जमीन में नहीं, केमिकल से पैदा हो रहा नया आलू:4 गुना कमाई के लिए जान से खिलवाड़, वीडियो में देखिए कैसे बनता है 'जहरीला' आलू


यूपी में एक साल में 75 टन नया आलू खाद्य विभाग ने पकड़ा। यह आलू जमीन में नहीं, केमिकल से तैयार किया था। यानी आलू तो पुराना था, लेकिन उसे इस तरह प्रोसेस किया कि वह बिल्कुल नए की तरह दिखने लगे। सीजन की शुरुआत में बाजार में नए आलू का भाव चार गुना ज्यादा होता है। यानी पुराना आलू 20 रुपए किलो है तो नया 80 रुपए किलो। बस इसी मुनाफे के लिए पश्चिमी यूपी में बड़ा गिरोह खड़ा हो गया। यह आलू सेहत के लिए खतरनाक है। दैनिक भास्कर की टीम ने इस गिरोह को एक्सपोज करने के लिए इन्वेस्टिगेशन किया। टीम ने उन स्थानों पर जाकर पता किया और खुफिया कैमरे से इस जानलेवा आलू को कैसे बनाया जाता है, रिकॉर्ड किया। भास्कर रिपोर्टर आलू का बड़ा कारोबारी बनकर संभल, बहजोई, चंदौसी के कोल्ड स्टोरेज पहुंचा। क्योंकि पश्चिमी यूपी के इन इलाकों में आलू की भरपूर पैदावार होती है और यहीं जहरीला नया आलू भी सबसे ज्यादा बनता है। सबसे पहले 4 स्टेप में जानिए, पुराने आलू को नया कैसे बनाया जाता है… स्टेप 1. कोल्ड स्टोरेज में रखा 8-10 महीने पुराना आलू बाहर निकालकर एक-दो दिन सुखाते हैं। इससे आलू की नमी कम हो जाती है। स्टेप 2. आलू पर मिट्‌टी लगाते हैं, ताकि ऐसा लगे कि ये कुछ दिन पहले ही खेत से निकलकर आया है। इस मिट्‌टी में सेलखड़ी पाउडर, कत्था मिला होता है, जो आलू की परत पर चिपक जाता है। स्टेप 3. इसमें मिलाई जाने वाले मिट्‌टी 3 तरह के रंग की होती है- पीली, काली या लाल। यह इसलिए क्योंकि आलू की खेती पीली, काली या लाल मिट्‌टी में होती है। जैसे- लखनऊ में लाल मिट्‌टी का आलू आता है तो यहां ऐसा ही आलू बनाकर भेजते हैं। बुंदेलखंड में काली मिट्‌टी और दिल्ली में पीली मिट्‌टी का आलू भेजते हैं। स्टेप 4. नए आलू में छिलका थोड़ा निकला हुआ होता है। इसके लिए मिट्‌टी लगाने के बाद आलू पर अमोनिया (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड-NH3) का छिड़काव करते हैं। इससे मिट्‌टी लगे आलू में गीलापन आ जाता है और छिलके उतरने लगते हैं। पुराने से नया आलू बनाने की यह प्रोसेस 8 से 10 घंटे में पूरी हो जाती है। अब हम बताते हैं यह गिरोह कैसे काम करता है हमारी टीम सबसे पहले मेरठ से 170 किमी दूर संभल-बहजोई हाईवे के कोल्ड स्टोरेज पहुंची। ये कांग्रेस नेता मुशीर खां तरीन का है। यहां मुनीम अबरार खां ने जहरीला नया आलू बनाने से लेकर सप्लाई तक का खुलासा किया – रिपोर्टर : आलू चाहिए। मैं बड़ा आढ़त का काम करता हूं। लखनऊ की सभी मंडियों में आलू की सप्लाई हैं। अबरार : वही आलू चाहिए ना, जो कलर लगाकर आता है? (वहां फैले आलू दिखाते हुए) ये कलर लग रहा