45 की उम्र में चाहिए ₹1 करोड़ का फंड:25 की उम्र में ₹10,200 की SIP से बनेगा काम; जानें कंपाउंडिंग का गणित


यदि आप 45 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो इसमें सबसे बड़ा रोल आपकी शुरुआत करने की उम्र का होता है। फाइनेंशियल प्लानर्स के मुताबिक, म्यूचुअल फंड SIP में जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाएगा, जेब से उतनी ही कम रकम लगानी पड़ेगी। उदाहरण के लिए, 25 की उम्र में ₹10,200 की मंथली SIP से जो लक्ष्य हासिल हो सकता है, वही लक्ष्य 35 की उम्र में हासिल करने के लिए हर महीने ₹44,000 निवेश करने होंगे। दरअसल, म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक बने रहने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। अगर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलें, तो देर से शुरुआत करने पर कंपाउंडिंग का समय कम हो जाता है और निवेशक को अपनी जेब से ज्यादा पैसा लगाना पड़ता है। 25 की उम्र से शुरुआत: हर महीने ₹10.200 की SIP करनी होगी अगर कोई 25 साल की उम्र में SIP शुरू करता है, तो उसके पास 45 की उम्र तक पहुंचने के लिए 20 साल का समय है। 12% का रिटर्न मिलने पर 26.48 लाख का निवेश 1 करोड़ बन जाएगा। फायदा: लंबे समय के कारण कुल फंड में 75% से ज्यादा हिस्सेदारी कंपाउंडिंग से मिले रिटर्न की होगी, जबकि आपके पास से केवल ₹26.48 लाख ही खर्च होंगे। 30 की उम्र से शुरुआत: मंथली SIP दोगुनी होकर ₹20,500 हो जाएगी यदि शुरुआत 5 साल की देरी से यानी 30 की उम्र में होती है, तो 45 का लक्ष्य पाने के लिए सिर्फ 15 साल का समय बचता है। समय कम होने की वजह से मंथली किश्त दोगुनी करनी पड़ेगी। 35 की उम्र से शुरुआत: हर महीने ₹44,000 का निवेश करना होगा 35 की उम्र में निवेश शुरू करने पर 45 वर्ष का होने में केवल 10 साल का वक्त रह जाता है। इतने कम समय में ₹1 करोड़ का टारगेट हासिल करने के लिए भारी-भरकम SIP करनी होगी। नुकसान: यहां निवेशक को मिलने वाले रिटर्न (₹48.41 लाख) से ज्यादा रकम (₹52.80 लाख) खुद अपनी जेब से लगानी पड़ रही है, क्योंकि कंपाउंडिंग को काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। जितनी जल्दी निवेश, उतना कम बोझ तीनों उम्र के आंकड़ों की तुलना करें तो साफ होता है कि सिर्फ 10 साल की देरी से मंथली किश्त 4 गुना से भी ज्यादा बढ़ जाती है। 25 की उम्र में जहां महीने का ₹10,200 देना आसान होता है, वहीं 35 की उम्र में ₹44,000 हर महीने बचाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। बाजार जोखिमों का ध्यान रखना भी जरूरी यह कैलकुलेशन 12% के संभावित सालाना रिटर्न के अनुमान पर आधारित है। म्यूचुअल फंड रिटर्न शेयर बाजार की चाल पर निर्भर करता है, इसलिए यह कम या ज्यादा भी हो सकता है। हालांकि, लॉन्ग टर्म में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स औसतन 12% तक का रिटर्न देने में सक्षम रहे हैं।

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