Kavita Suicide Case | Sisters Perform Funeral After Delay, Rakhi Mourning

वाराणसी2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मां-रक्षाबंधन खोकर नहीं थम रहे 11 बहनों के आंसू :::::: खुदखुशी करने वाली कविता का अंतिम संस्कार, 2 दिन बाद भी नहीं मिला रास्ता

सैकड़ों कलाइयां सूनी और आंखों को रास्ते का इंतजार, 50 घंटे बाद कविता का अंतिम संस्कार

वाराणसी में रास्ता खुलवाने के लिए दो साल संघर्ष के बाद आत्महत्या करने वाली कविता उपाध्याय का 48 घंटे बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। 25 घंटे दरवाजे पर शव पड़े रहने के बाद अगले दिन शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया।

देर रात परिजन शव मणिकर्णिका गंगाघाट लेकर गए, जहां पुलिस की मौजूदगी में 50 घंटे बाद मृतका को बेटे ने मुखाग्नि दी। रक्षाबंधन को अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने कविता उपाध्याय के साथ वर्षों के लिए त्योहार भी खो दिया।

परिवार में सैकड़ों कलाइयां अनिश्चित काल के लिए सूनी रह गई, वही अहरक खास गांव की तमाम आंखों को अब रास्ते का इंतजार है। आधे गांव में सिर्फ सन्नाटा और बहनों की सिसकियां गूंज रही हैं। मृतका के परिजनों द्वारा पड़ोसी ऋषि उपाध्याय के खिलाफ तहरीर दी गई है।

तस्वीरों में देखिए गांव और घटनास्थल…

ये महज दो फीट की गली है, जो दूसरे की जमीन से कविता के घर जाने का वैकल्पिक रास्ता है।

ये महज दो फीट की गली है, जो दूसरे की जमीन से कविता के घर जाने का वैकल्पिक रास्ता है।

एसडीएम पिंडरा कुंदन राज कपूर ने परिजनों से विवाद के संबंध में जानकारी ली।

एसडीएम पिंडरा कुंदन राज कपूर ने परिजनों से विवाद के संबंध में जानकारी ली।

अब जानिए घटना…

कविता उपाध्याय का घर वाराणसी में पिंडरा तहसील इलाके के अहरक खास गांव में है। बुधवार शाम करीब 7 बजे उन्होंने टॉयलेट में फांसी लगा ली। जब बेटे विशाल ने टॉयलेट का दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही, तो परिजन ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे रास्ते पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। जब रास्ता ही नहीं है, तो शव किस रास्ते से लेकर जाएंगे? पहले विवाद का निपटारा हो, उसके बाद ही शव को पोस्टमॉर्टम या अंतिम संस्कार के लिए ले जाने देंगे।”

अफसरों ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया। कार्रवाई के साथ रास्ता दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तैयार हुए और अगले 50 घंटे बाद कविता का अंतिम संस्कार हो सका।

अब विवाद भी समझ लीजिए

अहरक में संतोष उपाध्याय का मकान है। संतोष दिल्ली में रहकर नौकरी करते हैं। पिता लक्ष्मी नारायण उपाध्याय का काफी पहले निधन हो चुका है। बेटा विशाल MA की पढ़ाई कर रहा है। विशाल ने बताया कि घर से बाहर 6 फीट चौड़ी सरकारी जमीन थी।

इसी से हमारा आना-जाना होता था। 2 साल पहले मनीष और अमित उपाध्याय के परिजनों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। चारों तरफ दीवार खड़ी कर दी। इसके बाद हमारा रास्ता बंद हो गया।

पड़ोसी के खिलाफ परिजनों ने दी तहरीर

मृतका के परिजनों द्वारा पड़ोसी ऋषि उपाध्याय के खिलाफ तहरीर दी गई है। परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया है कि यदि उनके द्वारा उत्पीड़न नहीं किया जाता और रास्ता बंद नहीं किया जाता तो कविता उपाध्याय आत्महत्या नहीं की होती। इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों की तरफ से तहरीर मिली है, जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सन्नाटा और बहनों की सिसकियां

वाराणसी की पिंडरा तहसील के अहरक खास गांव में कविता उपाध्याय (50) की मौत के बाद सिर्फ सन्नाटा और बहनों की सिसकियां गूंज रही हैं। ​मृतका के पति चार भाई हैं और सभी लोग रास्ते की परेशानी से जूझ रहे हैं।

चारो भाइयों की कुल मिलाकर परिवार में 11 बेटियां हैं। घटना ने सीमा, अर्चना, सपना, प्रिया, जया, निक्की, राधिका, रिमझिम, स्वीटी, रिया और श्रेया से रक्षाबंधन का पर्व हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया है।

बता दें कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार किसी पर्व पर परिवार के सदस्य के असमय चले जाने से उस परिवार में पर्व को तबतक नहीं मनाया जाता जबतक उसी त्योहार पर किसी नए सदस्य का जन्म न हो।

बेटियां बोलीं- मां ना लौटेगी ना त्योहार

​मृतका की बेटी स्वीटी उपाध्याय ने बताया कि ‘हमारा रक्षाबंधन तो अब हमेशा के लिए छीन गया। न माँ वापस आ सकती हैं, न हमारा त्योहार लौटेगा। हमारी सरकार से बस इतनी ही गुहार है कि हमें हमारे घर आने-जाने का रास्ता दिलवा दिया जाए, ताकि मां की आत्मा को शांति मिले।’

मौत के तीसरे दिन किया गया अंतिम संस्कार

घटना के बाद परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया कि घर के सामने का करीब 6 फीट का रास्ता दीवार बनाकर बंद कर दिया गया है। परिवार के पास निकलने के लिए महज दो फीट की बेहद संकरी गली बची है। कविता उपाध्याय की आत्महत्या के बाद परिजन रास्ता खोलने की मांग को लेकर 24 घंटे तक शव दरवाजे पर रखकर अड़े रहे।

अंत में शव से दुर्गंध आने लगी तो परिजन अधिकारियों के समझाने और आश्वासन के बाद गुरुवार शाम 7 बजे शव को उसी दो फीट के रास्ते से निकाला गया। उसके बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शव परिजनों को मिला तो परिजन सीधे मणिकर्णिका घाट पर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।

एसडीएम पिंडरा कुंदन राज कपूर ने परिजनों को भरोसा दिलाया है कि तहसीलदार कोर्ट में चल रहे इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक से कराई जाएगी। दस्तावेजों की जांच कर सुखाचार अधिनियम के तहत न्यायसंगत समाधान निकाला जाएगा।

———————

ये खबर भी पढ़ें…

वाराणसी में महिला ने सुसाइड किया, बेटा बोला-लाश नहीं उठाएंगे:रास्ते की विवाद की DM-SDM से 100 बार शिकायत की, अब न्याय चाहिए

वाराणसी में रास्ते के विवाद से परेशान एक 50 साल की महिला ने टॉयलेट में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। जब बेटे ने शौचालय जाने के लिए दरवाजा खोला, तो मां फंदे से लटकती मिली। उसने चिल्लाकर परिवार के लोगों को बुलाया। पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। पढ़ें पूरी खबर…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Newsmatic - News WordPress Theme 2026. Powered By BlazeThemes.