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कानपुर के अहिरवां स्थित सुरक्षा विहार में विशाल श्री शिव महापुराण कथा चल रही है। इसके छठे दिन सोमवार शाम 6:15 बजे कथा व्यास प्रशांत प्रभु महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म और सनातन परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के प्रसंगों का वर्णन किया। महाराज ने माता पार्वती के जन्म और तपस्या का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि घर में कन्या का जन्म सौभाग्य की बात है और इसे उत्सव की तरह मनाना चाहिए। कन्या को देवी का रूप मानकर उसका स्वागत करना चाहिए। उन्होंने भ्रूण हत्या को समाज के लिए कलंक बताया और इसे खत्म करने के लिए सबको जागरूक होने को कहा। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने सिर्फ तीन साल की उम्र में नारद जी से गुरु मंत्र लिया था। इससे प्रेरणा लेते हुए माता-पिता को बच्चों को बचपन से ही सनातन संस्कार, धर्म और धार्मिक कामों से जोड़ना चाहिए। संस्कार ही बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं। महाराज ने माता पार्वती की तपस्या का वर्णन करते हुए कहा कि संतान के विवाह में माता-पिता को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बेटे या बेटी के लिए जीवनसाथी चुनते समय उसके चरित्र, संस्कार और परिवार की जानकारी कम से कम सात लोगों से जरूर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्मनिष्ठ और संस्कारवान संतान ही परिवार की असली समृद्धि होती है। कथा के दौरान भजनों और धार्मिक जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। इस मौके पर महेश वर्मा, रजत पांडे, पंकज पांडे, कुसुम सिंह, प्रभाकर, उदयवीर सिंह, देवदत्त वर्मा, अमन सिंह, आनंद पांडे और मनोज शुक्ला समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।
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प्रशांत प्रभु महाराज बोले, कन्या भ्रूण हत्या महापाप है:शिव महापुराण कथा में कहा, कन्या के जन्म पर उत्सव मनाएं और बचपन से दें संस्कार