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पीलीभीत के बेसिक शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट के भुगतान में 2.13 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने तत्कालीन लेखाकार और वर्तमान जिला समन्वयक (निपुण) ललित वर्मा को मामले में दोषी माना है। समिति ने उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला अनुश्रवण समिति को संस्तुति भेजी है। जांच टीम ने ग्रांट जारी करने और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि एक ही विद्यालय को अलग-अलग मदों में कई बार धनराशि भेजी गई। समिति ने इसे वित्तीय अनियमितता माना है। कंपोजिट ग्रांट में 22 हजार तीन बार भेजे जांच के अनुसार, कंपोजिट ग्रांट के तहत 22 हजार रुपए की धनराशि तीन बार भेजी गई। इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब के लिए 1.33 लाख रुपए का अनियमित भुगतान मिला। टीएलएम मद में भी 4,600 रुपए की रकम तीन बार ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। विद्यालय से पूरी रकम की वसूली मामला सामने आने के बाद संबंधित विद्यालय से पूरी धनराशि की वसूली कर ली गई है। सीडीओ सतीश मिश्रा के माध्यम से जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। वहीं बीएसए कार्यालय से संबद्ध अनुदेशक धनंजय को इस प्रकरण में पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। उन्होंने बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। कई स्कूलों में गड़बड़ी की आशंका विभागीय सूत्रों के अनुसार, अनियमित भुगतान का मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं हो सकता। जिले के अन्य विद्यालयों में भी ग्रांट के नाम पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि व्यापक जांच होने पर अनियमितता की रकम 50 लाख रुपए से अधिक हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। एक लॉगिन आईडी के इस्तेमाल पर भी सवाल जांच के दौरान एक ही लॉगिन आईडी का दो कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब जिला अनुश्रवण समिति की आगामी बैठक में दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला होने की उम्मीद है।
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शिक्षा विभाग की ग्रांट में 2.13 लाख का अनियमित भुगतान:लेखाकार रहे जिला समन्वयक दोषी, एक ही स्कूल को अलग-अलग मदों में कई बार भेजी रकम