है, देखा तुमने? जैसा चाहोगे, वैसा आलू मिल जाएगा। रिपोर्टर : बिल्कुल फ्रेश और नया दिखने वाला आलू चाहिए। अबरार : हां जी, राजस्थान की मिट्‌टी होती है। उसमें सेलखड़ी पाउडर (हाइड्रेटेड मैग्नीशियम सिलिकेट का मिश्रण) मिलाते हैं। इसके बाद अमोनिया का छिड़काव करते हैं। आलू में चमक आ जाती है। आप कहोगे तो पीला या लाल मिट्‌टी का आलू तैयार कर देंगे। रिपोर्टर : हमें पहाड़ी लाल आलू चाहिए। मेरे क्षेत्र में लाल आलू बिकता है। अबरार : ठीक है, लाल आलू बनाकर दे देंगे। रिपोर्टर : आप ये माल कहां-कहां भेजते हो? अबरार : दिल्ली में ओखला, गाजीपुर और आजादपुर। इसके बाद अबरार हमें वहां लेकर जाता है, जहां पुराने आलू पर मिट्‌टी और केमिकल लगाकर नया बना रहे थे। रिपोर्टर : नया आलू बनाकर दिखाओ? अबरार : (आलू पर मिट्‌टी लपेटकर) ये देखो, ऐसा हो जाएगा पुराना आलू। लगेगा कि खेत से आया है। अगले दिन हम संभल से 50 किलोमीटर दूर गुन्नौर के DL कोल्ड स्टोरेज पहुंचे। यहां आलू पर पीली मिट्‌टी लगाकर नकली नया आलू बना रहे थे। यहां हमारी मुलाकात स्टोरेज के मैनेजर महेंद्र पाल से हुई – रिपोर्टर : क्या रेट चल रहा है? महेंद्र पाल : एक बोरी (50 किलो) आलू 600 रुपए में दिल्ली पहुंचा देते हैं। सीजन में 30-35 रुपए किलो फुटकर में बिकता है। सीजन से पहले 80 रुपए किलो तक बिक जाएगा। रिपोर्टर : लखनऊ पहुंचाने पर क्या रेट लेंगे? महेंद्र पाल : 1200 रुपए क्विंटल पड़ेगा। इसके बाद हम वहां पहुंचे, जहां पुराने आलू को नया बनाया जा रहा था। यहां हमने मजदूरों से बातचीत की – रिपोर्टर : इस आलू पर मिट्‌टी तो सिर्फ ऊपर लगी है। ये पूरे आलू में कैसे फैलेगी? महिला मजदूर : आलू को जब बोरी में भरेंगे तो वो इधर-उधर होगा। तब मिट्‌टी चारों ओर मिल जाएगा। (इसके बाद मजदूर ने मिट्‌टी लगे आलू बोरी में भरकर दिखाया और बताया कि कैसे मिट्‌टी पूरे आलू में फैल जाती है) महेंद्र पाल : आपको लाल मिट्‌टी वाला आलू देंगे, जो बिल्कुल नया दिखेगा। तीसरे दिन हम संभल-चंदौसी रोड के हाजी कमाली कोल्ड स्टोरेज पहुंचे। यहां आलू पर कलर करने का काम चल रहा था। हमारी मुलाकात स्टोरेज के मैनेजर हनीफ खान से हुई- हनीफ : ये देखिए, आलू पर चढ़ाने के लिए मिट्‌टी तैयार कर रहे हैं। रिपोर्टर : कैसे चढ़ाते हैं? हनीफ : जैसे ये आलू है, इसको मिट्‌टी में लपेट दिया। अब ये पूरी मिट्‌टी इस पर चढ़ जाती है, जो धोने पर ही छूटेगी। रिपोर्टर : ये मिट्टी हटेगी नहीं आलू से। बोरी में भरने के बाद भी नहीं हटेगी? हनीफ : नहीं हटेगी, जो एक बार लग गई, उसे कितना भी झाड़ लो, नहीं हटेगी। रिपोर्टर : इस मिट्‌टी में क्या-क्या मिलाया जाता है? हनीफ : इसमें 3 तरह की मिट्‌टी है। पहली- जर्मनी मिट्‌टी। दूसरी कत्थे वाली मिट्‌टी और तीसरी राजस्थानी