कौशांबी के संदीपन घाट पर श्रावणी उपाकर्म संपन्न:छह दशक पुरानी परंपरा में ब्राह्मण समाज ने किया सप्तर्षि पूजन


कौशांबी के संदीपन घाट पर शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म पर्व मनाया गया। इस अवसर पर गंगा तट वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से गूंज उठा। जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों ब्राह्मणों ने गंगा में स्नान कर करीब छह दशक पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से सप्तर्षियों का पूजन किया। इसके बाद यज्ञोपवीत का पूजन-अर्चन कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। वैदिक मंत्रों की गूंज से संदीपन घाट का वातावरण भक्तिमय हो गया। छह दशक पहले शुरू हुई थी परंपरा
कार्यक्रम का आयोजन आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, भरवारी के पूर्व प्राचार्य आचार्य पं. मुरलीधर मिश्र की अध्यक्षता, मार्गदर्शन और संचालन में हुआ। उन्होंने बताया कि संदीपन घाट पर श्रावणी उपाकर्म की परंपरा करीब छह दशक पुरानी है। इसकी शुरुआत आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, भरवारी के तत्कालीन प्रधानाचार्य आचार्य पं. रमाकांत शुक्ल ने की थी। समय के साथ यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन गया है। आचार्य रमाकांत शुक्ल के निधन के बाद भी जारी है आयोजन
आचार्य पं. रमाकांत शुक्ल के निधन के बाद उनके पुत्र दिनेश कुमार गर्ग, सेवानिवृत्त उपनिदेशक, सूचना विभाग की प्रेरणा से यह आयोजन हर वर्ष लगातार होता आ रहा है। उनकी प्रेरणा से सैकड़ों द्विज समाज के लोग प्रतिवर्ष संदीपन घाट पहुंचकर इस वैदिक परंपरा में शामिल होते हैं। नई पीढ़ी को वैदिक संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
आयोजकों ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के माध्यम से नई पीढ़ी को वैदिक संस्कारों और सनातन परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे ऋषि परंपरा, वैदिक संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था का प्रतीक बताया। गणमान्य लोगों ने भी की सहभागिता
कार्यक्रम में एडवोकेट राम प्रकाश मिश्रा, विष्णु मिश्रा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर वैदिक परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *