मोहन भागवत अपने शिष्यों को नफरत मिटाने का पाठ पढ़ाएं:सांसद इमरान मसूद बोले-भारत में उनके शिष्य बांट रहे नफरत, किसानों की 6500 रुपए EMI रुक जाए तो अमीन घर आ जाएंगे


सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपने आवास पर बातचीत के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुस्लिमों को लेकर दिए जा रहे बयानों, समाज में बढ़ती कथित नफरत, 2027 के विधानसभा चुनाव और उद्योगपतियों की कर्जमाफी समेत कई मुद्दों पर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार समाज के अंदर फैली नफरत को खत्म करने की बात कर रहे हैं। मोहन भागवत यदि बाहर जाकर मुस्लिमों के प्रति प्रेम और भाईचारे की बात करते हैं तो उन्हें अपने लोगों को भी यही संदेश देना चाहिए। इमरान मसूद ने कहा कि छोटे-छोटे विवादों को धर्म से जोड़ना समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दो व्यक्तियों के बीच बाइक की टक्कर को हिंदू-मुस्लिम विवाद का रूप देना गलत है। 2027 में योगी आदित्यनाथ को सत्ता से हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसके लिए लड़ाई लड़ रही है। सांसद ने उद्योगपतियों की कर्जमाफी को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि आम आदमी और किसान की छोटी ईएमआई रुकने पर रिकवरी शुरू हो जाती है, जबकि बड़े उद्योगपतियों के हजारों करोड़ रुपये के मामलों में अलग रवैया अपनाया जाता है। पढ़िए…इमरान मसूद ने क्या कहा? सवाल-मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि जो हिंदू ये सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं है। आप उनके इस बयान को कैसे देखते हैं? जवाब-आपको नहीं लगता, ऐसा होता है और दिखाई देता है। समाज के अंदर जो नफरत है, उस नफरत को मिटाने की बात राहुल गांधी कर रहे हैं। मोहन भागवत जी मुस्लिमों को लेकर बाहर जाकर प्रेम की बात कर रहे हैं, लेकिन जो बात वह बोलते हैं, वही अपने लोगों को भी सिखाएं। सवाल-आप कहना चाहते हैं कि भागवत को अपने संगठन और विचारधारा से जुड़े लोगों को भी यही संदेश देना चाहिए? जवाब-बिल्कुल। मैं यही कह रहा हूं कि मोहन भागवत जी इनको पाठ पढ़ाएं। जो बात भागवत जी न्यूयॉर्क में पढ़ा रहे हैं, वही अपने शिष्यों को भी पढ़ाएं। जो यहां बैठकर नफरत बांट रहे हैं, उन्हें भी समझाएं कि नफरत से समाज नहीं चलता। सवाल-उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के मुल्लावादी सोच के बयान पर क्या कहेंगे? जवाब-जो धामी ने बयान दिया है, उसको लेकर मैं यही कह रहा हूं कि आज ये धामी हों या दूसरे लोग, इनको भी तो मोहन भागवत जी सिखाते हैं। मोहन भागवत जी इनको पाठ पढ़ा दें। ये 24 घंटे नफरत बोलते हैं। सवाल-क्या आप धामी के बयान को नफरत की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं? जवाब-मैं इस तरह के बयानों का समर्थन नहीं करता हूं। शहर को बचाने की बात करनी चाहिए। नफरत मत बोइए। इस नफरत से वो चुनावी जीत जाएंगे? समाज को जोड़ने की जरूरत है, तोड़ने की नहीं। सवाल-लेकिन धामी का कहना है कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती होगी? जवाब-कानून अपना काम करें। सहारनपुर में दो व्यक्तियों के झगड़े को हिंदू-मुसलमान बना देना गलत है। घटना क्या थी, पहले उसे देखना चाहिए। दो लड़कों का झगड़ा था, बाइकों की टक्कर हुई थी और झगड़ा हो गया। उसे हिंदू-मुसलमान कर दिया गया। एक भाजपा विधायक ने उसे हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की है। एकपक्षीय कार्रवाई हुई है। सवाल-भागवत के बयान और जमीन पर नेताओं के बयानों में अंतर है? जवाब-मैं कह रहा हूं कि भागवत जी को अपने लोगों को भी वही पाठ पढ़ाना चाहिए जो वह बाहर जाकर पढ़ा रहे हैं। अगर मुस्लिमों के प्रति प्रेम और भाईचारे की बात हो रही है तो अपने लोगों को भी यही सिखाएं। उनके लोग केवल नफरत और नफरत बोलते हैं। सवाल-क्या ऐसे बयानों से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश होती है? जवाब-उनकी दुकान इन्हीं बयानों पर चलती है। मैं कह रहा हूं कि भागवत जी को इनको पाठ पढ़ाना चाहिए। नफरत मत बोइए। इससे समाज का माहौल खराब होता है। सवाल-2027 में योगी आदित्यनाथ को सत्ता से हटाने का दावा कांग्रेस करती है। क्या कांग्रेस इसके लिए जमीन पर लड़ाई लड़ रही है? जवाब-हम लोग लड़ाई लड़ रहे हैं, भैया। नहीं, लड़ाई लड़ रहे हैं हम लोग। जनता के मुद्दों को लेकर लड़ाई जारी है। हम अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। जनता सब देख रही है। नफरत के बजाय जनता के मुद्दों पर बात होनी चाहिए। सवाल-एक उद्योगपति का 22 हजार करोड़ का सेटलमेंट हुआ है, क्या कहेंगे? जवाब-एक उद्योगपति का 22 हजार करोड़ रुपए माफ हो गया। आपकी 6,500 रुपए की एक EMI रुक जाए तो अमीन साहब आपके घर पर आ जाएंगे, कुर्की करने के लिए। किसी किसान की एक EMI रुक जाए तो उसका ट्रैक्टर खींचकर ले जाएंगे। सवाल-क्या आपको लगता है कि आम आदमी और बड़े उद्योगपतियों के लिए अलग-अलग नियम हैं? जवाब-तहसील के अंदर कोई रिकवरी दो-चार करोड़ रुपए की होगी, इससे ऊपर की रिकवरी नहीं मिलने की आपको। ये हजारों-हजारों करोड़ की रिकवरी है। 22,500 करोड़ को 6.5 करोड़ में निपटाकर खत्म कर दिया गया। ये इस देश में संभव है। मोदी जी के राज में ये संभव है। अंबानी का भी हुआ है। 16 लाख 50 हजार करोड़ रुपये उद्योगपतियों के माफ किए गए हैं। एक-दो रुपए की बात नहीं है।

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