने की व्यवस्था की जा रही है। कई घरों में नीचे रखा सामान और राशन पानी की चपेट में आने से खराब हो रहा है। लगातार बढ़ते पानी के कारण लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की चिंता भी सता रही है। बाढ़ में ट्रैक्टर पर गैस सिलेंडर लेकर पहुंच रहे घर बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण ट्रैक्टर पर गैस सिलेंडर लादकर अपने घरों तक ले जा रहे हैं। घरों के अंदर खाना बनाने के लिए रखी लकड़ियां पानी में भीगकर खराब हो चुकी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर ही खाना पकाने का मुख्य सहारा रह गया है। जिन रास्तों पर पानी भर गया है, वहां मोटरसाइकिल से निकलना मुश्किल हो गया है। इसलिए लोग ट्रैक्टर से गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामान घरों तक पहुंचा रहे हैं। ब्योन्दा माझा, दत्तनगर, ऐली परसौली, ऐली माझा, बहादुरपुर और जबरनगर सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में हैं। इन गांवों में बड़ी संख्या में घरों के अंदर बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। यहां रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों और गांवों के किनारे भी पानी भरा होने से आवागमन प्रभावित है। कई मजरों में तेजी से फैल रहा पानी, दो तरफ से घिरे गांव साकीपुर, गोकुला, तुलसीपुर, महंगूपुर, रघुनाथपुर, जैतपुर और दुर्गागंज के मजरों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। उमरी बेगमगंज क्षेत्र के ऐली, परसौली, गढ़ी, परास, जबरनगर और बहादुरपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का असर है। नकहरा के नौ और चंदापुर किटौली के पांच मजरे दो तरफ से पानी से घिर गए हैं। करनैलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र के नदी से सटे तटीय गांवों और जमीनों पर लगातार कटान हो रहा है। घाघरा की तेज धारा नदी के किनारे की जमीन को काटकर अपने साथ ले जा रही है। बीते 24 घंटे में 25 बीघे से अधिक जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। हजारों बीघा फसल पहले से ही बाढ़ के पानी में डूबी हुई है और बर्बाद होने की कगार पर है। इससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। चार बैराजों से छोड़ा जा रहा घाघरा में पानी घाघरा नदी में पहले गिरजा, शारदा और सरयू बैराज से पानी छोड़ा जा रहा था। अब सुहेली बैराज से भी घाघरा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि डिस्चार्ज में थोड़ी कमी आई है, लेकिन नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ा हुआ है। बुधवार सुबह 8:30 बजे गिरजा बैराज से 1,41,702, शारदा बैराज से 1,77,133, सरयू बैराज से 5,954 और सुहेली बैराज से 23,075 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। चारों बैराजों से कुल 3,47,864 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बुधवार सुबह 8:30 बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 106.560 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 106.070 मीटर है। इस तरह नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर और तटीय इलाकों में कटान के कारण बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
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गोंडा में घाघरा की धार में डूबे खेत-घर, VIDEO:30 गांव की 25 हजार आबादी बाढ़ से घिरी, खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची