शातिर अपराधी दिलशाद उर्फ मोनू छह माह के लिए जिलाबदर:गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत डीएम के आदेश पर मऊ से निष्कासित


मऊ। कोतवाली नगर पुलिस ने शातिर अपराधी दिलशाद उर्फ मोनू को छह माह के लिए जिलाबदर कर दिया है। यह कार्रवाई गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत की गई, जिसके बाद उसे जनपद मऊ की सीमा से निष्कासित कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर के निर्देश, अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी नगर नितेश प्रताप सिंह के निर्देशन में कोतवाली नगर पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की। जिला मजिस्ट्रेट मऊ द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में दिलशाद उर्फ मोनू (पुत्र इश्तेयाक उर्फ गामा, निवासी पठान टोला, थाना कोतवाली नगर, उम्र करीब 40 वर्ष) को 19 अगस्त 2026 को छह माह के लिए जिलाबदर किया गया। पुलिस के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद संख्या 467/2026 सरकार बनाम दिलशाद उर्फ मोनू में उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 3(1) के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। जिलाबदर किए गए दिलशाद उर्फ मोनू के खिलाफ कोतवाली मऊ में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2018 में उसके खिलाफ मारपीट, बलवा, तोड़फोड़ और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2019 और 2020 में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हुए। वर्ष 2024 में चोरी का माल रखने, चोरी का माल खरीदने-बेचने और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि वर्ष 2006 में आबकारी अधिनियम के तहत भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस जिलाबदर कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है।

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