बदायूं2 मिनट पहले
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बदायूं में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है। शनिवार को कछला में गंगा का जलस्तर 162.55 मीटर गेज पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 162.40 मीटर से 15 सेंटीमीटर अधिक है। लगातार बढ़ते पानी का असर तटवर्ती गांवों में दिखने लगा है।
उसावां ब्लॉक के कदमनगला गांव में गंगा का पानी आबादी तक पहुंच गया है। इसके बाद ग्रामीणों ने घरों से जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। कई परिवार अपने घरों से सोलर पैनल और अन्य बिजली के उपकरण भी उतारकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं।
कदमनगला में शनिवार को अमित यादव के घर तक पानी पहुंच गया। ग्रामीण अपने घरों से सामान निकालने में जुटे हैं, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में संभावित नुकसान से बचा जा सके।
गांव के सामने केवल बाढ़ के पानी का ही नहीं, बल्कि गंगा के लगातार कटान का भी खतरा है। पिछले कई दिनों में गंगा की धार गांव का एक बड़ा हिस्सा निगल चुकी है। लगभग एक दर्जन मकान कटकर गंगा में समा चुके हैं।
प्रभावित परिवारों में राजाराम, नेक राम, पाती राम, आशाराम, जगपाल, धनपाल, सुनील, अनिल, महेश कुमार, मीना, उमेश और अजय शामिल हैं। कई परिवार पहले ही अपना जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं।



कदमनगला में गंगा का कटान लगातार बढ़ता गया। हजारों बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। इसके बाद कटान आबादी की ओर बढ़ा और गांव का सरकारी स्कूल भी इसकी चपेट में आ गया। स्कूल के बाद एक-एक कर कई मकानों के आसपास की जमीन कटती चली गई।
अब बढ़ते जलस्तर के साथ पानी सीधे आबादी में पहुंच गया है। बचे हुए परिवारों के सामने अपने घर और सामान को सुरक्षित बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
छोड़ा गया 3.26 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी
ऊपरी बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण कछला में गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। नरौरा बैराज से 1,34,584 क्यूसेक, बिजनौर से 99,406 क्यूसेक और हरिद्वार से 92,870 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तीनों बैराजों से मिलाकर 3,26,860 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसका असर आने वाले घंटों में कछला समेत तटवर्ती इलाकों में और दिखाई दे सकता है।
