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फतेहपुर से आस्था और चमत्कार की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई है। मलवां ब्लॉक के गोधरौली गांव के घने जंगल में ‘बराह देवी’ के दो प्राचीन मंदिर स्थित हैं। आस्था का यह धाम पूरे वर्ष भक्तों से गुलजार रहता है, लेकिन भादों (भाद्रपद) के महीने में यहां का नजारा बिल्कुल अलग होता है। भक्त यहां आकर माता रानी को फल, मेवा, मिष्ठान और जल अर्पित कर मन्नतें मांगते हैं। यह तालाब मंदिर के ठीक बगल में एक प्राचीन तालाब और 6 खंभों वाला पक्का कुआं बना हुआ है। इस तालाब को लेकर एक खास पौराणिक मान्यता है। स्थानीय निवासी ओम सिंह बताते हैं कि इस तालाब में स्नान करने से फोड़ा, फुंसी, चर्म रोग और बच्चों में होने वाला सूखा रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। यह तालाब और माताजी का मंदिर इन बीमारियों के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु अपने बीमार बच्चों को इस तालाब में स्नान कराते हैं और उनके पुराने वस्त्र वहीं त्याग देते हैं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर माताजी के मंदिर में जल अर्पण किया जाता है। भक्त माता के चरणों में चढ़े जल को सुरक्षित पात्र में घर ले जाते हैं और उसे शरीर पर लगाकर निरोगी होने की कामना करते हैं। 500 सालों से सज रहा भादों का ऐतिहासिक मेला इस मंदिर परिसर में पिछले 500 वर्षों से अनवरत भादों माह के सभी मंगलवार को एक विशाल मेला लगता है। इस ऐतिहासिक मेले में दूर-दूर से व्यापारी पहुंचते हैं। मेले में भव्य झूले, सर्कस, साज-सज्जा का सामान, मीना बाजार, और लकड़ी व पत्थर से बने आकर्षक सामानों की दुकानें सजती हैं। इन खास मौकों पर खरीदारी करने और मेले का लुत्फ उठाने के लिए आस-पास के जिलों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। गांव वाले खुद संभालते हैं पूरी व्यवस्था इतने विशाल मेले और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद, यहां की पूरी व्यवस्था गोधरौली गांव के ग्रामीण खुद ही मिलकर संभालते हैं। मेले के सफल आयोजन और सुरक्षा की जिम्मेदारी बुदुल सिंह, राजू सिंह, राम प्रताप सिंह, ओम सिंह और राम नजर सिंह सहित गांव के सभी लोग मिलकर निभाते हैं। वहीं, मंदिर के गर्भगृह और अंदर की पूरी व्यवस्था सैनी समाज के लोग मुस्तैदी के साथ संभालते हैं।
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500 साल पुराना मंदिर बना आस्था का केंद्र:बगल के तालाब में नहाने से चर्म रोग खत्म होने की मान्यता