मिट्‌टी। रिपोर्टर : इस मिट्‌टी को आलू पर कैसे डालेंगे? हनीफ : (मिट्‌टी को आलू पर फेंककर बताते हुए) ये मिट्‌टी लगने के बाद छूटेगी नहीं। नकली नए आलू के मुनाफाखोर ऐसे उठाते हैं सीजन का फायदा फर्रुखाबाद, कन्नौज, आगरा, मैनपुरी, हाथरस का नया आलू नवंबर में आना शुरू होता है। दिसंबर तक पूरे यूपी का नया आलू बाजार में आ जाता है। मुनाफाखोरी करने वाले सितंबर में ही नकली नया आलू बाजार में ले आते हैं। इसे यह कहकर बेचा जाता है कि कुछ किसानों ने आलू की पैदावार जल्द कर दी थी, इसलिए ये जल्दी आ गया। इसलिए ये महंगे दामों पर बिक जाता है। 3 साल में तेजी से बढ़ा ट्रेंड यूपी में नकली नए आलू का ट्रेंड 3 साल में तेजी से बढ़ा है। अफसरों ने 2022 में गोरखपुर में ढाई क्विंटल नकली नया आलू पकड़ा। जबकि 2025 में यूपी में 750 क्विंटल आलू पकड़ाया है। पिछले 3-4 साल में ये कारोबार इतना बड़ा हो गया कि पश्चिमी यूपी के 20 से ज्यादा जिलों के कोल्ड स्टोरेज में खुलेआम नया आलू बना रहे हैं। इसकी सप्लाई यूपी सहित दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड तक की जा रही है। एक्सपर्ट बोले- अमोनिया मिले आलू से किडनी खराब होने का खतरा लखनऊ के गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. मृदुल मेहरोत्रा ने बताया- आलू के साथ यदि अमोनिया खाते हैं तो इससे शरीर का अम्ल-क्षार संतुलन बिगड़ जाता है। इससे किडनी की क्षमता प्रभावित होती है। लीवर अमोनिया को यूरिया में बदलता है। ज्यादा मात्रा में शरीर में यूरिया एकत्र होने पर नर्वस सिस्टम डैमेज हो सकता है। प्रदेश स्तरीय टीम बनाकर छापेमारी कराएंगे- विनीत कुमार इस मामले में खाद्य सुरक्षा विभाग लखनऊ के सहायक आयुक्त विनीत कुमार ने कहा- जहां भी ऐसी जानकारी मिलती है, जिला और प्रदेश स्तरीय टीम छापेमारी करती हैं। रूटीन में भी जिला, मंडल और प्रदेश स्तर की टीम कार्रवाई करती हैं। सैंपलिंग करके जांच कराई जाती है और संबंधित के ऊपर कार्रवाई होती है। यदि कहीं कोई शिकायत है तो कार्रवाई करेंगे। ——— ये भास्कर इन्वेस्टिगेशन पढ़ें – यूपी में सांप से जीभ पर डसवाकर हो रहा नशा:70 हजार रेट, सपेरे बोले- जहर इतना कम कर देंगे कि नशा होगा, मौत नहीं फेमस यूट्यूबर एल्विश यादव पर नोएडा की पार्टियों में नशे के लिए सांप के जहर के इस्तेमाल का आरोप लगा। सवाल उठा कि क्या यूपी में स्नेक बाइट यानी सांप के जहर का नशा किया जा रहा? अगर हां, तो लोग इस जानलेवा नशे की तरफ क्यों जा रहे? इसका नेटवर्क कितना बड़ा है? दैनिक भास्कर ने नशे के इस कारोबार और बढ़ते ट्रेंड को एक्सपोज करने के लिए इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। पढ़िए पूरी खबर…

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