सहारनपुर में सांसद इमरान मसूद ने बहन से बंधवाई राखी:रक्षाबंधन पर जेल की चारदीवारी से जनकपुरी तक दिखा भाई-बहन के प्यार का रंग


सहारनपुर में भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और अपनत्व का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को सहारनपुर में अलग-अलग रंगों में नजर आया। कहीं धर्म और जाति की सीमाओं से परे भाई-बहन के रिश्ते की मिसाल देखने को मिली तो कहीं जेल की चारदीवारी के बीच बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर रिश्ते की डोर को मजबूत किया। जनकपुरी में सांसद इमरान मसूद और उनकी पत्नी सायमा मसूद अपनी मुंह बोली बहन पूजा भाटिया के घर पहुंचे। वहीं जिला कारागार में बड़ी संख्या में बहनें बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। 30 साल से निभा रहे भाई-बहन का रिश्ता रक्षाबंधन के अवसर पर सांसद इमरान मसूद पत्नी सायमा मसूद के साथ जनकपुरी स्थित अपनी मुंह बोली बहन पूजा भाटिया के आवास पर पहुंचे। पूजा भाटिया ने सांसद की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना की। इमरान मसूद ने बताया कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से पूजा भाटिया से राखी बंधवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाई-बहन के रिश्ते में धर्म और जाति नहीं देखी जाती, बल्कि यह रिश्ता प्रेम, विश्वास और अपनत्व से जुड़ा होता है। रक्षाबंधन समाज में भाईचारे, सौहार्द और आपसी प्रेम का संदेश देने वाला सुंदर पर्व है। पूजा भाटिया ने कहा कि इमरान मसूद पिछले 30 वर्षों से भाई होने का रिश्ता बखूबी निभा रहे हैं। ऐसा कोई रक्षाबंधन या भाई दूज नहीं हुआ, जब इमरान भाई उनसे मिलने और त्योहार मनाने नहीं पहुंचे हों। इस दौरान दोनों के बीच भाई-बहन के स्नेह और अपनत्व की तस्वीर देखने को मिली। इमरान मसूद ने कहा कि रक्षाबंधन सुरक्षा, सम्मान और विश्वास का पवित्र बंधन है। यह पर्व समाज को आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के साथ जोड़ने का संदेश देता है। जेल में भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र उधर, रक्षाबंधन पर जिला कारागार में भी भावनाओं का अनोखा रंग देखने को मिला। जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने के लिए बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं। खुली मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी सलामती की कामना की। राखी बांधते समय कई बहनें और भाई भावुक नजर आए। बहनों की संख्या को देखते हुए जेल प्रशासन ने मुलाकात के लिए विशेष इंतजाम किए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दो शिफ्ट में मुलाकात कराई जा रही है। जिन बहनों के पास राखी और मिठाई नहीं थी, उनके लिए जेल प्रशासन की ओर से ही व्यवस्था की गई। जेल परिसर में बहनों को राखी, रोली, अक्षत और लड्डू उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा पेयजल और बैठने की भी व्यवस्था की गई, ताकि दूर-दराज से पहुंचीं बहनों को किसी तरह की परेशानी न हो। रक्षाबंधन पर एक ओर जहां जनकपुरी में तीन दशक पुराने मुंह बोले भाई-बहन के रिश्ते की मिसाल सामने आई, वहीं दूसरी ओर जेल की चारदीवारी के भीतर बहनों का अपने भाइयों के प्रति प्रेम और विश्वास दिखाई दिया। दोनों ही जगहों पर रक्षाबंधन ने यही संदेश दिया कि रिश्ते खून के हों या अपनत्व से बने हों, प्रेम और विश्वास की डोर उन्हें मजबूत बनाए रखती है।

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