Gujarat Mobile Scam | Gang Cheating Poor People in Patan & Banaskantha

अहमदाबाद3 मिनट पहले

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गुजरात के पाटण और बनासकांठा के राधनपुर, समी, सांतलपुर और भाभर समेत कई इलाकों में एक संगठित गैंग महंगे मोबाइल ठगने का स्कैम चला रही है। पाटण-बनासकांठा में पिछले दो महीनों में इस तरीके से 100 से ज्यादा मोबाइल ठगने की बात सामने आई है।

इस घोटाले को लेकर राधनपुर मोबाइल एसोसिएशन और पीड़ित व्यापारियों ने पुलिस में लिखित शिकायत दी है। इन ठगों के काम करने का तरीका ऐसा है कि आम व्यापारी इनके झांसे में आ जाते हैं और जब तक उन्हें ठगे जाने का पता चलता है, ये स्कैमर मोबाइल बेचकर गायब हो जाते हैं।

इसमें ठग सीधे-साधे लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके या उन्हें पैसों का लालच देकर महंगे मोबाइल फोन ईएमआई पर खरीदवाते हैं और फिर फोन लेकर गायब हो जाते हैं। लोन की पूरी किस्त और कानूनी देनदारी दस्तावेज देने वाले व्यक्ति पर आ जाती है।

गरीबों के डॉक्यूमेंट्स लेकर मोबाइल खरीदते हैं ठग

  • यह गैंग गरीब और भोले-भाले लोगों को कुछ पैसे देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर डाउन पेमेंट भरकर लोन पर 50 हजार रुपए से ज्यादा महंगे मोबाइल मोबाइल खरीदती है।
  • एकाध किस्तें भरने के बाद बाकी किस्तें नहीं भरी जातीं। किस्त नहीं भरने से कंपनियां फोन लॉक करवा देती हैं।
  • ऐसे में गैंग के सदस्य एआई के जरिए मोबाइल के फर्जी जीएसटी बिल तैयार करते हैं और कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर में फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट करा लेते हैं।
  • इससे फोन अनलॉक हो जाता है। बाद में इन मोबाइलों को आधे-पौने दामों में बाजार में बेच दिया जाता है।

मोबाइल की किस्तें जमा नहीं हुईं तो व्यापारी ग्राहकों के घर पहुंचा

व्यापारी हार्दिक ठक्कर ने जून में बेचे गए 11 मोबाइल फोन की किस्तें जमा नहीं होने पर जांच की। ग्राहकों के घर गए तो पता चला उनके पास फोन थे ही नहीं। उन्हें 5 हजार रु. देकर उनके नाम पर मोबाइल लिए गए थे।

कई व्यापारियों का पैसा फंसा तो पुलिस स्टेशन में दर्ज की शिकायत

जब पर बेचे गए फोन की ईएमआई जमा नहीं होने के कारण फाइनेंस कंपनियों और बैंकों का दबाव व्यापारियों पर बढ़ने लगा और उनका पैसा फंस गया तो वे पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस जांच में जुटी है।

लोन पर लिए फोन में होता है लॉक करने का सिस्टम

लोन पर फोन खरीदते समय फोन में फाइनेंस कंपनी की ‘डिवाइस एडमिन’ सिक्योरिटी एप इंस्टॉल किया जाता है। यह एप फोन के आईएमईआई नंबर से लिंक होता है। किस्तों का भुगतान नहीं होता तो एप के सर्वर से सिग्नल भेजकर मोबाइल की सिस्टम एक्सेस लॉक कर दी जाती है। ठग किसी दूसरी दुकान के नाम से नकली बिल तैयार करके फोन अपडेट करवा लेते थे।

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