कानपुर आरटीओ के बाबू और सीनियर क्लर्क सस्पेंड:विभाग में टप्पेबाजी भी होती थी, वाहन बेचने के बहाने लोगों को फंसाने वाला अरेस्ट


कानपुर आरटीओ में छापेमारी के बाद शासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अपर परिवहन आयुक्त चित्रलेखा सिंह के आदेश पर भ्रष्टाचार में लिप्त सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा व बाबू विपिन कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। छापेमारी के बाद अब कानपुर आरटीओ की लगातार शिकायतें आने लगी है। गुरुवार को एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके के पास दो शिकायतें आई, जिसमें सामने आया कि कानपुर आरटीओ ऑफिस में सिर्फ कमीशनखोरी ही नहीं जमकर टप्पेबाजी भी हो रही थी। शातिर OLX जैसी साइटों में वाहन बेचने का विज्ञापन चला कर लोगों को फंसाते थे, फिर आरटीओ कार्यालय में एजेंटों के साथ मिलकर ग्राहक से एडवांस पेमेंट लेकर कागजी कार्रवाई की बात कह पीड़ित को अंदर ले जाते। इसके बाद शातिर वाहन और रुपये लेकर चंपत हो जाते। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। OLX पर स्कूटी का विज्ञापन दिया था एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि ग्वालटोली निवासी मो. इकराम ने शिकायत करते हुए बताया कि 8 अगस्त को OLX पर स्कूटी का विज्ञापन देखा था। जिसके बाद उन्होंने उस पोस्ट में दिए गए मोबाइल नंबर पर बातचीत कर 25 हजार रुपये में सौदा तय किया था। बेचने वाले ने बताया कि स्कूटी पर 15 हजार रुपये चालान है। उसने कहा कि आरटीओ कार्यालय चलकर चालान भी खत्म करा देंगे, साथ ही स्कूटी भी नाम कर देगें। बीते सोमवार को इकराम आरटीओ कार्यालय पहुंचे तो आरोप है कि वहां बारा सिरोही निवासी रेपिडो चालक आशीष वर्मा मिला। उसने आरटीओ दफ्तर के बाहर खड़े दो एजेंटों से मिलवाया। साथ ही उनके द्वारा सभी काम कुछ मिनटों में करा देने की बात कही। हनुमंत विहार निवासी युवक से ठगे 15 हजार इसपर उसे 25 हजार रुपये एडवांस और 15 हजार रुपये चालान जमा करने के लिए दे दिए। आशीष एजेंटों के साथ आरटीओ कार्यालय के अंदर ले गया, इसके बाद मौका पाकर फरार हो गया। बाहर निकले तो स्कूटी भी गायब मिली। एडीसीपी ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी की तलाश की जा रही थी। गुरुवार को आरोपी आशीष को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने इसी तरह हनुमंत विहार के यश सविता से 15 हजार रुपये ठगने की बात स्वीकार की है। पुलिस फरार एजेंटों की तलाश कर रही है। सर्वोदय नगर चौकी प्रभारी ने दर्ज कराया था मुकदमा वहीं बीते सोमवार को दोपहर करीब 1:30 बजे एसडीएम सदर अनुभव सिंह और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके की संयुक्त टीम ने आरटीओ में छापेमारी की थी। पुलिस टीम ने आरटीओ परिसर के दोनों गेट बंद कर छापेमारी अभियान शुरू की। पुलिसकर्मियों ने दौड़ा–दौड़ाकर परिसर में मौजूद 22 एजेंटों को पकड़ा था। तकरीबन 3 घंटे तक चली छापेमारी के बाद पुलिस टीम सभी 22 संदिग्धों को काकादेव थाने लेकर पहुंची थी, जिसके बाद सर्वोदय नगर चौकी प्रभारी डालचंद्र की तहरीर पर बाबू विपिन कुमार, सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। बाबू विपिन कुमार और मधुर मिश्रा के पास छापेमारी में क्रमश: 7.50 हजार व 15 हजार रुपए कम मिले थे। साथ ही रफ पेपर पर राजस्व की लिखा–पढ़ी की गई थी। बुधवार को मामले की रिपोर्ट डीएम और पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई। गुरुवार को शासन ने मामले को संज्ञान में लिया। जिसके बाद दोनों कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। कैश और चालान के रिकॉर्ड पर उठे सवाल जांच के दौरान कैश काउंटर, चालान और रसीदों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। एक काउंटर पर वसूली की रकम और रसीदों का मिलान कराया गया तो दूसरे स्थान पर मिले अतिरिक्त कैश का हिसाब मांगा गया। कर्मचारियों से रजिस्टर, दस्तावेज और नकदी का स्पष्ट विवरण लिया गया। किसी से रजिस्टर मांगा गया तो किसी से नकदी का हिसाब। कई घंटे तक दस्तावेजों और रकम का मिलान चलता रहा। इसी प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों ने मामले को गंभीर बना दिया और प्राथमिकी की कार्रवाई तक पहुंचाया।

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