लिसनिंग बार; जापान की 100 साल पुरानी परंपरा अब बिजनेस:मंदिर में ध्यान लगाने जैसे माहौल की मांग बढ़ी, जहां संगीत इंसान को छू सके


नाइटक्लब का सुनहरा दौर ढलने के साथ ही दुनियाभर में एक बिल्कुल अलग तरह का बिजनेस जड़ें जमा रहा है। हाई-फाई स्पीकर पर बजते विनाइल रिकॉर्ड अब डीजे की तेज धुनों की जगह ले रहे हैं। साथ ही डांस फ्लोर की जगह खामोशी से संगीत सुनते लोगों का नया ट्रेंड देखा जा रहा है। लंदन के क्लर्कनवेल इलाके में 2024 में खुले बार ‘स्पेस टॉक’ ने इसकी बानगी पेश की है। लकड़ी के स्पेसशिप जैसे दिखने वाले इस बार को खोलने से पहले मालिक ने आर्किटेक्ट, डिजाइनर और साउंड इंजीनियर तक की टीम खड़ी की, ताकि माहौल एकदम जीवंत बने। स्पेस टॉक अकेला उदाहरण नहीं है। यह जापान की सदियों पुरानी परंपरा ‘ओंगाकु किस्सा’ यानी म्यूजिक कैफे से प्रेरित उन गिनती के वेन्यू में शामिल है, जिन्हें अब दुनिया ‘लिसनिंग बार’ या ‘हाई-फाई बार’ के नाम से जानती है। जापान में पहला ओंगाकु किस्सा 1920 के दशक में खुला था, जहां लोग चाय-कॉफी पीते हुए ग्रामोफोन पर क्लासिकल, टैंगो या स्विंग संगीत सुनते थे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जैज किस्सा का दौर आया, जब महंगे आयातित रिकॉर्ड और ऑडियो उपकरण रखने वाले ये कैफे संगीत-प्रेमियों के लिए माइल्स डेविस और जॉन कोल्ट्रेन जैसे कलाकारों को सुनने का इकलौता जरिया थे। अब यही मॉडल पश्चिमी देशों, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में एक नए कारोबारी अवतार के रूप में सामने आ रहा है। इनमें से ज्यादातर वेन्यू बीते एक दशक में खुले हैं। टोक्यो में अपना लिसनिंग बार चलाने वाले कावासाकी तोशिया इसकी तुलना ‘मंदिर में ध्यान लगाने’ से करते हैं, हालांकि पश्चिमी संस्करणों में जापान जितनी सख्त खामोशी की शर्त नहीं होती। न्यूयॉर्क के बार ‘ऑल ब्लूज’ में मेहमानों से बस इतना अनुरोध किया जाता है कि ‘संगीत को बोलने दें’, जबकि स्पेस टॉक ने फोटो-वीडियो पर पाबंदी लगा रखी है। टोक्यो के म्यूजिक कैफे पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक निक ड्वायर के मुताबिक, ओंगाकु किस्सा कल्चर का असली जादू यह है कि यह एक ऐसा माहौल रचती है जहां संगीत इंसान को गहराई तक छू सके। उनका कहना है कि नए दौर के वेन्यू मालिकों ने इस फॉर्मूले को अपने हिसाब से ढाला है, जिससे यह लंदन और न्यूयॉर्क से लेकर बार्सिलोना तक हर जगह के मिजाज में फिट बैठता है। कुल मिलाकर, जापान की एक पुरानी, धीमी परंपरा अब दुनियाभर के शहरों में एक ठोस और मुनाफे वाले नाइटलाइफ बिजनेस मॉडल की शक्ल ले रही है- जहां शोर नहीं, सन्नाटे और साउंड क्वालिटी में निवेश हो रहा है। लंदन के लिसनिंग बार ‘जाजू’ के सह-संस्थापक जिम हैनमर का कहना है कि जिस रिकॉर्ड को आपने 30 बार सुना हो, वह भी इस माहौल में बिल्कुल नई धुन जैसा महसूस होता है। नए बिजनेस ट्रेंड की ये तीन बड़ी वजहें गिनाई जा रहीं 1. जापान का बढ़ता क्रेज- 2025 में रिकॉर्ड 4.3 करोड़ विदेशी पर्यटक जापान पहुंचे। वीडियो गेम से लेकर फैशन तक जापान लंबे समय से दुनिया के लिए ट्रेंडसेटर रहा है। 2. घटते नाइटक्लब कल्चर के बीच लिसनिंग बार एक स्टाइलिश और आरामदायक विकल्प दे रहे हैं- न देर रात तक जागने की मजबूरी और न अगले दिन के हैंगओवर का डर। 3. बेहद निजी और क्यूरेटेड अनुभव – लंदन के लिसनिंग बार ‘जाजू’ के सह-संस्थापक जिम हैनमर इस धंधे में उतरने से पहले निजी व क्यूरेटेड अनुभव वाले जैज देखने जापान गए थे।

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