ईद मिलादुन्नबी पर दुल्हन की तरह सजा बरेली शहर:ओल्ड सिटी की गलियां, बाजार और मस्जिदें रोशनी से जगमगाईं, बच्चों ने नए कपड़ों में मनाया जश्न


बरेली में बारावफात (ईद मिलादुन्नबी) से पहले ही पूरा शहर रोशनी से नहा उठा है। ओल्ड सिटी के हर घर, गली, बाजार और मस्जिद को खूबसूरत झालरों, झूमरों और आकर्षक लाइटों से दुल्हन की तरह सजाया गया है। खासतौर पर सूफी टोला और सैलानी जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में ऐसी जगमगाहट है कि रात में भी दिन जैसा नजारा दिखाई दे रहा है। छोटे-छोटे बच्चे पारंपरिक नए परिधानों और पगड़ी-टोपी में सज-धजकर बेहद उत्साह के साथ इस पर्व का जश्न मना रहे हैं। साल भर रहता है इस दिन का बेसब्री से इंतजार
सूफी टोला में बारावफात को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें इस मुबारक दिन का इंतजार पूरे साल रहता है। जैसे ही यह दिन करीब आता है, कई दिन पहले से ही मोहल्ले की गलियों, मस्जिदों और घरों को सजाने की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। स्थानीय लोगों ने साझा की अपनी खुशी
दैनिक भास्कर की टीम ने सूफी टोला के धोबियों वाली गली में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की:
रजी अहमद ने कहा, “माशाल्लाह बहुत अच्छा माहौल है। सजावट और जुलूस वगैरह सब बहुत खुशी के साथ निकाले और मनाए जाते हैं। सभी लोग आपस में मिल-जुलकर इस बड़े त्यौहार की खुशियां बांटते हैं।”
मोहम्मद अज़ीम ने बताया, “पैगंबर साहब के यौमे पैदाइश (जन्मदिन) को लेकर हमारे अंदर बहुत पहले से एक्साइटमेंट रहती है। लड़के बहुत मेहनत करते हैं ताकि गलियों और बाजारों को अच्छे से अच्छा डेकोरेट किया जा सके। हर कोई खुशी से इसे सेलिब्रेट करता है।”
मोहम्मद सादिक ने कहा, “यह हमारे हुजूर की पैदाइश का मुबारक दिन है। घर-घर में नियाज-नजर के लिए लजीज पकवान और अच्छी चीजें बनाई जाती हैं। सबने मिलकर गलियों और घरों को सजाया है ताकि यह दिन खास बन सके।” इंसानियत और अमन का संदेश देता है बारावफात
बारावफात मुस्लिम समाज का एक महत्वपूर्ण और पवित्र धार्मिक पर्व है। यह दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद की जिंदगी, उनके आदर्शों और तालीमात को याद करने के लिए मनाया जाता है। 12 रबीउल अव्वल के दिन लोग मस्जिदों और घरों में नात-ए-पाक पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और पैगंबर साहब की सीरत यानी उनके भाईचारे, इंसानियत और अमन के संदेश को याद करते हैं। इस मौके पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाता है और गरीबों व जरूरतमंदों की इमदाद की जाती है।

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