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उन्नाव के बीघापुर कोतवाली क्षेत्र के छुलिहा रानीपुर गांव में लगातार बारिश के बीच कच्ची दीवार पर रखा छप्पर अचानक ढह गया। हादसे में उसके नीचे बैठे 20 वर्षीय वीरेंद्र पासवान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल उसके 60 वर्षीय दादा रघुवीर ने गुरुवार देर रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में छप्पर के नीचे बंधी पांच बकरियों की भी मौत हो गई। हादसा गुरुवार शाम करीब 6 बजे हुआ। रघुवीर अपने नाती वीरेंद्र के साथ कच्ची दीवार पर रखे छप्पर के नीचे बैठे थे। लगातार बारिश के कारण दीवार कमजोर हो चुकी थी। अचानक दीवार भरभराकर गिर गई और छप्पर समेत दोनों उसके नीचे दब गए। आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। ग्रामीण दोनों को सौ बेड अस्पताल बीघापुर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। रघुवीर की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया था। देर रात इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। एक ही परिवार में दादा-पोते की मौत से गांव में मातम पसरा है। शुक्रवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। बारिश के बीच भरभराकर गिरी कच्ची दीवार गुरुवार शाम रघुवीर अपने 20 वर्षीय नाती वीरेंद्र के साथ छप्पर के नीचे बैठे थे। पास में परिवार की पांच बकरियां भी बंधी थीं। बारिश के कारण कच्ची दीवार कमजोर हो गई थी। अचानक दीवार गिरने से छप्पर भी नीचे आ गया और दोनों उसके मलबे में दब गए। दीवार गिरने की आवाज सुनकर पड़ोसी और ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। पहले पोते ने दम तोड़ा, देर रात दादा की भी मौत अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल रघुवीर को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। वहां देर रात उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक वीरेंद्र गांव में रहकर खेती के काम में अपने पिता भोले शंकर का हाथ बंटाता था। उसकी मौत से परिवार ने अपना एक सहारा खो दिया। वीरेंद्र के पिता भोले शंकर और मां शांति देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे में 5 बकरियां भी मरीं, परिवार को दोहरा नुकसान छप्पर के नीचे बंधी पांच बकरियां भी मलबे में दब गईं और उनकी मौत हो गई। बकरियां परिवार की आय का जरिया थीं। दादा-पोते की मौत के साथ पशुधन के नुकसान ने परिवार की आर्थिक परेशानी भी बढ़ा दी है। हादसे की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन से मदद की मांग की है। ग्रामीणों ने उठाए आवास योजना पर सवाल हादसे के बाद ग्रामीणों ने परिवार की आवासीय स्थिति को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक भोले शंकर पासवान का परिवार लंबे समय से कच्ची दीवारों पर रखे छप्पर के नीचे रहने को मजबूर था। आरोप है कि करीब एक दशक से परिवार को आवासीय योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक मकान नहीं मिल सका। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते परिवार को पक्का मकान मिल गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि महानंद ने बताया कि भोले शंकर और उनके भाई का नाम आवास की सूची में है। धनराशि आने के बाद आवास का निर्माण कराया जाएगा। लेखपाल राज किशोर ने बताया कि हादसे के बाद मौके पर पहुंचकर जांच की गई थी। पहले वीरेंद्र और पांच बकरियों की मौत की रिपोर्ट तैयार कर तहसील मुख्यालय भेजी गई थी। अब रघुवीर की मौत की जानकारी भी अधिकारियों को दी जा रही है। कोतवाल अरविंद कुमार कटियार ने बताया कि दोनों शवों का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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उन्नाव में बारिश में छप्पर गिरने से दादा-पोते की मौत:5 बकरियां भी मरीं, आज होगा दोनों शवों का पोस्टमार्टम