Satya Niketan Building Collapse | Delhi PG Demolition Starts & Arrest

नई दिल्ली2 घंटे पहले

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जिस बिल्डिंग को गिराया जा रहा है उसे पिलर के जरिए सपोर्ट दिया गया है।  - Dainik Bhaskar

जिस बिल्डिंग को गिराया जा रहा है उसे पिलर के जरिए सपोर्ट दिया गया है।

MCD ने मंगलवार को सत्या निकेतन में हादसे वाली इमारत से सटी बिल्डिंग को नियंत्रित तरीके से तोड़ना शुरू कर दिया है। MCD अधिकारियों के मुताबिक, इस बिल्डिंग को खतरनाक घोषित किया गया था।

मंगलवार शाम तक तोड़ने का काम रोक दिया गया। इसे बुधवार सुबह फिर शुरू किया जाएगा। बिल्डिंग में छात्राओं के लिए पीजी चल रहा था। पड़ोसी इमारत गिरने के बाद इसे खाली करा लिया गया था।

सत्या निकेतन में रविवार को गिरी इमारत में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई थी और 5 लोग घायल हुए थे।

इधर, इमारत गिरने के मामले में लेबर कॉन्ट्रैक्टर को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया है। यह इस मामले में चौथी गिरफ्तारी है।

इससे पहले पीजी के मालिक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को पुलिस सोमवार को गिरफ्तार कर चुकी है।

आरोपी दंपती 14 दिन की, बेटा 2 दिन की रिमांड पर

हरिराम बंसल भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं।

हरिराम बंसल भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं।

सोमवार रात इन तीनों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। जस्टिस भव्य खराल ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस रिमांड के दौरान इमारत मालिक हरिराम गुप्ता के बेटे महेश गुप्ता ने जांच अधिकारी को बताया कि पीजी संचालित करने वाली कंपनी की शिकायत पर बेसमेंट में पानी भरने और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत करवाई जा रही थी।

बेसमेंट से पानी निकालने के बाद निर्माण कार्य के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन भी चलाई जा रही थी। आशंका है कि मशीन से पैदा हुई कंपन और कमजोर हुई संरचना के कारण भवन भरभराकर गिर गया।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सुनवाई कल

सत्य निकेतन पीजी हादसा मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा करेंगे। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

यह मुद्दा तब उठा जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा ने 6 सितंबर को हुई सत्य निकेतन भवन दुर्घटना का उल्लेख किया। सिन्हा अवैध और असुरक्षित भवनों से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत की सहायता कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी देशभर में अवैध इमारतों के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी कर चुका है और अब उनके पालन की स्थिति की समीक्षा करना चाहता है। अदालत की टिप्पणी को भवन सुरक्षा के मुद्दे पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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पूरी दिल्ली में खतरनाक भवनों की जांच

MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) से अपने क्षेत्र की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा है। सत्य निकेतन में रविवार को एक बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत हुई थी और 6 लोग घायल हुए थे। इसी हादसे के बाद यह आदेश जारी किया गया है।

जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में 10 दिन के भीतर दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल किया जाएगा। सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

इधर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनके लिए सहायता का ऐलान किया।

MCD ने साउथ जोन के 5 अधिकारी सस्पेंड किए

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को सोमवार को सस्पेंड कर दिया। उनके साथ चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक सस्पेंड किया गया है।

इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। 2016 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी सौरभ अभी साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।

जहां हादसा हुआ, वहां 300 मकान 170 में पीजी

सत्य निकेतन 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसा था। 1970 के दशक में साउथ कैंपस शुरू होने के बाद कॉलेज बढ़े और यहां छात्र रहने लगे। कई मूल आवंटी मकान बेच चुके हैं। इस इलाके में करीब 300 मकान हैं। इनमें करीब 170 में पीजी हैं।

अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार सहने के हिसाब से नहीं बनाई गई हैं। दिल्ली के लगभग 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख इमारतों के पास ही स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं।

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