सुप्रीम कोर्ट में उठा हाईवे पर अतिक्रमण-पार्किंग का मुद्दा:NHAI को निर्देश- सभी टोल प्लाजा पर कैमरे और सर्विलांस रूम बनाएं


हाईवे पर अतिक्रमण और सड़क किनारे खड़े वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सवाल किया है। कोर्ट ने पूछा कि टोल प्लाजा पर कैमरे लगाकर हाईवे की निगरानी क्यों नहीं की जा सकती और इसके लिए अलग सर्विलांस रूम क्यों नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हाईवे पर अतिक्रमण और सड़क किनारे गलत तरीके से खड़े वाहन बड़ी समस्या हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। NHAI ने कोर्ट को बताया कि बिना अनुमति हाईवे पर पार्किंग रोकने के लिए नियमित पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। राजस्थान के फलोदी में हुए एक हादसे के मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल उठाया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट बोला- किनारे खड़े वाहन हादसों की वजह बेंच ने NHAI से कहा, “आप कैमरों से निगरानी की व्यवस्था के बारे में क्यों नहीं सोच सकते? सभी टोल प्लाजा पर निगरानी कक्ष बनाए जा सकते हैं।” इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मदद कर रहे सीनियर एडवोकेट एएनएस नडकरनी ने कहा कि हाईवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग बड़ी समस्याओं में से एक है। इसकी वजह से सड़क हादसे होते हैं। बेंच ने कहा कि सड़क परिवहन-राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने अब तक मामले में अनुपालन हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं। कोर्ट ने दोनों मंत्रालयों और तमिलनाडु सरकार को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। फलोदी हादसे के बाद कोर्ट ने एक्शन लिया पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने फलोदी में 2 नवंबर को हुए सड़क हादसे पर खुद एक्शन लिया था। इस हादसे में एक टेंपो ट्रैवलर खड़े ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था। यह घटना भारतमाला हाईवे पर मटोदा गांव के पास हुई थी। टेंपो ट्रैवलर बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रहा था। हाईवे पर पार्किंग और ढाबों को लेकर अंतरिम निर्देश इससे पहले 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन नेशनल हाईवे के कैरिजवे या पक्के किनारे पर पार्क या खड़ा नहीं किया जाएगा। ऐसे वाहन केवल तय पार्किंग बे, ले-बाय या सड़क किनारे यात्रियों की सुविधा वाली जगह पर ही रुक सकेंगे। कोर्ट ने किसी भी नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे में नए ढाबे, खाने की जगह या व्यावसायिक ढांचे के निर्माण और संचालन पर भी रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI को हादसों वाले ब्लैकस्पॉट और गंभीर जोखिम वाले इलाकों की पहचान करने का निर्देश दिया था। साथ ही, इनके ब्लैकस्पॉट की पूरी लिस्ट जारी करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था, “राष्ट्रीय राजमार्ग देश की कुल सड़क लंबाई का करीब 2% हैं, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी लगभग 30% है। सड़क, खासकर तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे, प्रशासनिक लापरवाही या बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण खतरे का रास्ता नहीं बनना चाहिए।”

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