बांदा में बाढ़ की आशंका, डीएम ने जारी की चेतावनी:प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए, मकान-पशुहानि पर मिलेगी आर्थिक मदद


बांदा जिले में नदियों का पानी बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जिलाधिकारी अमित आशेरी ने जिले के लोगों से बाढ़ की स्थिति में सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल सही जानकारी पर भरोसा करने की गुजारिश की है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, टॉर्च, मोबाइल फोन, चार्जर, सूखा भोजन और पीने का पर्याप्त पानी तैयार रखने को कहा है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तेज बहाव वाले पानी, नालों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें। बाढ़ के पानी में पैदल चलने या वाहन निकालने से भी बचें, क्योंकि पानी की गहराई और बहाव का सही अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहने और बिजली के उपकरणों को न छूने की भी अपील की गई है। अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि लगातार बारिश के कारण मकान खराब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। राज्य आपदा राहत कोष के तहत, करीब 15 प्रतिशत तक थोड़ा बहुत खराब हुए कच्चे मकानों के लिए 4 हजार रुपये की मदद मिलेगी। घर से जुड़े पशुबाड़ों के खराब होने पर 3 हजार रुपये की आर्थिक मदद का भी प्रावधान है। प्रभावित लोग आपदा कंट्रोल रूम में जानकारी देकर मदद ले सकते हैं। आपदा में दूध देने वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, ऊंट और याक के मरने पर 37,500 रुपये की मदद मिलेगी। भेड़, बकरी और सुअर के मरने पर 4 हजार रुपये और दूध न देने वाले पशुओं जैसे ऊंट, बैल और घोड़े के मरने पर 32 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। वहीं, बछड़ा, गधा और टट्टू के मरने पर 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। आपदा में किसी व्यक्ति की जान जाने पर मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।

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